भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि ‘भारत जेनएआई’ (Bharat GenAI) पहल के तहत फरवरी 2026 के अंत तक सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट-आधारित लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) तैयार कर लिया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य AI तकनीक को केवल अंग्रेज़ी तक सीमित रखने के बजाय देश के हर नागरिक तक उसकी मातृभाषा में पहुंचाना है।
- Bharat GenAI: मुख्य बिंदु
- 15 भाषाओं में मॉडल तैयार, शेष फरवरी 2026 तक पूरा होगा
- 22 भारतीय भाषाओं में मिलेगा AI का समर्थन
- शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और शासन में होगा बड़ा बदलाव
- आम नागरिकों और छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसर
- भारतीय डेटा पर आधारित, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील AI
- क्या है Generative AI और इसका महत्व?
- भारत को वैश्विक AI शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
- Bharat GenAI: हर भारतीय के लिए अपनी भाषा में AI का नया युग
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि Bharat GenAI भारत का पहला सरकारी स्वामित्व वाला संप्रभु (Sovereign) AI मॉडल होगा, जिसे भारतीय भाषाओं, संस्कृति और सामाजिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना भारत को AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Bharat GenAI: मुख्य बिंदु
- BharatGen AI: 15 भारतीय भाषाओं में तैयार हुआ स्वदेशी AI मॉडल, फरवरी 2026 तक सभी भाषाओं को मिलेगा सपोर्ट
- Bharat GenAI: 22 भारतीय भाषाओं में AI सपोर्ट, फरवरी 2026 तक पूरा होगा मॉडल विकास
- Bharat GenAI से शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और शासन में मातृभाषा आधारित डिजिटल क्रांति
- Bharat GenAI: आम नागरिकों और छोटे व्यवसायों के लिए रोजगार और डिजिटल अवसरों का नया प्लेटफॉर्म
- Bharat GenAI: भारत के लिए सुरक्षित, स्वदेशी और सांस्कृतिक रूप से सक्षम AI
- Generative AI के साथ भारत में बहुभाषी डिजिटल क्रांति का नया युग
- भारत जेनएआई परियोजना: स्वदेशी AI से वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने की ओर भारत का बड़ा कदम
- Bharat GenAI: 22 भारतीय भाषाओं में AI से डिजिटल भारत को मिलेगा नया भविष्य
15 भाषाओं में मॉडल तैयार, शेष फरवरी 2026 तक पूरा होगा
सरकार के अनुसार, अभी तक 15 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट आधारित AI मॉडल तैयार हो चुका है, जबकि बाकी भाषाओं का विकास तेजी से जारी है और इसे फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, कई भाषाओं में पहले से ही स्पीच (Speech) और विज़न (Vision) क्षमताएं विकसित की जा चुकी हैं, जिससे यह AI मॉडल केवल टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि आवाज और इमेज को भी समझने और प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगा।
यह पहल BharatGen प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे अक्टूबर 2024 में लॉन्च किया गया था। इस परियोजना का नेतृत्व IIT बॉम्बे कर रहा है और यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के NM-ICPS मिशन के तहत संचालित हो रही है। BharatGen एक मल्टीमोडल AI सिस्टम है, जो टेक्स्ट, आवाज और विजुअल डेटा को समझने में सक्षम है।
22 भारतीय भाषाओं में मिलेगा AI का समर्थन
Bharat GenAI के तहत विकसित मॉडल भारत की सभी प्रमुख अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करेगा, जिनमें हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, असमिया और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं शामिल हैं। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता अपनी पसंदीदा भाषा में AI से सवाल पूछ सकेंगे और उसी भाषा में जवाब प्राप्त कर सकेंगे।
यह सुविधा भारत जैसे बहुभाषी देश में डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाएगी। इससे भाषा की बाधा खत्म होगी और तकनीक का लाभ ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचेगा।
शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और शासन में होगा बड़ा बदलाव
Bharat GenAI का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
- शिक्षा क्षेत्र:– छात्र अपनी मातृभाषा में सवाल पूछकर पढ़ाई में मदद ले सकेंगे। इससे ग्रामीण और क्षेत्रीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा तक पहुंच मिलेगी।
- कृषि क्षेत्र :- किसान अपनी भाषा में फसल, मौसम, उर्वरक और बीमारियों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनकी उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- स्वास्थ्य सेवाओं में :- लोग अपनी भाषा में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे जागरूकता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ होंगी।
- सरकारी सेवाओं में :- नागरिक सरकारी योजनाओं, दस्तावेज़ और प्रक्रियाओं की जानकारी अपनी भाषा में आसानी से समझ सकेंगे, जिससे डिजिटल गवर्नेंस मजबूत होगी।
आम नागरिकों और छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसर
Bharat GenAI आम लोगों के लिए एक डिजिटल सहायक की तरह काम करेगा। इसके माध्यम से लोग नौकरी के लिए रिज्यूमे तैयार कर सकेंगे, बिजनेस शुरू करने के लिए सुझाव प्राप्त कर सकेंगे और सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से ले सकेंगे।
छोटे व्यापारी और उद्यमी अपनी भाषा में बिजनेस रणनीति और मार्केटिंग से संबंधित सलाह प्राप्त कर सकेंगे। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
भारतीय डेटा पर आधारित, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील AI
Bharat GenAI की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे भारतीय डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे यह भारतीय भाषाओं, संस्कृति और सामाजिक संदर्भों को बेहतर तरीके से समझ सके। इससे AI द्वारा दिए जाने वाले जवाब अधिक सटीक और प्रासंगिक होंगे।
सरकार ने इस परियोजना में डेटा सुरक्षा, एथिकल AI और डेटा संप्रभुता पर विशेष ध्यान दिया है। इसका मतलब है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा सुरक्षित रहेगा और विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम होगी।
क्या है Generative AI और इसका महत्व?
Generative AI या GenAI एक उन्नत AI तकनीक है, जो टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो और अन्य डिजिटल सामग्री तैयार करने में सक्षम होती है। यह तकनीक उपयोगकर्ता के प्रश्नों को समझकर सटीक और उपयोगी उत्तर प्रदान करती है।
Bharat GenAI इसी तकनीक पर आधारित है और इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में AI सेवाएं प्रदान करना है, जिससे तकनीक का लाभ हर नागरिक तक पहुंच सके।
भारत को वैश्विक AI शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
भारत जेनएआई परियोजना भारत को AI के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत विदेशी AI मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय अपना स्वदेशी AI सिस्टम विकसित कर सकेगा।
यह पहल न केवल डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्टार्टअप, नवाचार और तकनीकी विकास को भी गति देगी।
Bharat GenAI: हर भारतीय के लिए अपनी भाषा में AI का नया युग
Bharat GenAI भारत के डिजिटल भविष्य को बदलने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। फरवरी 2026 तक 22 भारतीय भाषाओं में AI मॉडल तैयार होने के बाद, देश का हर नागरिक अपनी भाषा में AI का उपयोग कर सकेगा।
इससे शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य और शासन सहित कई क्षेत्रों में सुधार होगा और भारत AI के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा।

