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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: कांग्रेस का विरोध तेज, हलफनामे में जानकारी छिपाने के आरोप पर बढ़ा कानूनी विवाद

Khushi Sharma
Last updated: June 11, 2026 10:54 am
Khushi Sharma
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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, बढ़ा राज्यसभा विवाद
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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद गहरा गया है। भाजपा की आपत्ति स्वीकार करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन निरस्त कर दिया। भाजपा का आरोप है कि नटराजन ने तेलंगाना से जुड़े एक लंबित मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी और केवल एक नोटिस के आधार पर नामांकन रद्द किया गया। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देने की घोषणा की है।

Contents
  • मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद: प्रमुख बातें
  • कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
  • कांग्रेस ने फैसले को बताया साजिश
  • कानूनी विवाद का केंद्र क्या है?
  • भाजपा का पक्ष क्या है?
  • भोपाल में हंगामा, नेताओं की मौजूदगी
  • विवेक तन्खा और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
  • मंडला में कांग्रेस का प्रदर्शन
  • राज्यसभा चुनाव का गणित
    • मध्य प्रदेश विधानसभा की स्थिति
  • आगे की लड़ाई कानूनी मंचों पर
  • ईमानदारी और सत्य का मार्ग
  • FAQs on Meenakshi Natarajan Nomination Rejection

मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद: प्रमुख बातें

  • रद्द हुआ कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन।
  • भाजपा ने तेलंगाना से जुड़े लंबित मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया।
  • कांग्रेस ने कहा कि नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी।
  • कांग्रेस ने फैसले को अवैध और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
  • मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए।
  • चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही गई।
  • विवाद का केंद्र अदालत के नोटिस के खुलासे का कानूनी प्रश्न बना हुआ है।
  • नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बढ़ गई है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच के दौरान रद्द कर दिया गया। भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि नटराजन ने तेलंगाना में लंबित एक मामले से जुड़ी जानकारी अपने हलफनामे में शामिल नहीं की।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतंत्र पर हमला है।

जिस मामले का आधार बनाकर नामांकन निरस्त किया गया, उसमें न कोई प्रकरण दर्ज है, न कोई दोषसिद्धि हुई है और न ही कोई न्यायिक निर्णय आया है। केवल एक नोटिस को आधार बनाकर इतनी बड़ी… pic.twitter.com/zUdTw8hq6a

— Umang Singhar (@UmangSinghar) June 10, 2026

रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति स्वीकार कर नामांकन निरस्त कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि उम्मीदवार को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का अवसर दिया गया था, लेकिन वह जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं करा सकीं। इसके बाद कारणों का उल्लेख करते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।

कांग्रेस ने फैसले को बताया साजिश

कांग्रेस ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है।

मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि भाजपा ने पर्याप्त वोट न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारा था और कांग्रेस को पहले से आशंका थी कि रास्ते में बाधाएं खड़ी की जाएंगी।

यह भी पढ़ें:  भारत निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस: वोट चोरी विवाद पर सफाई

उन्होंने कहा कि पहले वोट चोरी की जा रही थी और अब सीटें चुराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को हर लोकतांत्रिक और संवैधानिक मंच पर लड़ेगी।

कांग्रेस की चिंताओं के पीछे 2020 का राजनीतिक घटनाक्रम भी बताया गया, जब कमलनाथ सरकार गिर गई थी और ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित 22 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। इसी वजह से कांग्रेस इस चुनाव में संभावित क्रॉस-वोटिंग और राजनीतिक दबाव को लेकर सतर्क थी।

कानूनी विवाद का केंद्र क्या है?

पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि क्या हैदराबाद की अदालत से जारी नोटिस का उल्लेख चुनावी हलफनामे में करना अनिवार्य था।

कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि अजय गुप्ता के अनुसार यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 से जुड़ा था और इसे सामान्य आपराधिक मुकदमे की तरह नहीं देखा जा सकता।

कांग्रेस का दावा है:

  • नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
  • अदालत ने किसी आपराधिक मामले में आरोप तय नहीं किए थे।
  • केवल एक नोटिस जारी हुआ था।
  • नोटिस का जवाब उनकी ओर से दिया जा चुका था।

कांग्रेस का कहना है कि ऐसी स्थिति में इसका उल्लेख हलफनामे में करना अनिवार्य नहीं था। इसी आधार पर पार्टी चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कह रही है।

भाजपा का पक्ष क्या है?

