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Home » लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने भारत के अगले सेना प्रमुख: जानिए उनके शानदार सैन्य सफर और नेतृत्व की पूरी कहानी

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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने भारत के अगले सेना प्रमुख: जानिए उनके शानदार सैन्य सफर और नेतृत्व की पूरी कहानी

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Last updated: June 15, 2026 10:56 am
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​भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ (Lt Gen Dhiraj Seth) को भारतीय सेना का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) यानी सेना प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की है। वह 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद इस सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

Contents
  • ​कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ? (Who is Lt Gen Dhiraj Seth)
    • ​सैन्य परिवार से सर्वोच्च पद तक का सफर
  • ​शिक्षा और उच्च सैन्य प्रशिक्षण (Education & Training)
  • ​सैन्य करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां और अनुभव
  • ​कैसे उनके व्यापक अनुभव ने उन्हें शीर्ष पद तक पहुंचाया?
  • ​भारतीय सेना के लिए उनका विजन
  • ​प्रमुख सम्मान और पुरस्कार
  • ​टाइमलाइन: 1986 से 2026 तक का सफर
  • निष्कर्ष
  • ​FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

​वर्तमान में भारतीय सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) के रूप में कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति को भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, तकनीकी सशक्तिकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा निर्माण की दिशा में एक गेम-चेंजर माना जा रहा है।

​कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ? (Who is Lt Gen Dhiraj Seth)

​लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के उन सबसे अनुभवी और चुनिंदा रणनीतिकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने लगभग चार दशकों तक देश के विभिन्न और बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सेवा दी है। वे सेना की ताकतवर आर्मर्ड कॉर्प्स (Armoured Corps) के अधिकारी हैं और प्रतिष्ठित 2nd Lancers (Gardner’s Horse) रेजिमेंट से जुड़े रहे हैं।

​सैन्य गलियारों में उनकी पहचान एक ऐसे प्रखर नेतृत्वकर्ता के रूप में है, जो युद्धक कौशल (Combat Capability), रणनीतिक सोच और प्रशासनिक दक्षता का अद्भुत संतुलन रखते हैं।

​सैन्य परिवार से सर्वोच्च पद तक का सफर

​लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का भारतीय सेना से नाता सिर्फ पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक भी है। उनके पिता, लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ (Lt Gen K.M. Seth) भी भारतीय सेना के एक अत्यंत प्रतिष्ठित अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने बाद में त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के राज्यपाल के रूप में भी देश की सेवा की। बचपन से ही देश सेवा और सैन्य अनुशासन के माहौल में पले-बढ़े धीरज सेठ ने अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए आज भारतीय सेना के सर्वोच्च शिखर को छुआ है।

​शिक्षा और उच्च सैन्य प्रशिक्षण (Education & Training)

​लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की शैक्षणिक और सैन्य पृष्ठभूमि बेहद शानदार रही है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला से अपनी बुनियादी सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून से कड़ा प्रशिक्षण लिया और 20 दिसंबर 1986 को आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त किया।

​उन्होंने अपने करियर में देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च सैन्य शिक्षा ग्रहण की है:

  • ​Junior Command Course: इसमें उन्होंने प्रथम स्थान (First Position) प्राप्त किया था।
  • ​Defence Services Staff College (DSSC), वेलिंगटन
  • ​Army War College, महू
  • ​National Defence College (NDC), नई दिल्ली
  • ​Command & Staff Course, पेरिस (फ्रांस)

​सैन्य करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियां और अनुभव

​अपने 40 वर्षों के शानदार सैन्य जीवन में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और कमांड नियुक्तियों को संभाला है, जो किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए बेहद गौरव की बात होती है:

  • ​रेजिमेंटल कमान: उन्होंने डेजर्ट सेक्टर में एक प्रतिष्ठित आर्मर्ड रेजिमेंट और जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी (आतंकवाद विरोधी) माहौल में एक ब्रिगेड का सफल नेतृत्व किया।
  • ​सुदर्शन चक्र कॉर्प्स (XXI Corps): उन्होंने इस महत्वपूर्ण स्ट्राइक कॉर्प्स के कमांडर के रूप में अपनी रणनीतिक क्षमता का लोहा मनवाया।
  • ​GOC, दिल्ली एरिया: उन्होंने देश की राजधानी के सैन्य क्षेत्र (Delhi Area) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी सेवा दी।
  • ​दो बड़ी कमानों का नेतृत्व: वे भारतीय सेना की साउथ वेस्टर्न कमान (South Western Command) और साउदर्न कमान (Southern Command) दोनों के प्रमुख (आर्मी कमांडर) रहे, जो उनके व्यापक फील्ड और ऑपरेशनल अनुभव को दर्शाता है।
  • ​अंतरराष्ट्रीय अनुभव: उन्होंने अंगोला में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन (UN Mission) में एक सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

​कैसे उनके व्यापक अनुभव ने उन्हें शीर्ष पद तक पहुंचाया?

