सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुआवज़े और उस पर मिलने वाले ब्याज की राशि को किसी भी सरकारी एजेंसी पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता।
- NHAI की पुनर्विचार याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा उचित मुआवज़ा और 9% ब्याज देना संवैधानिक अधिकार, से जुड़े मुख्य बिंदु:
- भूमि अधिग्रहण केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: NHAI की पुनर्विचार याचिका खारिज
- मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश: किसानों को मिलेगा 9% ब्याज, NHAI की दलील खारिज
- वित्तीय बोझ’ के आधार पर नहीं रोका जा सकता किसानों का मुआवज़ा
- FQAs
इस सख्त टिप्पणी के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी दोहराया कि उचित और न्यायसंगत मुआवजा देना एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे कमज़ोर नहीं किया जा सकता।
यह फैसला NHAI द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनाया गया, जिसमें 2019 के उस निर्णय को निरस्त करने की मांग की गई थी। उस फैसले में कहा गया था कि राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण पर लागू मुआवजा और ब्याज केवल भविष्य के मामलों में ही प्रभावी होंगे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए साफ कर दिया कि मुआवज़े के सिद्धांतों में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार्य नहीं है। अदालत का यह रुख किसानों के अधिकारों को और अधिक मज़बूती प्रदान करता है।
NHAI की पुनर्विचार याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा उचित मुआवज़ा और 9% ब्याज देना संवैधानिक अधिकार, से जुड़े मुख्य बिंदु:
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण में मुआवज़ा तय करते समय आर्थिक बोझ को आधार नहीं बनाया जा सकता।
- राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की पुनर्विचार याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
- कोर्ट ने कहा कि उचित और न्यायसंगत मुआवज़ा देना किसानों का संवैधानिक अधिकार है।
- 2019 का फैसला अब पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) रूप से लागू रहेगा।
- किसानों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत 9% ब्याज मिलेगा, न कि 5%।
- कोर्ट ने साफ किया कि वित्तीय बोझ (लगभग 29,000 करोड़ रुपये) मुआवज़ा देने से बचने का आधार नहीं बन सकता।
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भूमि अधिग्रहण केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: NHAI की पुनर्विचार याचिका खारिज
देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम टिप्पणी की। इस याचिका में शीर्ष अदालत से 4 फरवरी 2025 के फैसले को वापस लेने की मांग की गई थी।
अपने उस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वर्ष 2019 का फैसला पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) रूप से लागू होगा। इसके तहत NHAI अधिनियम के अंतर्गत अधिग्रहित भूमि के किसानों को मुआवजा और उस पर ब्याज देने की अनुमति प्रदान की गई।
मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश: किसानों को मिलेगा 9% ब्याज, NHAI की दलील खारिज
पीठ ने स्पष्ट किया कि भूमि मालिकों को मिलने वाला ब्याज भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार होगा, जो 9 प्रतिशत निर्धारित है, न कि NHAI अधिनियम के तहत तय 5 प्रतिशत की सीमा के अनुसार। अदालत ने यह भी कहा कि NHAI ने इसी आधार पर फैसले की पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि अधिग्रहित भूमि के मालिकों को मुआवज़ा और ब्याज देने से जुड़ी वित्तीय ज़िम्मेदारी 100 करोड़ रुपये नहीं, जैसा कि पहले दावा किया गया था, बल्कि करीब 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंचती।
वित्तीय बोझ’ के आधार पर नहीं रोका जा सकता किसानों का मुआवज़ा
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि जहां तक इस दलील का संबंध है, कोर्ट ने शुरू में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि संशोधित वित्तीय अनुमान को रिकॉर्ड में ले भी लिया जाए तो भी यह उसे पहले के आदेश के गुण-दोष पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य नहीं करता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवज़े और ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वित्तीय बोझ मुआवज़े से इनकार करने का आधार नहीं है।
FQAs
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला किस बारे में है?
यह फैसला भूमि अधिग्रहण में किसानों को मिलने वाले मुआवज़े और ब्याज से जुड़ा है।
कोर्ट ने आर्थिक बोझ पर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि सरकारी एजेंसियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ मुआवज़ा कम करने का आधार नहीं हो सकता।
किसानों को कितना ब्याज मिलेगा?
किसानों को अब 9% ब्याज मिलेगा, जो भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार है।
NHAI की याचिका क्यों खारिज हुई?
क्योंकि कोर्ट ने माना कि मुआवज़े के सिद्धांतों में कोई कटौती स्वीकार्य नहीं है।
क्या यह फैसला पुराने मामलों पर भी लागू होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) रूप से लागू करने का आदेश दिया है।
इस फैसले से किसानों को क्या फायदा होगा?
किसानों को ज़्यादा और न्यायसंगत मुआवज़ा मिलेगा, जिससे उनके अधिकार मज़बूत होंगे।

