लखनऊ, 14 नवंबर 2025- उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने और व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से “दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम, 1962” में व्यापक बदलाव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस संशोधन के बाद अब यह अधिनियम पूरे प्रदेश में लागू होगा—यानी कि नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी कानून का दायरा बढ़ेगा। यह बदलाव उत्तर प्रदेश में तेजी से बदल रहे व्यापारिक वातावरण को नियंत्रित और संरचित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम में संशोधन: मुख्य बिंदु
- संशोधन से क्या बदला? पूरे राज्य में लागू होगा अधिनियम
- 20 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से शामिल
- छोटे व्यापारियों को राहत
- कानून के दायरे में जोड़ी गई नई श्रेणियाँ
- सरकार का उद्देश्य: श्रमिकों को सुरक्षा और व्यापार को गति
- संशोधन का व्यापक प्रभाव: किसे सबसे अधिक लाभ?
- UP केबिनेट के निर्णय के संभावित परिणाम (Future Impact)
दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम में संशोधन: मुख्य बिंदु
- पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हुआ संशोधित दुकान अधिनियम: ग्रामीण बाजारों को भी मिली कानूनी सुरक्षा
- 20 से अधिक स्टाफ वाली दुकानों के लिए नए नियम, छोटे उद्यमों को राहत जारी
- UP में दुकानदार एवं प्रतिष्ठान अधिनियम का दायरा हुआ विस्तृत
- UP में श्रम कानूनों का बड़ा बदलाव: श्रमिक सुरक्षा, व्यापार सुधार और ग्रामीण बाजारों को नई पहचान
- UP नया श्रम कानून संशोधन 2025: इन कर्मचारियों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
- श्रम कानून में बड़े बदलाव से रोजगार, निवेश और पारदर्शिता पर पड़ेगा सीधा असर
संशोधन से क्या बदला? पूरे राज्य में लागू होगा अधिनियम
अब तक यह कानून केवल नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत जैसे शहरी क्षेत्रों में लागू था। लेकिन संशोधन के बाद प्रदेश के सभी 75 जिलों में हर ग्रामीण बाजार, कस्बे और ब्लॉक स्तर के प्रतिष्ठान, गाँवों में चल रहे व्यापारिक संस्थान कानून के दायरे में आ चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी काम करने वाले कर्मचारियों को अब वही कानूनी सुरक्षा मिलेगी जो पहले सिर्फ शहरी कामगारों तक सीमित थी।
20 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से शामिल
श्रम मंत्री अनिल राजभर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अधिनियम अब उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जहाँ 20 या उससे अधिक कर्मकार कार्यरत हैं। पहले इसमें कम संख्या वाले और कई श्रेणियों के प्रतिष्ठान शामिल नहीं थे, जिससे श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से वंचित रह जाता था।
छोटे व्यापारियों को राहत
20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को अधिनियम के कई प्रावधानों से छूट दी गई है, ताकि उन पर कानूनी या आर्थिक बोझ न बढ़े। इससे छोटे दुकानदारों, घरेलू उद्यमों और ग्रामीण स्वरोजगारियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
कानून के दायरे में जोड़ी गई नई श्रेणियाँ
इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अधिनियम को आधुनिक व्यावसायिक संरचना के अनुरूप बनाया गया है। सरकार ने कई नए क्षेत्रों और पेशेवर संस्थानों को भी कानून में शामिल किया है। इनमें शामिल हैं-
- क्लीनिक और पॉलीक्लीनिक
- प्रसूति गृह (मैटरनिटी होम)
- आर्किटेक्ट के ऑफिस
- टैक्स और कर सलाहकार (CA/Consultant)
- तकनीकी सलाहकार तथा टेक सर्विस प्रोवाइडर
- सेवा प्रदाता (Service Provider) प्रतिष्ठान
- व्यावसायिक और प्रोफेशनल सेवा मंच
इन सभी श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों को अब सुरक्षित कार्य माहौल, साप्ताहिक अवकाश, कार्य समय की सीमा, वेतन संरक्षण, और अन्य कानूनी लाभ उपलब्ध होंगे।
सरकार का उद्देश्य: श्रमिकों को सुरक्षा और व्यापार को गति
उत्तर प्रदेश सरकार लंबे समय से श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। यह संशोधन उसी दिशा में एक बड़ी पहल है। इसके पीछे सरकार का मूल उद्देश्य है –
- श्रमिक सुरक्षा का विस्तार
अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी किसी भी प्रकार की कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं आते थे।
कई स्थानों पर लंबे कार्य घंटे, कम वेतन, अवकाश न मिलना, असुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ जैसी समस्याएँ आम थीं। अब कानून के लागू होने से इन समस्याओं पर नियंत्रण होगा और श्रमिकों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा।
- व्यापारिक माहौल में सुधार
पूरे राज्य में एक समान कानून लागू होने से :-
- व्यापारिक गतिविधियाँ अधिक व्यवस्थित होंगी
- रोजगार प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी
- निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा
- कंपनियों के लिए कामकाज आसान होगा
यह कदम उत्तर प्रदेश की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- ग्रामीण बाजारों का औपचारिकरण
यूपी के आर्थिक ढांचे का बड़ा हिस्सा ग्रामीण बाजारों पर आधारित है।
इन बाजारों को कानूनी ढांचे में लाना राज्य के विकास की गति बढ़ाएगा, ग्रामीण रोजगार को सुरक्षा देगा
संशोधन का व्यापक प्रभाव: किसे सबसे अधिक लाभ?
यह कानून मुख्यतः इन समूहों को आने वाले वर्षों में बड़ा लाभ देगा –
- ग्रामीण क्षेत्रों के कर्मचारी
जिन्हें पहली बार श्रम कानून का संरक्षण मिलेगा।
- बड़े प्रतिष्ठान और कंपनियाँ
जिन्हें अब एक समान नियमों के अनुसार कार्य करना होगा।
- मेडिकल और तकनीकी सेक्टर के कर्मचारी
पहले इन पेशेवर यूनिटों पर यह कानून लागू नहीं था।
- सर्विस सेक्टर
साल-दर-साल बढ़ते इस क्षेत्र में अब कर्मचारियों के अधिकार भी सुनिश्चित होंगे।
UP केबिनेट के निर्णय के संभावित परिणाम (Future Impact)
- बेहतर कार्यस्थल मानक:- अब प्रतिष्ठानों को तय सुरक्षा तथा स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा।
- श्रम विवादों में कमी:- अस्पष्ट नियमों से होने वाले विवाद अब कम होंगे, क्योंकि सभी पर समान नियम लागू होंगे।
- रोजगार का विस्तार:- एक समान नियम कंपनियों को प्रदेश में निवेश के लिए प्रेरित करेंगे।
- कानूनी पारदर्शिता बढ़ेगी:- नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के अधिकार और कर्तव्य स्पष्ट होंगे।