​सैन्य गलियारों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा थी कि इस सर्वोच्च पद के लिए उनके बैच (20 दिसंबर 1986) के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी दौड़ में थे। लेकिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का चयन यह दिखाता है कि भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व के चयन में केवल वरिष्ठता (Seniority) ही एकमात्र पैमाना नहीं होती, बल्कि व्यापक रणनीतिक अनुभव (Strategic Experience) और फील्ड कमांड की विविधता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

​धीरज सेठ के पास दो बड़ी ऑपरेशनल कमानों (साउथ वेस्टर्न और साउदर्न कमान) का नेतृत्व करने का अनूठा अनुभव था। इसके साथ ही, अप्रैल 2026 में उन्हें वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) नियुक्त किया गया, जिससे उन्हें सेना के मुख्यालय (Army HQ) की प्रशासनिक और नीतिगत कार्यप्रणाली को बेहद करीब से देखने का मौका मिला। इसी बेजोड़ प्रोफाइल ने उन्हें भारतीय सेना का अगला प्रमुख (Indian Army Chief) बनने की रेस में सबसे उपयुक्त और योग्य उम्मीदवार बनाया।

​भारतीय सेना के लिए उनका विजन

​लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ आधुनिक और भविष्य के युद्धों (Future Warfare) की बदलती प्रकृति को बखूबी समझते हैं। उनका मानना है कि भारतीय सेना को हर समय ‘तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार’ रहना चाहिए। उनके नेतृत्व में सेना के निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की उम्मीद है:

  • ​आधुनिक तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, साइबर वॉरफेयर और ड्रोन टेक्नोलॉजी का सेना में तेजी से एकीकरण।
  • ​आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी हथियारों और सैन्य उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • ​थिएटर कमान: भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय (Jointness) स्थापित करना।

​प्रमुख सम्मान और पुरस्कार

​राष्ट्र के प्रति उनकी उत्कृष्ट और समर्पित सेवाओं के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा कई प्रतिष्ठित सैन्य पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है:

  • ​परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM)
  • ​उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM)
  • ​अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)

​टाइमलाइन: 1986 से 2026 तक का सफर

वर्ष/अवधिसैन्य जिम्मेदारी और उपलब्धियां
दिसंबर 1986भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से आर्मर्ड कॉर्प्स (2nd Lancers) में कमीशन प्राप्त किया।
प्रारंभिक करियरजूनियर कमांड कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया तथा रेगिस्तानी क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण सैन्य कमान संभाली।
2021–2023प्रतिष्ठित सुदर्शन चक्र कॉर्प्स (XXI Corps) के कमांडर रहे और बाद में GOC, दिल्ली एरिया नियुक्त हुए।
2023–2025साउथ वेस्टर्न कमान और साउदर्न कमान जैसी दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया।
अप्रैल 2026भारतीय सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) का पदभार संभाला।
30 जून 2026जनरल उपेंद्र द्विवेदी की सेवानिवृत्ति के बाद भारत के नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

निष्कर्ष

​लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की भारतीय सेना प्रमुख के रूप में नियुक्ति केवल एक पद का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना को तैयार करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। उनका लगभग 40 वर्षों का बेदाग और शानदार करियर यह साबित करता है कि निरंतर कड़ा परिश्रम, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण ही व्यक्ति को सफलता के सर्वोच्च शिखर पर ले जाता है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना देश की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित तथा आधुनिक बनाने में निश्चित रूप से सफल होगी।

​FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

​Q1. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना प्रमुख का पदभार कब संभालेंगे?

उत्तर: वे 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद नए सेना प्रमुख (COAS) का पदभार ग्रहण करेंगे।

​Q2. वर्तमान में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ किस पद पर कार्यरत हैं?

उत्तर: वे वर्तमान में भारतीय सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (VCOAS) के रूप में कार्यरत हैं।

​Q3. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ सेना की किस कोर (Corps) से आते हैं?

उत्तर: वे भारतीय सेना की आर्मर्ड कॉर्प्स (Armoured Corps) से आते हैं और उनकी मूल रेजिमेंट ‘2nd Lancers (Gardner’s Horse)’ है।

​Q4. उन्हें कौन-कौन से मुख्य सैन्य सम्मान मिले हैं?

उत्तर: उन्हें देश की उत्कृष्ट सेवा के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया जा चुका है।

​Q5. उनके पिता का भारतीय सेना में क्या योगदान रहा है?

उत्तर: उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ (Lt Gen K.M. Seth) भी भारतीय सेना में एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और उन्होंने बाद में त्रिपुरा तथा छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दी थीं।

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