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गाज़ा में बढ़ती भुखमरी: संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी

SA News
Last updated: May 18, 2025 2:37 pm
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गाज़ा में बढ़ती भुखमरी: संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी
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खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने सोमवार को गंभीर चेतावनी दी कि यदि इज़रायल ने गाज़ा पट्टी की नाकेबंदी नहीं हटाई और सैन्य अभियान नहीं रोका, तो वहां जल्द ही अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) के अनुसार, लगभग 5 लाख फिलिस्तीनी “भयावह” स्तर की भुखमरी का सामना कर रहे हैं, जबकि 10 लाख अन्य लोगों को मुश्किल से पर्याप्त भोजन मिल पा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि मौजूदा हालात में बदलाव नहीं आया तो अकाल का “बड़ा खतरा” है।

Contents
  • इज़राइल की नाकेबंदी और गाज़ा में खाद्य संकट से संबंधित मुख्य बिंदु: 
  • गाज़ा में खाद्य संकट गहराया: सामुदायिक रसोई भी बंद होने की कगार पर
  • गाज़ा में भुखमरी पर चेतावनी: “घोषणा की नहीं, राहत की ज़रूरत है”
  • गाज़ा में सहायता पर गतिरोध: इज़रायल की शर्तें और अमेरिकी मध्यस्थता
  • गाज़ा में मानवीय संकट गहराया: भूख, युद्ध और बंद होती उम्मीदें
  • गाज़ा में भूख का संकट: अकाल की चेतावनी जारी
  • गाज़ा में कृषि संकट: अकाल की ओर बढ़ते कदम
  • जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज: अन्नदान महादान 
  • इज़राइल की नाकेबंदी और गाज़ा में खाद्य संकट से संबंधित मुख्य FAQs

पिछले 10 हफ्तों से इज़रायल ने गाज़ा में भोजन, दवा, आश्रय और अन्य जरूरी चीजों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। साथ ही वह लगातार हवाई हमले और ज़मीनी सैन्य अभियान चला रहा है। गाज़ा की 2.3 मिलियन आबादी पूरी तरह से बाहरी सहायता पर निर्भर है, क्योंकि इज़रायल के 19 महीने पुराने सैन्य अभियान ने क्षेत्र की भोजन उत्पादन क्षमता को लगभग समाप्त कर दिया है।

इज़राइल की नाकेबंदी और गाज़ा में खाद्य संकट से संबंधित मुख्य बिंदु: 

1. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय प्रमुख टॉम फ्लेचर ने इज़रायल पर गाज़ा में जानबूझकर अमानवीय हालात पैदा करने का आरोप लगाया।

2. इज़रायल ने पिछले 10 हफ्तों से गाज़ा में मानवीय सहायता के प्रवेश को रोका है।

3. इससे 5 लाख से अधिक फिलिस्तीनी भूखमरी और अकाल के खतरे का सामना कर रहे हैं।

4. यह बयान संयुक्त राष्ट्र की ओर से अब तक की सबसे कड़ी सार्वजनिक निंदा मानी जा रही है।

5. टॉम फ्लेचर ने UN सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि नरसंहार जैसी स्थिति रोकी जा सके।

6. इज़रायल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

7. गाज़ा में खाद्य, पानी, दवाइयों और आश्रय की भारी कमी है।

8. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर मानवीय राहत और संघर्ष विराम सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ रहा है।

गाज़ा में खाद्य संकट गहराया: सामुदायिक रसोई भी बंद होने की कगार पर

गाज़ा में खाद्य आपूर्ति नाटकीय रूप से कम होती जा रही है। पका हुआ भोजन बांटने वाली सामुदायिक रसोई अब अधिकांश लोगों के लिए भोजन का एकमात्र बचा हुआ स्रोत हैं, लेकिन स्टॉक की भारी कमी के कारण ये रसोई भी तेज़ी से बंद हो रही हैं।

हर दिन हजारों फिलिस्तीनी सार्वजनिक रसोई के बाहर भीड़ लगाते हैं और थोड़ी-सी दाल या पास्ता पाने के लिए अपने बर्तनों के साथ धक्का-मुक्की करते हैं।

गाज़ा में भुखमरी पर चेतावनी: “घोषणा की नहीं, राहत की ज़रूरत है”

रविवार को दक्षिणी शहर खान यूनिस में रसोई के बाहर इंतज़ार कर रहीं रिहाम शेख अल-ईद ने कहा, “हमें चार-पांच घंटे धूप में लाइन में खड़े रहना पड़ता है। यह थका देने वाला होता है। अंत में, हम कुछ भी नहीं लेकर जाते। यह हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं होता।”

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विश्लेषक क्रिस न्यूटन, जो युद्ध के एक हथियार के रूप में भुखमरी पर अध्ययन करते हैं, ने कहा कि अकाल की आधिकारिक घोषणा न होने का मतलब यह नहीं है कि लोग पहले से भूख से मर नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा, “घोषणा पीड़ा को समाप्त करने की पूर्व शर्त नहीं होनी चाहिए।”

न्यूटन के अनुसार, “इज़राइली सरकार हमास को नष्ट करने और पट्टी को बदलने के अपने प्रयास के तहत गाज़ा को भूखा मार रही है।”

गाज़ा में सहायता पर गतिरोध: इज़रायल की शर्तें और अमेरिकी मध्यस्थता

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। सेना ने कहा है कि दो महीने के युद्धविराम के दौरान गाज़ा में पर्याप्त सहायता पहुँची थी, जिसे इज़रायल ने मार्च के मध्य में अपने सैन्य अभियान को फिर से शुरू कर तोड़ दिया।

