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Home » नुआखाई त्योहार 2025: पवित्र शास्त्र नुआखाई के बारे में क्या कहते हैं?

Spirituality

नुआखाई त्योहार 2025: पवित्र शास्त्र नुआखाई के बारे में क्या कहते हैं?

SA News
Last updated: August 27, 2025 2:44 pm
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नुआखाई त्योहार 2025 पवित्र शास्त्र नुआखाई के बारे में क्या कहते हैं
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नुआखाई उत्सव देवताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। ओडिशा में कम दबाव के कारण हुई भारी बारिश से इस वर्ष गणेश पूजा और नुआखाई उत्सव में कुछ खलल पड़ा है। लेकिन यह भी एक संकेत है कि बुरे समय से केवल सतभक्ति ही बचा सकती है। लोग 28 अगस्त को नुआखाई उत्सव मनाएँगे। इस अवसर पर पाठक जानेंगे कि सच्ची भक्ति (सतभक्ति) ही वह साधन है, जो विपरीत परिस्थितियों से रक्षा कर सकती है और जीवन को सुख-शांति प्रदान कर सकती है।

Contents
  • नुआखाई उत्सव 2025: नुआखिया उत्सव क्या है?
  • नुआखाई उत्सव 2025: नुआखाई कब मनाया जाता है?
  • नुआखाई का क्या अर्थ है?
  • नुआखाई उत्सव 2025: नुआखाई के बारे में जानने योग्य कुछ ज़रूरी बातें :-
  • ओडिशा में कम दबाव के कारण बारिश से गणेश पूजा और नुआखाई उत्सव में खलल 
  • क्या नुआखाई पवित्र शास्त्रों के अनुसार मनाई जाती है?
  • परमेश्वर कौन है?
  • कृषक समुदाय को संत रामपाल जी महाराज से मंत्र दीक्षा लेनी चाहिए।

● भारतीय राज्य ओडिशा और झारखंड में नुआखाई त्योहार व्यापक रूप से मनाया जाता है।

● यह त्योहार भरपूर फसल के लिए पितृ देवताओं के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

● इस वर्ष, लोग 28 अगस्त को नुआखाई त्योहार मना रहे हैं।

● नुआ का अर्थ है नया, और खाई का अर्थ है भोजन, अर्थात नए भोजन का उत्सव।

● ओडिशा में कम दबाव के कारण बारिश से गणेश पूजा और नुआखाई उत्सव में खलल । 

● किसानों को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब (कविर्देव) की आराधना करनी चाहिए।

● बुरे समय से बचने के लिए किसानों को संत रामपाल जी महाराज से मंत्र दीक्षा लेनी चाहिए।

नुआखाई उत्सव 2025: नुआखिया उत्सव क्या है?

नुआखाई उत्सव 2025, एक कृषि उत्सव है जो 28 अगस्त, 2025 को मनाया जाएगा, और मुख्य रूप से ओडिशा के पश्चिमी क्षेत्रों में नए चावल के स्वागत के लिए मनाया जाता है। पवित्र शास्त्र सीधे तौर पर नुआखाई का उल्लेख नहीं करते, लेकिन यह त्योहार भगवान के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति के साथ किसानों के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। इस दिन, किसान अपनी नई फ़सल देवताओं को समर्पित करते हैं और फिर इसे परिवार व समुदाय के साथ ‘नवान्नभोज’ के रूप में मनाते हैं। 

नुआखाई उत्सव 2025: नुआखाई कब मनाया जाता है?

नुआखाई ओडिशा का एक वार्षिक फसल उत्सव है, जो नए धान की फसल के स्वागत में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद मनाया जाने वाला यह पर्व पश्चिमी ओडिशा और झारखंड के सिमडेगा से सटे क्षेत्रों का सबसे शुभ और महत्वपूर्ण सामाजिक त्योहार माना जाता है। यह पूरे ओडिशा में उत्साह के साथ मनाया जाता है और वर्ष 2025 में यह 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

नुआखाई का क्या अर्थ है?

