चंडीगढ़/हिसार, 9 अप्रैल 2026। संत रामपाल जी महाराज की सच और इंसाफ के लिए लड़ाई कई सालों से चली आ रही है और आज इसमें एक और अहम मोड़ आया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में आज संत रामपाल जी महाराज की अंतिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। इस सुनवाई में संत रामपाल जी महाराज को FIR 428 में जमानत की मंजूरी मिलना केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि सत्य की विजय का प्रतीक बनकर सामने आया है।
- केस की कानूनी जानकारी
- कौन हैं संत रामपाल जी महाराज?
- 14 मुकदमे — और एक-एक करके बरी होने का सफर
- हाईकोर्ट ने FIR 429 और 430 में उम्रकैद की सजा रोकी
- देशद्रोह का मुकदमा — हजार में से अधिकतर को मिल चुकी जमानत
- करौंथा घटना 2006: क्या हुआ था उस दिन?
- बरवाला घटना 2014: सच क्या था?
- बिकाऊ मीडिया ने फैलाया झूठ का जाल
- संत रामपाल जी महाराज के समाज सेवा कार्य
- नशे से मुक्ति
- बिना दहेज के शादी, सिर्फ 17 मिनट में
- रक्तदान और देहदान शिविर
- कोरोना में राहत सेवा
- अन्नपूर्णा मुहिम: कोई भी भूखा न सोए, यही संकल्प
- और भी बहुत कुछ
- अंतत सच्चाई की हुई धमाकेदार जीत
बीते वर्ष FIR 429 एवं 430 में एक के बाद एक सजा निलंबित होने के बाद यह जमानत इस अटल सत्य को और मजबूत करती है कि ‘सांच को आंच नहीं’ आ सकती। सन् 2014 से बिना दोष सिद्ध हुए वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में रहना, एक निर्दोष संत की सहनशीलता, धैर्य और अटूट विश्वास का प्रमाण है। यह ऐतिहासिक फैसला न केवल संत रामपाल जी महाराज में विश्वास को पुनर्जीवित करता है, बल्कि उन लाखों अनुयायियों की आस्था को भी सशक्त करता है, जो मानते हैं कि अंततः सत्य ही विजयी होता है। आइए जानते हैं सभी जानकारी विस्तार से।
केस की कानूनी जानकारी
केस नंबर CRM-M-57908-2025 की यह सुनवाई चंडीगढ़ स्थित कोर्ट रूम नंबर 7 में माननीय जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और माननीय जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ के सामने URGENT:111 के तहत हुई।
कोर्ट के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 8 अप्रैल 2026 को इसी बेंच ने जमानत याचिका को “ALLOWED” घोषित कर दिया। संत रामपाल जी महाराज की पैरवी अधिवक्ता अर्जुन श्योराण (P-867-2011) कर रहे हैं, जबकि हरियाणा सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल (P-88-88) पेश हुए।

हाईकोर्ट के पोर्टल पर दर्ज ब्यौरे के अनुसार यह NIA एक्ट, 2019 के तहत दायर आपराधिक जमानत याचिका है। इसका CNR नंबर PHHC011619572025 है और इसे 13 अक्टूबर 2025 को रजिस्टर किया गया था। इससे पहले 30 मार्च 2026 को जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हुई थी, और उसी दिन एक अंतरिम आदेश भी पारित किया गया था।
Court Order PDF
कौन हैं संत रामपाल जी महाराज?
संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा के सोनीपत जिले की गोहाना तहसील के धनाना गांव में हुआ। मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने करीब 18 साल तक हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में काम किया। 1988 में उनकी मुलाकात कबीर पंथी संत स्वामी रामदेवानंद जी महाराज से हुई, जिनसे उन्होंने नाम दीक्षा ली। 1994 में स्वामी रामदेवानंद जी ने उन्हें प्रवचन देने और दीक्षा प्रदान करने की अनुमति दी। इसके बाद संत रामपाल जी ने सरकारी नौकरी छोड़ी और सतलोक आश्रम की स्थापना की। तब से वे करोड़ों लोगों को आध्यात्मिक राह दिखाते आ रहे हैं। उनकी शिक्षाओं में मूर्ति पूजा, अंधविश्वास, नशा, मांसाहार और ठगी का विरोध शामिल है।
14 मुकदमे — और एक-एक करके बरी होने का सफर
हिसार के वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप के मुताबिक संत रामपाल जी महाराज पर कुल 14 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से 11 में वे बरी हो चुके हैं। यह सिलसिला इस बात की गवाही देता है कि राह भले ही लंबी रही हो, सच ने हर बार अपनी जगह बनाई।
29 अगस्त 2017 को हिसार कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार ने FIR 426 और 427 के तहत लगाए सभी आरोपों से संत रामपाल जी और उनके अनुयायियों को बरी कर दिया। 1 मई 2018 को संपत्ति पंजीकरण से जुड़े एक धोखाधड़ी के मामले में भी उन्हें और उनके दो अनुयायियों को अदालत ने बेगुनाह पाया। यह मुकदमा 2006 में करौंथा गांव स्थित सतलोक आश्रम की जमीन से जुड़ा था। 20 दिसंबर 2022 को 2006 के फायरिंग मामले में भी उन्हें बरी किया गया। और 26 जुलाई 2021 को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के एक केस में सबूत न मिलने की वजह से उन्हें और चार अन्य को अदालत ने रिहा कर दिया।
हाईकोर्ट ने FIR 429 और 430 में उम्रकैद की सजा रोकी
अक्टूबर 2018 में हिसार सत्र अदालत ने FIR 429 और 430 में संत रामपाल जी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ये दोनों मामले 2014 में सतलोक आश्रम की घेराबंदी के दौरान हुई मौतों से जुड़े थे। 28 अगस्त 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR 430 में उनकी सजा पर रोक लगाई। इसके मात्र 3-4 दिन बाद FIR 429 में भी जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नालवा की बेंच ने उम्रकैद को निलंबित कर दिया।
कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष के सबूत “गंभीर रूप से विवादास्पद” हैं और यह भी साफ नहीं है कि जो मौतें हुईं वे हत्या की श्रेणी में आती हैं या नहीं। जो लोग मारे गए, उनके परिजनों ने यानी इस मामले के मुख्य गवाहों ने मौतों का जिम्मेदार पुलिस की कार्रवाई को ठहराया। इसके अलावा संत रामपाल जी की उम्र करीब 74 साल है, वे 10 साल से अधिक जेल में रह चुके थे, और उनके 13 सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर थे।
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देशद्रोह का मुकदमा — हजार में से अधिकतर को मिल चुकी जमानत
FIR नंबर 428, दिनांक 18 नवंबर 2014, पुलिस स्टेशन बरवाला, हिसार के तहत देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। इसमें IPC की धाराएं, ARMS एक्ट और PDPP एक्ट शामिल हैं। इस FIR में करीब एक हजार लोगों के नाम थे, जिनमें से अधिकतर को अब तक जमानत मिल चुकी है। इसके साथ अब इस ऐतिहासिक फैसले के साथ संत रामपाल जी महाराज को जमानत मिलने पर यह बात तो स्पष्ट है कि सत्य कभी भी पराजित नहीं हो सकता।
Read in English: Sant Rampal Ji Maharaj Granted Bail in Sedition Case— Release Expected Soon
करौंथा घटना 2006: क्या हुआ था उस दिन?
संत रामपाल जी महाराज ने वेदों के आधार पर सत्यार्थ प्रकाश की कुछ बातों को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी और लोगों को खुद जांच करने के लिए प्रेरित किया। इससे आर्य समाज के कुछ तबकों में नाराजगी बढ़ी। 12 जुलाई 2006 को एक बड़ी भीड़ ने सतलोक आश्रम करौंथा पर हमला कर दिया। एक व्यक्ति की इस दौरान मृत्यु हुई। पुलिस मूकदर्शक बनी रही, फिर भी आरोप संत रामपाल जी पर लगे और उन्हें गिरफ्तार किया गया। सीबीआई जांच की मांग को कोई तवज्जो नहीं मिली और 2008 में उन्हें जमानत मिली।

बरवाला घटना 2014: सच क्या था?
