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ISRO पूर्व प्रमुख बोले: हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकना आसान नहीं

SA News
Last updated: June 15, 2025 2:24 pm
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ISRO पूर्व प्रमुख बोले हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकना आसान नहीं
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बीते वर्षों में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदला है, हवाई हमलों और साइबर हथियारों ने युद्ध की दिशा ही बदल दी है। भारत-पाकिस्तान संघर्षों में ड्रोन और मिसाइलों ने अहम भूमिका निभाई है। इसी संदर्भ में ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस. सोमनाथ ने कहा है कि भारत की मौजूदा अंतरिक्ष रक्षा प्रणाली हाइपरसोनिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी: “सैकड़ों सैटेलाइट के बिना सेना को अंधेरे में काम करना पड़ सकता है।”

Contents
  • भारत को चाहिए सैकड़ों सैटेलाइट से जुड़े मुख्य बिंदु:
  • पूर्व ISRO प्रमुख ने क्या कहा:
  • हाइपरसोनिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करना क्यों मुश्किल है?
  • भारत को कैसी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी चाहिए?
  • FAQs: Defence System of India

भारत को चाहिए सैकड़ों सैटेलाइट से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • “मुट्ठी भर उपग्रह पर्याप्त नहीं हैं” – डॉ. एस. सोमनाथ
  • अमेरिका हाइपरसोनिक खतरे से निपटने के लिए 500-सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन पर काम कर रहा है।
  • भारत को भी वाणिज्यिक या विदेशी सैटेलाइट पर निर्भरता छोड़नी चाहिए।
  • सतत निगरानी के लिए सैकड़ों उपग्रहों की तैनाती आवश्यक है।

पूर्व ISRO प्रमुख ने क्या कहा:

डॉ. सोमनाथ, जिन्होंने 2022 से 2025 तक ISRO प्रमुख, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और सचिव के रूप में कार्य किया, वर्तमान में विक्रम साराभाई प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं। हाल ही में ‘From Code to Culture’ पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने के लिए भारत को सैकड़ों उपग्रहों की जरूरत है।

“अब युद्ध बदल चुका है”

सोमनाथ ने कहा कि अब युद्ध मैदानों से अधिक अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी पर निर्भर है। रूस-यूक्रेन युद्ध इसका उदाहरण है, जहां ड्रोन ने कई एयरबेस नष्ट कर दिए।

भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी सैटेलाइट्स की निर्भरता से बाहर आना होगा। उसे खुद के लॉन्च किए गए सैकड़ों उन्नत उपग्रहों और स्मार्ट AI आधारित विश्लेषण प्रणालियों की जरूरत है ताकि युद्ध पूर्व सटीक आकलन और प्रतिक्रिया संभव हो सके।

हाइपरसोनिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करना क्यों मुश्किल है?

“हाइपरसोनिक मिसाइलें इतनी तेज़ होती हैं कि पारंपरिक तकनीकों से उन्हें ट्रैक कर पाना मुश्किल होता है। हमें ऐसे निगरानी उपकरण चाहिए जो दूसरे देशों की गतिविधियों को भी समय रहते पकड़ सकें,” उन्होंने कहा।

भारत को कैसी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी चाहिए?

  • ऑप्टिकल
  • नाइट विजन
  • थर्मल इमेजिंग
  • रडार इमेजिंग
  • मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग
  • AI आधारित विश्लेषण और रीयल-टाइम कमांड सपोर्ट

FAQs: Defence System of India

1. हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होती है?

हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज़ की गति से कई गुना तेज़ चलती हैं, जिन्हें ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना अत्यंत कठिन होता है।

2. डॉ. सोमनाथ ने क्या चेतावनी दी है?

उन्होंने कहा कि भारत को सैकड़ों उन्नत सैटेलाइट्स की ज़रूरत है। मौजूदा प्रणाली हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने में अक्षम है।

3. क्या भारत को विदेशी सैटेलाइट पर निर्भर रहना चाहिए?

नहीं। आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र के लिए भारत को अपनी सैटेलाइट प्रणाली विकसित करनी चाहिए।

4. भारत को किस तरह के सैटेलाइट्स की आवश्यकता है?

थर्मल, रडार, मल्टीस्पेक्ट्रल, हाइपरस्पेक्ट्रल और AI आधारित निगरानी वाले सैटेलाइट्स।

5. क्या अन्य देश भी ऐसी प्रणाली विकसित कर रहे हैं?

हाँ। अमेरिका 500-सैटेलाइट्स के साथ एक निगरानी प्रणाली बना रहा है जो हाइपरसोनिक मिसाइल हमलों का पता लगा सके।

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