इज़रायल का कहना है कि नाकेबंदी का उद्देश्य हमास पर दबाव बनाना है ताकि वह अब भी अपने कब्जे में रखे गए बंधकों को रिहा करे। इज़रायल ने यह भी कहा है कि जब तक सहायता वितरण पर नियंत्रण की एक नई व्यवस्था नहीं बनती, तब तक वह सहायता की वापसी की अनुमति नहीं देगा। उसने हमास पर आपूर्ति हड़पने का आरोप लगाया है।

अमेरिका ने कहा है कि वह एक नई व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसके तहत जल्द ही मानवीय आपूर्ति बहाल हो सकती है, लेकिन उसने इसके लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी है।

गाज़ा में मानवीय संकट गहराया: भूख, युद्ध और बंद होती उम्मीदें

गाज़ा पट्टी में हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इज़रायल की उस नई सहायता वितरण व्यवस्था को खारिज कर दिया है, जिसे वह हमास पर नियंत्रण के लिए लागू करना चाहता है। यूएन का कहना है कि यह व्यवस्था अनावश्यक है और मानवीय सहायता को राजनीतिक हथियार बना सकती है। सोमवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया कि युद्धविराम के दौरान मिली मामूली राहत अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। गाज़ा की लगभग पूरी आबादी गंभीर भूख का सामना कर रही है, जिसका कारण जारी संघर्ष, ढहता बुनियादी ढांचा, नष्ट होती कृषि और सहायता की नाकेबंदी है। ऑक्सफैम के समन्वयक महमूद अलसक्का ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इज़रायल पर “निर्बाध मानवीय पहुंच” की अनुमति देने के लिए दबाव डाला जाए। उन्होंने कहा कि इस मानवनिर्मित भुखमरी पर चुप्पी भी एक तरह की मिलीभगत है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में लगभग 1,200 इज़रायली मारे गए थे और 251 को बंधक बनाया गया था। इसके जवाब में इज़रायल ने सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें अब तक गाज़ा में 52,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

गाज़ा में भूख का संकट: अकाल की चेतावनी जारी

एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC), जिसे 2004 में सोमालिया में शुरू किया गया था, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, सरकारों और सहायता संगठनों का एक साझा मंच है। इसने अब तक केवल कुछ बार ही अकाल की आधिकारिक घोषणा की है, जैसे कि 2011 में सोमालिया, 2017 और 2020 में दक्षिण सूडान, और 2023 में सूडान के दारफुर क्षेत्र में। IPC किसी क्षेत्र को अकालग्रस्त तब घोषित करता है जब तीन में से दो मानदंड पूरे होते हैं, जैसे भोजन की अत्यधिक कमी, बच्चों में तीव्र कुपोषण, और मृत्यु दर में तेज़ वृद्धि। सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा में पहली शर्त पूरी हो चुकी है, जहां 4.77 लाख लोग या कुल जनसंख्या का 22%—”भयावह” भूख की स्थिति में पहुंच चुके हैं।

गाज़ा में कृषि संकट: अकाल की ओर बढ़ते कदम

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन की उपनिदेशक, बेथ बेचडोल ने कहा कि गाज़ा की 75% से अधिक कृषि भूमि या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी है या नष्ट हो गई है। इसके साथ ही, सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले दो-तिहाई कुएं अब काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस विनाश के कारण “बड़ी संख्या में लोग अकाल की स्थिति के करीब पहुंच रहे हैं,” और यह स्थिति “हमारे विचार से संभव” हो सकती है।

जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज: अन्नदान महादान 

संत रामपाल जी महाराज मानवता, शांति और भाईचारे पर विशेष जोर देते हैं। वे सभी मनुष्यों के समान अधिकारों और सम्मान की बात करते हैं तथा हिंसा और अमानवीय व्यवहार के सख्त विरोधी हैं। गाज़ा जैसी त्रासदी उनके उपदेशों के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। संत रामपाल जी महाराज अपने अनुयायियों के माध्यम से “अन्नपूर्णा मुहिम” जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक और परमार्थ कार्य करवा रहे हैं, जिससे ज़रूरतमंदों और भूखों को भोजन प्राप्त हो रहा है। ऐसे और भी सेवा कार्यों से जुड़ने और जानकारी के लिए YouTube चैनल: Sant Rampal Ji Maharaj को अवश्य सब्सक्राइब करें।

इज़राइल की नाकेबंदी और गाज़ा में खाद्य संकट से संबंधित मुख्य FAQs

1. प्रश्न: गाज़ा में वर्तमान खाद्य संकट की मुख्य वजह क्या है?

उत्तर: गाज़ा में खाद्य संकट की मुख्य वजह इज़राइल द्वारा लगाई गई नाकेबंदी है, जिससे भोजन, पानी, और आवश्यक राहत सामग्री की आपूर्ति बाधित हो रही है।

2. प्रश्न: खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों की गाज़ा को लेकर क्या चेतावनी है?

उत्तर: विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नाकेबंदी तुरंत समाप्त नहीं की गई, तो गाज़ा में गंभीर अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

3. प्रश्न: नाकेबंदी का गाज़ा के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा है?

उत्तर: नाकेबंदी के कारण गाज़ा में खाद्य वस्तुओं की भारी कमी है, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

4.  प्रश्न: अकाल की स्थिति में कौन से लक्षण दिखाई देते हैं?

उत्तर: बच्चों में कुपोषण, वज़न घटना, प्रतिरोधक क्षमता का कम होना और मृत्यु दर में वृद्धि अकाल के प्रमुख लक्षण हैं।

 5. प्रश्न: संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को क्या कदम उठाने चाहिएं?

उत्तर: अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नाकेबंदी हटाने के लिए दबाव डालना चाहिए, साथ ही मानवीय सहायता को निर्बाध रूप से पहुँचाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

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