भारत ने 20 फरवरी 2026 को अमेरिका के नेतृत्व वाले बहुपक्षीय तकनीकी गठजोड़ ‘Pax Silica’ में आधिकारिक तौर पर शामिल होकर वैश्विक टेक रणनीति में एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इससे भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का नया अध्याय शुरू माना जा रहा है।
यह समझौता मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर (माइक्रोचिप), और क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित, पारदर्शी और स्थिर बनाने पर केंद्रित है। तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था में यह साझेदारी आने वाले वर्षों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
‘Pax Silica’ क्या है?
‘Pax’ लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है शांति, और ‘Silica’ उस तत्व से जुड़ा है जिससे सिलिकॉन बनता है—जो माइक्रोचिप निर्माण का आधार है। Pax Silica दरअसल उन देशों का एक समूह है जो सेमीकंडक्टर, AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी संसाधनों और तकनीक की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहते हैं।
आज की दुनिया में मोबाइल फोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा उपकरण तक सेमीकंडक्टर पर निर्भर हैं। ऐसे में इन चिप्स की सप्लाई चेन में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाले कई महत्वपूर्ण खनिजों—जैसे रेयर अर्थ एलिमेंट्स—की प्रोसेसिंग और सप्लाई में चीन का बड़ा वर्चस्व है। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो इन संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। Pax Silica का उद्देश्य इसी जोखिम को कम करना है।
इस समझौते के तहत सदस्य देश मिलकर वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करेंगे, नए खनन और प्रोसेसिंग नेटवर्क बनाएंगे और टेक्नोलॉजी साझेदारी को बढ़ावा देंगे। इससे किसी एक देश पर निर्भरता घटेगी और वैश्विक टेक उद्योग अधिक संतुलित बनेगा।
भारत को क्या मिलेगा फायदा?
भारत पहले से ही सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और AI सेक्टर में तेजी से निवेश आकर्षित कर रहा है। Pax Silica में शामिल होने से भारत को निम्नलिखित फायदे मिल सकते हैं:
- उन्नत सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी तक पहुंच
- विदेशी निवेश में वृद्धि
- डेटा सेंटर और चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना
- युवाओं के लिए उच्च कौशल आधारित रोजगार
वैश्विक टेक सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका
भारत का लक्ष्य खुद को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब और AI इनोवेशन सेंटर के रूप में स्थापित करना है। इस समझौते से यह लक्ष्य और गति पकड़ सकता है।
किन देशों की है भागीदारी?
इस तकनीकी गठजोड़ में अमेरिका के नेतृत्व में कई प्रमुख देश शामिल हैं। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), जापान, दक्षिण कोरिया, इज़रायल, सिंगापुर, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। अब भारत के जुड़ने से यह समूह और अधिक मजबूत हो गया है, क्योंकि भारत एक बड़ा बाजार, विशाल तकनीकी प्रतिभा वाला देश और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है।
भारत की भागीदारी से इस गठबंधन की वैश्विक रणनीतिक और आर्थिक ताकत में और वृद्धि मानी जा रही है। अब भारत के जुड़ने से यह गठबंधन और मजबूत हो गया है, क्योंकि भारत एक बड़ा बाजार, टेक टैलेंट हब और उभरती अर्थव्यवस्था है।
डिजिटल सुरक्षा और भविष्य की टेक राजनीति
AI आधारित सिस्टम आने वाले समय में रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और प्रशासन का अहम हिस्सा बनेंगे। Pax Silica यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इन तकनीकों का विकास ऐसे देशों के हाथों में हो जो खुले और लोकतांत्रिक ढांचे में विश्वास रखते हैं।
इस साझेदारी के जरिए सदस्य देश साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड्स पर भी सहयोग बढ़ाएंगे। इससे हैकिंग, डेटा चोरी और डिजिटल जासूसी जैसे खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या?
हालांकि इस समझौते के कई बिंदु सार्वजनिक किए जा चुके हैं, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते और टैरिफ रियायतों के तकनीकी नियमों का अंतिम ड्राफ्ट अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं है। आने वाले समय में इसमें नए प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, Pax Silica में भारत की एंट्री सिर्फ एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, अर्थव्यवस्था और वैश्विक शक्ति संतुलन की दिशा में बड़ा बदलाव है। इससे भारत की वैश्विक टेक मंच पर भूमिका और मजबूत होने की संभावना है, साथ ही चीन की तकनीकी दादागिरी को भी संतुलित करने की रणनीति को गति मिल सकती है।

