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मानवता की सेवा : सर्वश्रेष्ठ कार्य

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Last updated: January 7, 2025 11:33 am
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मानवता की सेवा सर्वश्रेष्ठ कार्य
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हम सब देखते है जैसे कि पशु – पक्षी, मनुष्य, प्रकृति का सौन्दर्य, पर्वत व नदियां आदि सर्व ईश्वर की रचना है। सभी जीवधारियों में ईश्वर ने मनुष्य को सबसे ज्यादा विवेकशील बनाया है। मनुष्य  सुख – शांति प्राप्त करने के लिए अपने विवेक अनुसार अनेकों प्रयास करता है, परंतु वह जिस सुख की खोज में होता है वह नहीं मिल पाता है। लेकिन जब मनुष्य अपने आप को मानव सेवा में लगा देता है, तो उसे आंतरिक सुख का एहसास होता है।वह एहसास,  जिसकी कल्पना उसने सपने में भी नहीं की थी ।

Contents
  • हमारे धार्मिक ग्रंथों में मानवता की सेवा का महत्त्व 
  • क्यों है मानवता की सेवा आवश्यक 
  • मानव सेवा का महत्त्व 
  • मानवता की सेवा में समस्याएं
  • मदर टेरेसा : मानवता की सेवा की मूर्ति 
  • कैसे की जा सकती है मानवता की सेवा 
  • आध्यत्मिक ज्ञान:  परोपकार और दया की भावना

यह उसका सर्वश्रेष्ठ कार्य था। मानव सेवा में ही परम सुख  एवं जीवन – आनंद छुपा हुआ है। वस एक बार इस कार्य को प्रारंभ तो करिए । मनुष्य के पास संवेदनशील हृदय है, जो दूसरों के सुख – दुख से प्रभावित होता है । जब दूसरों को खुशियां पाते हुए देखकर खुद खुश होता है, तब वह महान कहा जाता है।

हमारे धार्मिक ग्रंथों में मानवता की सेवा का महत्त्व 

बात यदि धर्मों की की जाए तो ऐसा कोई धर्म नहीं जिसमें मानवता / मानव सेवा को महत्व न दिया गया हो । धर्म अनेक हैं, लेकिन यदि मानवता है तो हम सब एक हैं। सभी की मूल भावना एक ही है कि समाज सेवा की जाए, कमजोर लोगों की मदद की जाए, समाज में सद्भावनाएं बनी रहें एवं सभी मिल – जुल कर रहें।

मानव सेवा सबसे बड़ा धर्म माना गया है । यदि यह सेवा निस्वार्थ भाव से की जाए तो व्यक्ति अपना कर्तव्य पूर्णता निभा सकता है । स्वार्थ की भावना से किया गया कार्य मनुष्य के पतन का कारण बनता है । यदि मन में स्वार्थ की भावना आ जाए, तो व्यक्ति के अंदर सबसे पहले लोभ – लालच उत्पन्न होते हैं और फिर यहीं से हिंसा उत्पन्न होती है, जो विनाश का कारण बनती है।

क्यों है मानवता की सेवा आवश्यक 

मानवता की सेवा करना ही सर्वश्रेष्ठ पुण्य का कार्य है। मानवता की सेवा बहुत आवश्यक है, क्योंकि बहुत कम लोग दूसरों की भलाई के बारे में निस्वार्थ सोचते हैं।

  • मानवता की सेवा के माध्यम से एकता, भाईचारा एवं लोगों में प्रेम की भावना उत्पन्न होती है।
  • यह केवल माध्यम है, जिससे दलितों और निराश लोगों को आशा की किरण दिखाई पड़ती है और उनका जीवन भयमुक्त होता है।  
  • यह आत्म-साक्षात्कार को पाने का बहुत ही सहज और सरल माध्यम है, जिससे हम संवेदनशील बनते हैं। 
  • सेवा करने वाला ही महसूस कर सकता है जीवन का वह वास्तविक सुख और आनंद, जो विनम्रता, विवेक और दया की भावना प्रकट करता है।
  • कहा गया है कि साधना के उच्चतम पद की प्राप्ति सेवा द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। आत्मा में परमात्मा का दर्शन होता है कहने का भाव ऐसा लगता है कि ईश्वर हर पल हमारे साथ हैं।
  • सेवा करने से अच्छे संस्कार बनते हैं और इससे प्रेम के असली अर्थ की समझ भी आती है।
  • सेवा करने से मन को शांति तो मिलती ही है, इससे हमारे अंदर अधीनता प्रकट होती है। हमारे मन के विकार नष्ट होते हैं और अहंकार दूर होता है।

मानव सेवा का महत्त्व 

अपने सुख सुविधा प्राप्त करने में सुख – आनंद मिलता है, लेकिन वह नश्वर है। दूसरी ओर जब हम मानव सेवा करके दूसरों को सुख देते हैं, तब अनश्वर, अनंत सुख को प्राप्त करते हैं । कहा जाता है कि सुख भोगने से नहीं, बल्कि त्यागने से प्राप्त होता है। सुख छीनने से नहीं, समर्पण द्वारा मिलता है। जब हम अपने लोगों के सुख का दायरा बढ़ाते – बढ़ाते सारे संसार के लोक हित व सेवा  का कार्य करने में लग जाते हैं, तो हमारा सुख भी बढ़ता जाता है ।

