बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण, जल संकट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
जैसा कि आपको पता है हम प्रतिदिन अनेक वस्तुओं का उपयोग करते हैं जैसे – प्लास्टिक की आइटम, कागज, मिट्टी के बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान इत्यादि। इन वस्तुओं के उपयोग के बाद जो कचरा निकलता है, वह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। जानें कैसे हम कचरे को कम कर सकते हैं और प्राकृतिक संसाधनों की बचत कर सकते हैं।
अपशिष्ट प्रबंधन क्या है, कचरे के प्रकार कौन-कौन से हैं, तथा कचरा निपटान के मुख्य तरीके जैसे पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, दहन विधि और लैंडफिल। साथ ही 3R सिद्धांत समझें Refuse, Reuse और Recycle
अपशिष्ट प्रबंधन क्या है?
कचरे को उत्पन्न होने से लेकर उसके अंतिम निपटान तक व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से मैनेज करना ही अपशिष्ट प्रबंध है इसका उद्देश्य पर्यावरण प्रदूषण कम करना, स्वच्छता बनाए रखना और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
जब कूड़ा-कचरा खुले में पड़ा रहता है, तो उससे दुर्गंध फैलती है, जिस वजह से मच्छर और कीट पनपते हैं तथा कई संक्रामक बीमारियाँ फैलाते हैं। रासायनिक कचरा और प्लास्टिक यह मिट्टी और जल को प्रदूषित करता है। इसलिए कचरे का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है।
अपशिष्ट के प्रकार
अपशिष्ट को मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं
1. गीला कचरा – रसोई का बचा- खुचा भोजन, फल-सब्जियों के छिलके आदि।
2. सूखा कचरा – कागज, कपड़ा, कांच, प्लास्टिक, धातु, आदि।
3. खतरनाक कचरा – बैटरी, रसायन, मेडिकल वेस्ट, दवाइयाँ आदि।
अपशिष्ट प्रबंधन के तरीके
1. पृथक्करण (Segregation)
सबसे पहला कदम यह है कि घर में ही कचरे को अलग-अलग कूडादान में रखें। अलग अलग छांटकर रखने से पुनर्चक्रण और निपटान की प्रक्रिया और भी सरल हो जाती है।
2. कचरा संग्रहण और परिवहन
नगरपालिका द्वारा घर-घर से कचरा संग्रह करते हैं और उसे निर्धारित स्थान तक पहुंचाते हैं और स्वच्छता के लिए नियमित रूप से कचरा उठाना आवश्यक है।
3. कम्पोस्टिंग (खाद बनाना)
जैविक प्रक्रिया से गीले कचरे को खाद में बदला जाता है। यह खाद खेतों और बगीचों के लिए उपयोगी होती है और मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाती है।
4. दहन विधि (Incineration)
कुछ कचरे को उच्च तापमान पर जलाते है, जिससे उसकी मात्रा कम हो जाती है। दहन विधि से ऊर्जा भी उत्पन्न की जाती है।
5. लैंडफिल विधि
जिस कचरे का दुबारा उपयोग संभव नहीं होता, उसे मिट्टी में सुरक्षित तरीके से दबाया जाता है। जब कोई विकल्प नहीं होता तब यह अंतिम विकल्प माना जाता है।
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पुनर्चक्रण क्या है?
पुराने या बेकार पदार्थों को दोबारा उपयोगी वस्तु में बदलना “पुनर्चक्रण” कहलाता है। पुनः चक्रण से कचरे की मात्रा कम होती है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है जैसे पुराने अखबारों से नया कागज बनाना, प्लास्टिक की आइटम से नए उत्पाद तैयार करना और धातुओं को पिघलाकर फिर से नई बनाके उपयोग करना। पुनर्चक्रण से ऊर्जा की खपत कम होती हैं जिससे पर्यावरण पर कम दबाव पड़ता है।
3R सिद्धांत
अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण का आधार 3R सिद्धांत
1. Refuse (अस्वीकार करना)
बिना काम की और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली वस्तुओं को लेने से मना करें। जैसे सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना है।
2. Reuse (पुनः उपयोग करें)
किसी वस्तु को फेंकने के बजाय गरीबों को दान कर दे। ताकि वह उसे दोबारा इस्तेमाल करें। जैसे पुराने डिब्बों या बोतलों का उपयोग। फल सब्जियां आदि
3. Recycle (पुनर्चक्रण करें)
बेकार या पुरानी वस्तुओं को रीसाइक्लिंग प्रक्रिया द्वारा नया उपयोगी समान बनाएं, ताकि उनका दुबारा से उपयोग हो सके।
अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण का महत्व
- पर्यावरण प्रदूषण में कमी और पर्यावरण सुरक्षित, स्वच्छ रहता है।
- जल, वायु और मृदा प्रदूषण कम होता है।
- प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
- ऊर्जा की खपत कम जिससे ऊर्जा की बचत होती है होती है।
- रोजगार के नए नए अवसर प्रदान करते हैं।

