झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 4 अगस्त सोमवार को सर गंगाराम हस्पताल में निधन हो गया। 81 वर्षीय शिबू सोरेन काफी लंबे समय से किडनी के मरीज थे, जिसके चलते वह पिछले डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे। वह बीते 1 साल से डायलिसिस पर थे। उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनके शरीर का बायां हिस्सा पैरालिसिस हो गया था। पिछले एक महीने से लाइफ सपोर्ट सिस्टम में थे।
उन्हें डायबीटीज भी थी और हार्ट की बाईपास सर्जरी भी हो चुकी थी। बीते कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। डॉक्टर की एक टीम, जिसमें न्यूरोलॉजी कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी शामिल थी, उनका इलाज कर रही थी।
शिबू सोरेन के पुत्र तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अस्पताल में मौजूद थे जब उन्होंने अंतिम सांस ली। सीएम हेमंत सोरेन ने X के माध्यम से अपने पिता की जानकारी साझा की और लिखा “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सबको छोड़कर चले गए, आज मैं शून्य हो गया हूं।”
यह खबर सुनकर राज्य सरकार ने 3 दिनों के राजकीय शोक का ऐलान किया ।।
पीएम मोदी ने अस्पताल में दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिबू सोरेन के निधन की सूचना मिलते ही उनसे रहा नहीं गया। लगभग दोपहर 1:45 पर प्रधानमंत्री सर गंगाराम अस्पताल पहुंचकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों को सांत्वना देते हुए दिबंगत सांसद को श्रद्धांजलि भी दी। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, मीसा भारती, मनोज झा और RJD के कई नेताओं ने भी अस्पताल में परिजनों से मुलाकात की तथा श्रद्धांजलि अर्पण की ।।
पार्थिक शरीर को रांची वाले आवास पर लाया गया
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का पार्थिक शरीर सोमवार को शाम 5 से 6 बजे तक दिल्ली से रांची लाया गया। रांची एयरपोर्ट पर ही उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कई राजनीतिक नेता तथा स्थानीय समर्थक पहुंचे। उनका पार्थिक शरीर एयरपोर्ट से सीधा उनके निवास घर मुरादाबाद के गांव नेमरा में ले जाया गया ।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजत प्रमुख लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने भी शोक व्यक्त किया। शिबू सोरेन के निधन पर विभिन्न नेताओं ने शोक व्यक्त किया है, जिनमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं।
नेताओं के शोक संदेश:
– नीतीश कुमार ने शिबू सोरेन के महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।
– लालू प्रसाद यादव ने उन्हें सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले एक साथी के रूप में याद किया।
– तेजस्वी यादव ने उन्हें अपना अभिभावक बताया और सामाजिक न्याय एवं आदिवासी कल्याण में उनके ऐतिहासिक योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।
– नरेंद्र मोदी ने उन्हें आदिवासी समाज और गरीबों के सशक्तिकरण के लिए लंबा संघर्ष करने वाला नेता बताया।
– द्रौपदी मुर्मू ने शिबू सोरेन का निधन सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति बताया ।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार आज मंगलवार को रामगढ़ के नेगरा गांव में दोपहर 12:00 बजे किया जाएगा। इसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष खड़गे तथा राहुल गांधी शामिल होंगे छोटे बेटे बसंत सोरेन उन्हें मुखाग्नि देंगे।
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यूपीए सरकार के दौरान रहे थे कोयला मंत्री
UPA एक राजनीतिक गठबंधन था जिसने भारत में 2004 से 2014 तक सरकार चलाई। इस दौरान शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षण थे। वह यूपीए के पहले कार्यकाल के दौरान कोयला मंत्री रह चुके थे परंतु चिरूडीह हत्या कांड में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था ।।
शिबू सोरेन का जीवन काल
– 1957 में 13 साल की उम्र में पिता की हत्या होने से उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।
– 1969 में पहले विधानसभा चुनाव लड़ा जो CPI के टिकट पर रामगढ़ से था, परंतु हार गए।
– 1970 के दशक में सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन किया ।
– 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा बनाया जिसका उद्देश्य आदिवासियों का हक और अलग राज्य की मांग था ।
– 1980 में पहली बार सांसद बने। दुमका से लोकसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की।
– 1985 में जामा सीट से विधायक बनें ।
– 1989 में दुमका से फिर सांसद बनें ।
– मार्च 2005 में पहली बार सीएम बने परंतु 10 दिन में इस्तीफा भी दे दिया। कारण रहा बहुमत साबित नहीं कर सके।
– 28 अगस्त 2008 को दूसरी बार झारखंड के सीएम बने परंतु 5 महीने बाद 18 जनवरी 2009 को ही इस्तीफा दे दिया। कारण रहा उपचुनाव नहीं जीत पाए।
– 30 दिसंबर 2009 में तीसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। इस बार इनका कार्यकाल केवल 5 महीने का रहा। उन्होंने 31 मई 2010 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया ।
– 2014 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीते।
– 2020 से शिबू सोरेन राज्यसभा सांसद थे।
– 4 अगस्त 2025 सोमवार को निधन हुआ ।
राम नाम सत्य है
मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों भोगने के बाद प्राप्त होता है। मनुष्य जन्म का उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति होता है। पृथ्वी पर मौजूद सभी धर्म के सभी पवित्र ग्रंथ भी परमात्मा प्राप्ति का संदेश देते हैं, परंतु विडंबना यह है कि मनुष्य अपने असली उद्देश्यों को भूलकर अन्य कार्यों में उलझा रहता है। सत्य भक्ति न करके जीते-जी भी कष्ट उठाता है और मृत्यु उपरांत भी कष्ट उठाता है, शास्त्र अनुसार।
कबीर साहब अपनी वाणी में रहते हैं :-
कबीर, मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले ना बारंबार।
तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता डार।।
मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभ है यह बार-बार नहीं मिलता जैसे पेड़ से पत्ता टूट कर गिर जाता है वह फिर से उसी वृक्ष पर नहीं लगता। बिल्कुल इसी तरह एक बार मृत्यु होने के पश्चात मनुष्य जन्म दोबारा नहीं मिलता है। हमें आइए हम सभी सत्यभक्ति करें और संत रामपाल जी महाराज जी से नामदीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाएँ। अधिक जानकारी के लिए देखें संत रामपाल जी महाराज के सत्संग साधना टीवी पर प्रतिदिन शाम साढ़े सात बजे।