पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यात्रा और व्यापार को आसान बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर रेड चैनल पर तैनात सीमा शुल्क अधिकारियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरे (BWC) पहनना अनिवार्य होगा।
- रेड चैनल में तैनात अधिकारियों को बॉडी-वॉर्न कैमरा होगा पहनना से जुड़े मुख्य बिंदु जानिए:
- रेड चैनल पर जांच के दौरान अब बॉडी कैमरा रहेगा ऑन, यात्रियों और अधिकारियों दोनों को मिलेगी सुरक्षा
- बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग की होगी पूरी जानकारी, वीडियो 90 दिन तक सुरक्षित रहेंगे
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कस्टम व्यवस्था, बॉडी कैमरों से बढ़ेगा भरोसा
- रेड चैनल में तैनात अधिकारियों को बॉडी-वॉर्न कैमरा होगा पहनना से जुड़े मुख्य FAQs
इस फैसले से कस्टम जांच की प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी होगी और यात्रियों के साथ किसी भी तरह की असुविधा, उत्पीड़न या भ्रष्टाचार की शिकायतों पर प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जा सकेगी।

यह निर्देश केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की ओर से जारी किया गया है। पिछले महीने बोर्ड ने एक आंतरिक सर्कुलर के माध्यम से यह आदेश सभी सीमा शुल्क क्षेत्रीय इकाइयों को भेजा था।
सरकार का मानना है कि बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल से न केवल अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि ईमानदार अधिकारियों को भी अनावश्यक विवादों से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए हवाई अड्डों पर अनुभव अधिक सुगम और भरोसेमंद बनेगा।
रेड चैनल में तैनात अधिकारियों को बॉडी-वॉर्न कैमरा होगा पहनना से जुड़े मुख्य बिंदु जानिए:
- रेड चैनल पर तैनात सीमा शुल्क अधिकारियों को बॉडी-वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य
- यात्रियों को बताई जाएगी कि उनकी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है
- पूछताछ, सामान की जांच और ड्यूटी मूल्यांकन में कैमरा रहेगा ऑन
- सभी रिकॉर्डिंग कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएंगी
- जांच या न्यायिक प्रक्रिया में ज़रूरत होने पर फुटेज ज़्यादा समय तक सुरक्षित रहेगी
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कस्टम व्यवस्था को मज़बूत करने की पहल
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रेड चैनल पर जांच के दौरान अब बॉडी कैमरा रहेगा ऑन, यात्रियों और अधिकारियों दोनों को मिलेगी सुरक्षा
रेड चैनल उन यात्रियों के लिए होता है, जिनके पास ऐसा सामान होता है जिस पर शुल्क देना ज़रूरी होता है या जो प्रतिबंधित या निषिद्ध श्रेणी में आता है। भारतीय सीमा शुल्क कानून के तहत ऐसे सामान की घोषणा करना अनिवार्य होता है। रेड चैनल पर की जाने वाली जांच अक्सर गहन और विस्तृत होती है, जिससे कई बार विवाद की स्थिति भी पैदा हो जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब सीमा शुल्क अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे रेड चैनल पर तैनाती के दौरान ही नहीं, बल्कि हवाई अड्डे के परिसर में यात्रियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत के समय बॉडी-वॉर्न कैमरा (BWC) का इस्तेमाल करें। इसमें यात्रियों से पूछताछ, सामान की जांच और ड्यूटी का आकलन जैसी सभी प्रक्रियाएं शामिल होंगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और कस्टम अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत में पारदर्शिता, स्पष्टता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। चूंकि रेड चैनल पर की जाने वाली जांच संवेदनशील होती है, इसलिए बॉडी कैमरे से दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और गलतफहमियों की गुंजाइश भी कम होगी।
बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग की होगी पूरी जानकारी, वीडियो 90 दिन तक सुरक्षित रहेंगे
जारी किए गए दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि यात्रियों को पहले ही बताया जाएगा कि सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है। इससे यात्रियों को पूरी जानकारी रहेगी और किसी तरह की गलतफहमी की स्थिति नहीं बनेगी।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, बॉडी-वॉर्न कैमरों से रिकॉर्ड किए गए सभी वीडियो फुटेज को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जाएगा। हालांकि, अगर किसी मामले में जांच, लेखा-परीक्षा या न्यायिक प्रक्रिया के लिए इन रिकॉर्डिंग्स की ज़रूरत पड़ती है, तो उन्हें तय अवधि से अधिक समय तक भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की निजता का सम्मान करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि हवाई अड्डों पर कस्टम जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद बनी रहे।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कस्टम व्यवस्था, बॉडी कैमरों से बढ़ेगा भरोसा
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने कहा है कि बॉडी-वॉर्न कैमरों को अनिवार्य करने की यह पहल दुनिया के कई देशों में अपनाई जा रही अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। इन कैमरों को सीमा शुल्क अधिकारियों और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के एक प्रभावी माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है।
निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि इस कदम का मकसद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सीमा शुल्क प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे को और मज़बूत करना है।
CBIC के अनुसार, बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल सरकार की प्रौद्योगिकी-आधारित शासन व्यवस्था, यात्रियों को बेहतर सुविधा देने और हवाई अड्डों पर होने वाले विवादों को कम करने के प्रयासों का हिस्सा है।
अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों और कस्टम अधिकारियों के बीच बातचीत अधिक सहज होगी, अनावश्यक टकराव कम होंगे और पूरी सीमा शुल्क प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
रेड चैनल में तैनात अधिकारियों को बॉडी-वॉर्न कैमरा होगा पहनना से जुड़े मुख्य FAQs
Q1. बॉडी-वॉर्न कैमरा किसके लिए अनिवार्य किया गया है?
रेड चैनल पर तैनात सभी सीमा शुल्क अधिकारियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य किया गया है।
Q2. यह नियम किन जगहों पर लागू होगा?
देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
Q3. कैमरा किन स्थितियों में इस्तेमाल किया जाएगा?
यात्रियों से पूछताछ, सामान की जांच, ड्यूटी मूल्यांकन और किसी भी प्रकार की बातचीत के दौरान।
Q4. वीडियो रिकॉर्डिंग कितने समय तक सुरक्षित रखी जाएगी?
सभी वीडियो फुटेज कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएंगी, ज़रूरत पड़ने पर अवधि बढ़ाई जा सकती है।
Q5. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कस्टम जांच में पारदर्शिता बढ़ाना, विवाद कम करना और यात्रियों व अधिकारियों के बीच विश्वास मज़बूत करना है।