भाजपा ने कांग्रेस के तर्कों को खारिज किया है।

भाजपा के कानूनी प्रकोष्ठ के सदस्य संकेत गुप्ता का कहना है कि मामला केवल एफआईआर तक सीमित नहीं है। यदि किसी मामले में अदालत की ओर से समन या नोटिस जारी हो चुका है तो उम्मीदवार को उसकी जानकारी देनी चाहिए।

भाजपा का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन यह नहीं कह सकतीं कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी क्योंकि हैदराबाद अदालत से जारी नोटिस का जवाब उनकी ओर से दिया गया था।

भाजपा का दावा है कि इस जानकारी को छिपाना नामांकन संबंधी नियमों का उल्लंघन है।

भोपाल में हंगामा, नेताओं की मौजूदगी

नामांकन पर आपत्ति को लेकर भोपाल स्थित विधानसभा सचिवालय में काफी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।

यह भी पढ़ें:  Vote Counting Underway: Assembly Election Results 2026 Live Updates for Assam, Kerala, Tamil Nadu, West Bengal, and Puducherry

पूरी प्रक्रिया के दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक, जिनमें कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह और कैलाश विजयवर्गीय शामिल थे, विधानसभा सचिवालय में मौजूद रहे।

विवेक तन्खा और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने एक्स पर लिखा कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था। केवल एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें पूछा गया था कि उनके और अन्य लोगों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस का जवाब दिया जा चुका था और कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।

इस बीच के.सी. वेणुगोपाल, सचिन पायलट और भूपेश बघेल सहित कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचा, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में कांग्रेस ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की।

मंडला में कांग्रेस का प्रदर्शन

मंडला में जिला कांग्रेस कमेटी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया।

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन भाजपा के दबाव में निरस्त किया गया।

डॉ. मर्सकोले ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी और केवल एक परिवाद का मामला था, जिसे चुनावी हलफनामे में लिखना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं था।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरे मध्य प्रदेश में विरोध प्रदर्शन कर रही है और पार्टी की लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट जाएगी।

राज्यसभा चुनाव का गणित

मध्य प्रदेश विधानसभा की स्थिति

विवरणसंख्या
कुल विधानसभा सदस्य230
भाजपा विधायक164
कांग्रेस के वैध वोट62
एक उम्मीदवार की जीत के लिए आवश्यक वोट58

भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। तीसरी सीट के लिए उसने महेश केवट को उम्मीदवार बनाया था।

कांग्रेस का कहना है कि यदि चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलती है तो तीनों खाली सीटों पर भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं।

भाजपा के दो उम्मीदवार जिनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, वे राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल हैं। तीसरे उम्मीदवार महेश केवट हैं।

आगे की लड़ाई कानूनी मंचों पर

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मामला अब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस का दावा है कि केवल नोटिस के आधार पर नामांकन निरस्त नहीं किया जा सकता, जबकि भाजपा का कहना है कि अदालत से जुड़े लंबित मामले की जानकारी हलफनामे में देना आवश्यक था।

इसी कानूनी प्रश्न पर अब चुनाव आयोग और संभावित न्यायिक कार्यवाही का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस फैसले को संवैधानिक और कानूनी मंचों पर चुनौती देगी, जबकि भाजपा इसे नियमों के अनुरूप कार्रवाई बता रही है।

ईमानदारी और सत्य का मार्ग

जीवन में सत्य, ईमानदारी और नैतिकता का विशेष महत्व है। चाहे कोई भी क्षेत्र हो, व्यक्ति को गलत तरीके से किसी का अधिकार लेने, छल-कपट करने या अनुचित लाभ प्राप्त करने से बचना चाहिए। आध्यात्मिक दृष्टि से माना जाता है कि प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है, इसलिए मनुष्य को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए। 

तत्वदर्शी  संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि परमात्मा के विधान के अनुसार सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति ही वास्तविक सुख और शांति प्राप्त कर सकता है। इसलिए मनुष्य को भगवान का स्मरण करते हुए ईमानदारी, न्याय और सदाचार के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए।

अधिक जानकारी के लिए:

Website: www.jagatgururampalji.org⁠

YouTube: Sant Rampal Ji Maharaj

Facebook: Spiritual Leader Saint Rampal Ji

X (Twitter): @SaintRampalJiM

FAQs on Meenakshi Natarajan Nomination Rejection

1. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द हुआ?

भाजपा ने आरोप लगाया कि उन्होंने तेलंगाना से जुड़े लंबित मामले की जानकारी हलफनामे में नहीं दी थी।

2. कांग्रेस का मुख्य तर्क क्या है?

कांग्रेस का कहना है कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं थी, केवल एक नोटिस जारी हुआ था।

3. भाजपा क्या कह रही है?

भाजपा का दावा है कि अदालत से जारी नोटिस की जानकारी उम्मीदवार को हलफनामे में देनी चाहिए थी।

4. क्या कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया?

हाँ, कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में प्रदर्शन किए और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की।

5. इस विवाद का राज्यसभा चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है?

नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बढ़ गई है।

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