आइए नुआखाई त्योहार के एक महत्वपूर्ण पहलू को समझें। ‘नुआ’ का अर्थ है नया और ‘खाई’ का अर्थ है भोजन। इस प्रकार नुआखाई का शाब्दिक अर्थ है—नया भोजन। इस दिन कृषक समुदाय नई फसल से प्राप्त अन्न का प्रथम आहार ग्रहण करता है और अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करता है।

नुआखाई उत्सव 2025: नुआखाई के बारे में जानने योग्य कुछ ज़रूरी बातें :-

● 1991 में ओडिशा सरकार ने इस त्योहार को आधिकारिक अवकाश घोषित कर दिया था। 

● इसकी जड़ें वैदिक काल से मानी जाती हैं, जब किसानों द्वारा नई फसल को देवी-देवताओं को अर्पित करने की परंपरा थी।

● नुआखाई उत्सव से जुड़े है नौ मुख्य रंग और नौ अलग-अलग रीति-रिवाज।

● ओडिशा के पश्चिमी भागों जैसे कालाहांडी, संबलपुर, बलांगीर, बरगढ़, सुंदरगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों के लोग इसे बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

ओडिशा में कम दबाव के कारण बारिश से गणेश पूजा और नुआखाई उत्सव में खलल 

बारिश या खराब मौसम की स्थिति में भी नुआखाई उत्सव मनाया जाएगा, हालांकि इसका स्वरूप बदल सकता है। वर्षा के कारण बाहरी गतिविधियाँ और जुलूस प्रभावित हो सकते हैं, जिसके चलते लोग सामूहिक रूप से एकत्र होने के बजाय अपने घरों और मंदिरों में उत्सव मना सकते हैं। फिर भी, नई फसल का स्वागत करने और देवी-देवताओं को अर्पित करने के पारंपरिक अनुष्ठान पहले की तरह निभाए जाएँगे।

Read in English: Nuakhai Festival: What do Holy Scriptures say about Nuakhai?

क्या नुआखाई पवित्र शास्त्रों के अनुसार मनाई जाती है?

लोग नुआखाई पर्व बड़े उत्साह से मनाते हैं और अपने कुलदेवताओं की पूजा करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उन्होंने उन्हें समृद्ध कृषि के लिए आवश्यक सभी वस्तुएँ प्रदान की हैं। भोले-भाले लोग यह भूल जाते हैं कि ये देवता उनके पूर्व कर्मों के अनुसार निर्धारित राशि से अधिक कुछ नहीं दे सकते।

किसानों को यह समझना चाहिए कि कई बार अत्यधिक या बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या सूखे के कारण फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। किसान फसल चक्र में लगाई गई अपनी लागत भी नहीं निकाल पाता। यह नुकसान क्यों होता है? यह पूजा के अभाव में या दुर्भाग्य के कारण होता है।

परमेश्वर कौन है?

अतः, यह समझना आवश्यक है कि किसानों को परमपिता परमेश्वर कबीर साहेब (कविर्देव) की पूजा करनी चाहिए। समाज को अनुचित प्रथाओं को बदलने के लिए आगे आना चाहिए। भगवद्गीता, वेद, पुराण जैसे पवित्र शास्त्रों में बताई गई भक्ति को अपनाकर लोगों को हमेशा अच्छे समय की प्राप्ति होगी। उन्हें नशा, मांसाहार, पशुबलि, दहेज आदि सभी बुराइयों का त्याग करना चाहिए।

कृषक समुदाय को संत रामपाल जी महाराज से मंत्र दीक्षा लेनी चाहिए।

किसानों को तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेनी चाहिए। उन्हें संत जी के बताए अनुसार भक्ति करनी चाहिए और मंत्र (सतनाम/सारनाम) का जाप करना चाहिए। इससे वे अपने पिछले कर्मों का नाश कर सकेंगे और दुःखरहित जीवन जी सकेंगे। उन्हें मोक्ष भी प्राप्त होगा तथा मृत्यु के पश्चात् उनका मानव शरीर उनके मूल शाश्वत धाम सतलोक में वास करेगा। साधकों को “Satlok Ashram Youtube Channel ” पर संत रामपाल जी महाराज के प्रवचन सुनने चाहिए तथा पुस्तक “जीने की राह” पढ़नी चाहिए।

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