2014 में करौंथा केस के सिलसिले में अदालत की अवमानना का मामला दर्ज हुआ। स्वास्थ्य कारणों से पेशी पर न आने पर गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। 17 नवंबर 2014 को हरियाणा सरकार ने सतलोक आश्रम बरवाला पर जल्दीबाज़ी में कार्रवाई की। आश्रम की बिजली और खाने-पीने की आपूर्ति बंद कर दी गई। शांतिपूर्ण CBI जाँच की माँग कर रहे भक्तों पर बल प्रयोग हुआ, जिसमें छह लोगों की जान गई। इसके बावजूद हत्या, देशद्रोह, और कई अन्य गंभीर धाराओं में संत रामपाल जी समेत 30 भक्तों को सेशन कोर्ट, हिसार ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
बिकाऊ मीडिया ने फैलाया झूठ का जाल
इन घटनाओं में मीडिया का रवैया काफी एकतरफा रहा। शांतिपूर्ण विरोध को उग्र और हिंसक बताया गया, जबकि पुलिस की कार्रवाई को लगभग नजरअंदाज किया गया। बाद में संत रामपाल जी की तुलना आसाराम और राम रहीम जैसे विवादित लोगों से की गई, जिसके लिए कुछ मीडिया संस्थानों को माफी भी मांगनी पड़ी।
संत रामपाल जी महाराज के समाज सेवा कार्य
संत रामपाल जी महाराज सिर्फ एक आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं। उनकी शिक्षाओं ने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदली है। नशा छुड़वाने से लेकर बाढ़ में डूबे किसानों की मदद तक, वे हर ज़रूरत में आगे आते हैं।
नशे से मुक्ति
संत रामपाल जी महाराज नशामुक्त भारत का अभियान चला रहे हैं। उनकी शिक्षा मानने वाले लाखों लोगों ने शराब, तंबाकू और ड्रग्स हमेशा के लिए छोड़ दिए। पंजाब के रशपाल सिंह और अंबाला के ऋषिपाल जैसे बहुत से लोग, जो सालों से नशे में डूबे थे, दीक्षा लेने के बाद पूरी तरह ठीक हो गए।
बिना दहेज के शादी, सिर्फ 17 मिनट में
संत रामपाल जी ने ‘रमैणी’ नाम से एक नई शादी की रीत शुरू की है। इसमें सिर्फ 17 मिनट में, बिना किसी दहेज के, बिना किसी दिखावे के शादी हो जाती है। दोनों तरफ से थोड़े लोग आते हैं, साधारण कपड़े पहनते हैं और शादी पूरी हो जाती है। न पैलेस बुक करने की जरूरत, न महंगा खाना, न दहेज। कबीर प्रकट दिवस जैसे बड़े आयोजनों पर एक साथ सैकड़ों जोड़ों की शादी रमैनी से होती है। ये शादियां बिना किसी जाति और धर्म के भेदभाव से होती है।
रक्तदान और देहदान शिविर
देश के अलग-अलग सतलोक आश्रमों में रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं। कुरुक्षेत्र, शामली, बैतूल, खमाणों मिलकर देश विदेश के 13 सतलोक आश्रमों से भी बड़ी मात्रा में रक्त दिया गया। इसके साथ ही उनके हजारों अनुयायी मृत्यु के बाद अपना शरीर डॉक्टरी पढ़ाई के लिए दान करने का संकल्प भी ले रहे हैं।
कोरोना में राहत सेवा
कोविड लॉकडाउन के दौरान जब हरियाणा में हजारों मजदूर शहरों में फंसे थे और सरकार संभाल नहीं पा रही थी, तब संत रामपाल जी के अनुयायियों ने उनके रहने, खाने-पीने का इंतजाम किया। जब बसें आईं तो मजदूरों को पैक खाना और पानी की बोतलें भी दी गईं। महामारी के दौरान खून की कमी को पूरा करने के लिए रक्तदान शिविर भी लगाए गए। आश्रम को कोविड सेंटर बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया था।
अन्नपूर्णा मुहिम: कोई भी भूखा न सोए, यही संकल्प
