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Home » धर्मस्थल ‘मास बरीयल (Mass Burial)’ मामला : सनसनी से झूठी गवाही तक

Politics

धर्मस्थल ‘मास बरीयल (Mass Burial)’ मामला : सनसनी से झूठी गवाही तक

SA News
Last updated: August 25, 2025 3:59 pm
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धर्मस्थल ‘मास बरीयल (Mass Burial)’ मामला : सनसनी से झूठी गवाही तक
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बेंगलुरु। कर्नाटक का प्रसिद्ध धार्मिक-आध्यात्मिक केंद्र धर्मस्थल इन दिनों एक विवादित मामले के कारण सुर्खियों में है। यहां कथित ‘मास बरीयल’ यानी बड़े पैमाने पर शवों को दबाने के आरोपों ने न केवल श्रद्धालुओं को चौंकाया, बल्कि राज्य की राजनीति को भी गर्मा दिया। हालांकि ताज़ा घटनाक्रम में विशेष जांच दल (SIT) ने शिकायतकर्ता को ही झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है, जिससे पूरा मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है।

Contents
  • पृष्ठभूमि : आस्था और विवाद
  • SIT जांच और खुदाई
  • शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी : झूठी गवाही का मामला
  • व्यक्तिगत विवाद और अविश्वसनीयता
  • राजनीतिक असर
  • व्यापक प्रश्न
  • निष्कर्ष

पृष्ठभूमि : आस्था और विवाद

Dakshina Kannada जिले में स्थित धर्मस्थल लंबे समय से जैन धर्मगुरु धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े के प्रबंधन में चल रहा है। यहां का मण्जुनाथेश्वर मंदिर विष्णु के स्वरूप के रूप में करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र है। समाजसेवा और दानधर्म की छवि रखने वाली इस जगह पर अपराध की कल्पना तक श्रद्धालुओं को अस्वीकार्य है।

यही कारण था कि जब कुछ महीने पहले C.N. Chinnayya नामक व्यक्ति ने सनसनीखेज आरोप लगाए कि 1995 से 2014 के बीच उसे और अन्य लोगों को 100 से अधिक शव दबाने के लिए मजबूर किया गया, तो पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। उन्होंने दावा किया कि अधिकतर शव महिलाओं और बच्चों के थे।

SIT जांच और खुदाई

कर्नाटक सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT का गठन किया। आरोपों के आधार पर 13 स्थलों की पहचान कर वहां खुदाई कराई गई।

  • अधिकतर जगहों पर कोई अवशेष नहीं मिले।
  • 2–3 जगहों से हड्डियाँ और खोपड़ी के टुकड़े जरूर बरामद हुए, जिन्हें फॉरेंसिक जांच हेतु भेजा गया।

अब तक की रिपोर्टों में यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हो पाया है कि ये अवशेष मानव के हैं या पशु के। यानी बड़े पैमाने पर ‘मास बरीयल’ का आरोप SIT की प्राथमिक जांच में पुष्ट नहीं हुआ।

शिकायतकर्ता की गिरफ्तारी : झूठी गवाही का मामला

ताज़ा घटनाक्रम में SIT ने बड़ा कदम उठाते हुए शिकायतकर्ता Chinnayya को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि—

  • उन्होंने अदालत में झूठी गवाही दी (perjury)।
  • उनके बयान बार-बार बदले और कई विरोधाभास सामने आए।
  • उन्होंने जांच को भ्रमित करने और समाज में सनसनी फैलाने का प्रयास किया।

अदालत ने उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत perjury एक गंभीर अपराध है।

व्यक्तिगत विवाद और अविश्वसनीयता

गिरफ्तारी के बाद मामले ने और मोड़ लिया जब Chinnayya की पूर्व पत्नी ने उन्हें “नियमित झूठा” करार दिया। उनका आरोप है कि यह पूरा मामला उन्होंने पैसे और प्रसिद्धि के लिए गढ़ा।

कई स्थानीय लोगों का भी कहना है कि Chinnayya की विश्वसनीयता पहले से ही संदेह के घेरे में रही है। SIT की कार्रवाई को यह बयान और मज़बूत आधार देता है।

राजनीतिक असर

यह मामला केवल आपराधिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है।

  • भाजपा, जो राज्य में विपक्ष में है, ने इसे धर्मस्थल जैसी पवित्र जगह को बदनाम करने की साज़िश बताया और जांच को NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंपने की मांग की।
  • वहीं, सत्तारूढ़ कांग्रेस के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार पूरी तरह निष्पक्ष जांच करा रही है और “सत्य सामने आने तक” किसी को दोषी या निर्दोष मानना जल्दबाज़ी होगी।
  • धर्माधिकारी डी. वीरेंद्र हेगड़े ने भी कहा कि यह ‘अनसुलझे आरोपों’ का मामला है और अंततः सत्य सामने आएगा।

व्यापक प्रश्न

इस पूरे विवाद ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं—

  1. अगर शिकायतकर्ता झूठा निकला, तो इतने बड़े स्तर पर जनता और मीडिया को गुमराह करने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
  2. SIT द्वारा बरामद अवशेषों की असली सच्चाई क्या है?
  3. क्या यह मामला केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध और लाभ की कोशिश था, या इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र छिपा है?
  4. ऐसे विवादों से धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और आस्था पर क्या असर पड़ता है?

निष्कर्ष

धर्मस्थल ‘मास बरीयल’ प्रकरण अब सनसनी से हटकर झूठी गवाही और न्यायिक जांच का विषय बन चुका है। शुरुआती दावे अब अविश्वसनीय साबित हो रहे हैं। SIT की आगे की कार्रवाई और अदालत का फैसला ही तय करेगा कि यह सचमुच का अपराध था या मात्र गढ़ी गई कहानी।

फिलहाल इतना तय है कि यह विवाद न केवल कर्नाटक की राजनीति, बल्कि समाज और धार्मिक आस्था पर भी गहरा असर छोड़ चुका है।

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