पाकिस्तान में एक बार फिर शिया समुदाय को निशाना बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह वारदात किसी सीमावर्ती या दूरस्थ क्षेत्र में नहीं, बल्कि देश की राजधानी इस्लामाबाद से सामने आई है। जुमे की नमाज़ अदा कर रहे शिया मुसलमानों पर अचानक हमला किया गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मुख्य बिंदु:-
- जुमे की नमाज के दौरान आत्मघाती धमाका, 31 की मौत, 170 से ज्यादा घायल।
- 9 साल बाद इस्लामाबाद की शिया मस्जिद फिर बनी आतंकी निशाना।
- पाकिस्तान की राजधानी दहली, शिया मस्जिद में भीषण आतंकी हमला।
- हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में हमला, सुरक्षा तंत्र की बड़ी नाकामी उजागर।
जुमे की नमाज में आत्मघाती हमला, 31 मौतें, 170 से अधिक घायल
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद शुक्रवार को शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले से दहल उठी। तरलाई कलां स्थित इमामबाड़ा कास्र-ए-खदीजतुल कुबरा में जुमे की नमाज के दौरान विस्फोट हुआ। जहां करीब 700 लोग मौजूद थे।
धमाके में 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि 170 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। घटना ने शिया समुदाय की सुरक्षा और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ा है।
पाकिस्तान में शिया अल्पसंख्यकों पर हिंसा का इतिहास रहा है, हालांकि इस्लामाबाद को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था। राजधानी में शियाओं को निशाना बनाकर ऐसा हमला करीब नौ साल बाद हुआ है, जिससे सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है।
आठ नौ साल बाद इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में फिर हमला
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शिया मस्जिद को निशाना बनाने की घटना करीब नौ साल बाद सामने आई है। इससे पहले नवंबर 2017 में शिया मस्जिद पर हमला हुआ था। शुक्रवार, 6 फरवरी को जुमे की नमाज के दौरान हुए इस हमले ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन शुरुआती जांच में शक कट्टरपंथी सुन्नी विचारधारा से जुड़े आतंकी गुटों पर जताया जा रहा है। आतंकवाद पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला आत्मघाती हो सकता है, जो चिंता को और बढ़ाता है।
रिसर्चर अब्दुल सईद के मुताबिक, अगर इस हमले में इस्लामिक स्टेट (खुरासान) की संलिप्तता की पुष्टि होती है, तो आने वाले समय में पाकिस्तान में शिया समुदाय के खिलाफ हिंसक घटनाओं में इजाफा हो सकता है। यह हमला देश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।
पाकिस्तान की राजधानी में आतंकी वार, शिया मस्जिद में मचा कोहराम
शुक्रवार को शिया मस्जिद में हुआ यह हमला पाकिस्तान, खासकर राजधानी इस्लामाबाद में शिया मुस्लिमों पर किए गए सबसे भयावह और बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। अब तक 31 लोगों की मौत और 170 से अधिक लोगों के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में कई लोगों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत पाए गए हैं, जो धमाके की तीव्रता और क्रूरता को साफ तौर पर दर्शाता है।
मस्जिद परिसर में मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, धमाका इतना जबरदस्त था कि कुछ पलों के लिए लोगों की सुनने की क्षमता तक चली गई। अचानक हुए विस्फोट से पूरा इलाका दहल उठा और लोग सदमे में आ गए।
कुछ ही सेकंड बाद चारों तरफ खून से सने घायल लोग, बिखरे जूते-चप्पल और दर्दनाक चीख-पुकार का मंजर दिखाई देने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह दृश्य किसी कयामत से कम नहीं था और लंबे समय तक उनकी आंखों के सामने से नहीं हटेगा।
सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता
राजधानी इस्लामाबाद में, वह भी जुमे की नमाज के दौरान इतने बड़े इमामबाड़े में आत्मघाती हमलावर का पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया, घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया और शहर में हाई अलर्ट घोषित किया गया।
इस हमले ने न सिर्फ शिया समुदाय में भय और आक्रोश बढ़ाया है, बल्कि पाकिस्तान में पहले से नाजुक सांप्रदायिक संतुलन को और कमजोर करने की आशंका भी गहरा दी है।