मनुष्य की सच्ची कामयाबी भी यही मानी जाती है।  मानव सेवा तो शत्रुता को मित्रता में बदलने की शक्ति रखती है। मानव सेवा तो केवल प्रेम और करुणा के द्वारा ही की जा सकती है। मानव सेवा करने वाले उतने ही पवित्र/धन्य माने जाते हैं, जितने ईश्वर साधना करने वाले माने जाते हैं। मानव सेवा के बारे में यह भी कहा गया है कि यह सेवा तो किराया समझ लो, जो आप यहां धरा पर रहने के लिए देते हैं।

मानवता की सेवा में समस्याएं

वर्तमान समय में मानवता की सेवा में बहुत कम लोग दिलचस्पी रखते हैं। इसके बहुत से कारण हैं, जैसे कि:

  • ज़ेनोफ़ोबिया जैसी समस्या से लेकर गरीबी, लोगों में भेदभाव और यहां तक कि नस्लवाद आदि समस्याओं से सामना करना पड़ता है ।
  • दुनियाभर में असमानता का के पीछे अमीर और गरीब वर्गों में बंटवारा जैसी समस्या ही मुख्य कारण है । इससे समाज में मानवीय चेतना का विकास थमता/रुखता  जा रहा है।
  • आज के युग में मानव की अंतरात्मा में केवल स्वार्थ,  लोभ – लालच,  अहंकार, ईर्ष्या और नफरत जैसी दुर्गंध फैली हुई है, जिससे वह अपनी मूल प्रकृति से भ्रमित हो रहा है ।
  • सेवा की बात आती है तो लोग कहते हैं कि समय का अभाव है । धन – दौलत जोड़ने को ही हमने अपना मुख्य उद्देश्य बना रखा है । मूल कार्य था मानवता की सेवा करना जो हम बिल्कुल भी नहीं स्वीकारते हैं।

मदर टेरेसा : मानवता की सेवा की मूर्ति 

मदर टेरेसा को कौन नहीं जानता। मदर टेरेसा दया, करूंगा, प्रेम, संवेदनशीलता जैसे गुणों से भरपूर थी। उनके चेहरे की मुस्कान में अपनापन झलकता था । उन्होंने निस्वार्थ भाव से पूरा जीवन मानव सेवा में लगा दिया। गरीब, बीमार और असहाय लोगों को बड़े प्रेम से ध्यान रखती और उनकी मदद करती थी। उनके नाम से ही प्रेम व शांति का संदेश मिलता है ।

उनका कहना था कि ईश्वर ने हमें मानव सेवा के लिए ही इस धरा पर भेजा है ।मदर टेरेसा कहती थी कि लोगों के चेहरे की मुस्कान ही हमारे चेहरे की मुस्कान है।

लोगों की मदद करने से ईश्वर अपने आप हमारी मदद करते हैं।उनके इस महान कार्य के लिए उन्हें 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । यहां तक कि वे 1980 में भारत रत्न पा चुकी थीं ।  उनके अंदर धर्मपरिवर्तन की भावना कभी नहीं थी । दया/ करुणा  मूर्ति ने हमेशा दूसरों की मदद करते हुए पूरा जीवन मानव की सेवा में लगा दिया और एक परम सुख व आनंद प्राप्त किया ।

कैसे की जा सकती है मानवता की सेवा 

मानवता की सेवा के लिए किसी विशेष सामग्री या वस्तु की आवश्यकता नहीं होती है । इसमें तो निस्वार्थ भाव से समर्पण होना चाहिए। मानवता की सेवा के लिए अंतरात्मा में दया/ करुणा होनी चाहिए। हमें परोपकार और दया की भावना के साथ गरीब, बीमार और असहाय लोगों की मदद करनी चाहिए बूढ़े – बुजुर्गों की सेवा – देखभाल करना भी मानव सेवा के अंतर्गत आता है । दुखी लोगों को प्यार, हिम्मत और विश्वास महसूस करवाने की कोशिश करें । जरूरतमंदों को पढ़ना – लिखना सिखाएं और भोजन की जरूर हो, तो वह पूरी करने की कोशिश करें।

आध्यत्मिक ज्ञान:  परोपकार और दया की भावना

बिना विवेक ज्ञान हो नहीं सकता और ज्ञान बिना प्रेम व शांति की भावना प्रकट नहीं हो पाएगी। इसी लिए सर्व प्रथम गुरु की शरण ग्रहण करनी चाहिए, जिससे मानव देवता के समान हो जाता है। गुरु के बिना ज्ञान हो नहीं सकता। इसी लिए गुरु पूर्ण हो, यह भी जरूरी है ।

सच्चे गुरु की नजर में पूरा मानव समाज एक समान होता है। ऐसी भावना प्रकट करवाने वाले वर्तमान में पूरे विश्व में एकमात्र केवल तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं, जो वास्तविक तत्वज्ञान प्रदान करके पूर्ण परमात्मा की पूजा आराधना बताते हैं। परमात्मा की सच्ची भक्ति करने वाला सच्चा भक्त हमेशा दया, प्रेम, शांति और परोपकार की भावना रखता है ।

भक्त आत्मा हमेशा समाज सेवा व जरूरतमंदों की मदद करने में तत्पर रहता है। यह भाव परम पूज्य संत रामपाल जी महाराज के भक्तों में दिखाई देते हैं। हमेशा संत जी के भक्त बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद करते दिखाई देते है तो दूसरी और किसान भाइयों की मदद करते हुए दिखाई देते हैं। यहां तक कि बीमार – असहाय लोगों की मदद भी संत जी के भक्त करते हैं। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें संत रामपाल जी महाराज ऐप पर।

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