अन्नपूर्णा मुहिम, संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में शुरू की गई एक मानवीय सेवा पहल है, जिसका उद्देश्य भूख मिटाना और जरूरतमंद परिवारों की सहायता करना है। इस अभियान के अंतर्गत श्रद्धालु नियमित रूप से गरीब और असहाय लोगों को निःशुल्क राशन, भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं, ताकि समाज में कोई भी व्यक्ति भोजन जैसे मूल अधिकार से वंचित न रहे। इस पहल ने कई समुदायों में सकारात्मक परिवर्तन लाया है, क्योंकि इससे संघर्ष कर रहे परिवारों को राहत मिली है और लोगों में करुणा, सेवा और मानवता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा मिली है।
बाढ़ में डूबे किसानों की मदद
यह सेवाकार्य का सबसे ताजा और दिल छू लेने वाला हिस्सा है। हरियाणा, राजस्थान और आसपास के इलाकों में जहां खेतों में महीनों से पानी भरा था और किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थीं, वहां सरकार और नेता सिर्फ वादे करते रहे। ऐसे वक्त में संत रामपाल जी महाराज ने 400 से ज्यादा गांवों में मुफ्त पाइप और भारी मोटरें भेजीं ताकि खेतों का पानी निकाला जा सके।
जब किसानों की जमीन महीनों से पानी में डूबी थी। बुवाई का वक्त निकला जा रहा था। संत रामपाल जी के सानिध्य में उनकी ट्रस्ट ने वहां हाई-कैपेसिटी पाइप और पावरफुल मोटर पंप भेजे, जिससे किसान दोबारा खेती कर पाए। भदाना, चूली कलां, प्रेमनगर, गुभाना, माजरी, महम, और खैरमपुर जैसे सैकड़ों गांवों को इस मुहिम से राहत मिली।
यह सब करोड़ों रुपये की मदद है और पूरी तरह मुफ्त दी गई, बिना किसी स्वार्थ के। जिन गांवों तक यह मदद पहुंची, वहां के किसानों ने संत रामपाल जी को पगड़ी, शॉल और सम्मान चिन्ह देकर उनका आभार जताया।
और भी बहुत कुछ
इसके अलावा मुफ्त दांतों का इलाज, आंखों की जांच और ऑपरेशन करवाने तक की मदद दी जाती है। हरियाणा, बिहार की बाढ़ और हिमाचल के भूस्खलन में भी राहत कार्य किए गए। भारत और नेपाल में लाखों पेड़ लगाने का काम भी हुआ है।
अंतत सच्चाई की हुई धमाकेदार जीत
एक दशक से ज्यादा वक्त में एक-एक करके मुकदमों से बरी होना, हाईकोर्ट का सजा पर रोक लगाना, यह सब बताता है कि इंसाफ की लौ बुझती नहीं। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि उनकी उम्र, लंबे समय की कैद और गवाहों के बयानों में तथ्यात्मक विरोधाभास ये सभी राहत देने के पर्याप्त कारण थे।
आज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जो भी हुआ, यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनता जा रहा है कि दशकों की लड़ाई के बाद भी सत्य अपनी राह खुद निकाल लेता है।
भारतीय न्यायालयों में वर्षों तक लंबित रहने वाले अनेक मामलों के बीच, संत रामपाल जी महाराज से जुड़े प्रकरण केवल न्यायिक विलंब का विषय नहीं थे, बल्कि यह समस्त मानवता के लिए एक गहरी परीक्षा समान थे। इन परिस्थितियों ने उस अमूल्य आध्यात्मिक ज्ञान के प्रसार को रोकने का प्रयास किया, जो वास्तव में जनकल्याण के लिए था। कबीर साहिब की वाणी इस सत्य को स्पष्ट करती है:
कबीर, और ज्ञान सब ज्ञानड़ी, कबीर ज्ञान सो ज्ञान।
जैसे गोला तोब का, करता चले मैदान॥
जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का विभिन्न मामलों में बरी होना, जमानत प्राप्त करना तथा सजा का निलंबन, साथ ही उनके अनुयायियों की निरंतर वृद्धि और समाज हित में उनके अद्वितीय कार्य—यह सभी इस वाणी की सत्यता के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। ऐसे दिव्य अवसर पर, जब यह अनमोल तत्वज्ञान स्वयं संत रामपाल जी महाराज के माध्यम से उपलब्ध है, प्रत्येक व्यक्ति को इसे पहचानकर उनकी शरण ग्रहण कर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

