नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) का आयोजन हुआ। इस बार कार्यक्रम की थीम “Scale Without Boundaries” रखी गई थी। इसका उद्देश्य नई तकनीकों और डिजिटल सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और भारत की तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने पर जोर देना था। आयोजन दूरसंचार विभाग और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने मिलकर किया।
इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 6G, सैटेलाइट कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा और स्मार्ट डिवाइस जैसी तकनीकों पर चर्चा हुई। कई कंपनियों ने ऐसे समाधान भी दिखाए, जिनका इस्तेमाल भविष्य में भुगतान, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार के क्षेत्र में हो सकता है।
Jio AI Glasses से UPI पेमेंट का प्रदर्शन
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा रिलायंस जियो के AI स्मार्ट चश्मे की रही। IMC 2026 में दिखाए गए इन चश्मों के जरिए दुकानदार के QR कोड को देखकर UPI भुगतान शुरू करने की सुविधा का प्रदर्शन किया गया।
इनमें वॉयस कमांड, AI असिस्टेंट और भारतीय भाषाओं से जुड़े फीचर्स भी दिखाए गए। लाइव अनुवाद, नोट्स तैयार करने और दूसरी डिजिटल सुविधाओं की संभावनाएं भी सामने आईं। हालांकि, भुगतान की सुरक्षा, यूजर की अनुमति और गलती से ट्रांजैक्शन होने जैसे सवाल अभी महत्वपूर्ण हैं। इसे प्रदर्शित तकनीक के रूप में देखना चाहिए, न कि हर यूजर के लिए उपलब्ध सेवा के तौर पर।
हेल्थ ATM से 80 से ज्यादा जांच का दावा
स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में CureBay Smart Health ATM भी चर्चा में रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मशीन के जरिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन और लिवर प्रोफाइल जैसी जांच करने की सुविधा दिखाई गई।
कंपनी के अनुसार, इसमें 80 से अधिक प्रकार की जांच की जा सकती हैं और डिजिटल रिपोर्ट करीब 30 मिनट में मिल सकती है। ऐसी मशीनें अस्पतालों से दूर रहने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। लेकिन जांच की सटीकता, उपलब्ध सुविधाओं और मेडिकल उपयोग की पुष्टि जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और मान्य लैब जांच का विकल्प बना रहना चाहिए।
AI डेंटिस्ट और दांतों की स्कैनिंग
AI आधारित डेंटिस्ट तकनीक भी आकर्षण का हिस्सा रही। इसमें कैमरे और स्कैनिंग सेंसर से दांतों और मसूड़ों की स्थिति देखने की बात कही गई। 360 डिग्री स्कैनिंग और लगभग 60 सेकंड में ओरल हेल्थ रिपोर्ट तैयार करने का दावा भी सामने आया।
यह तकनीक शुरुआती जांच में मदद कर सकती है, लेकिन रिपोर्ट तैयार होने की गति से ही यह साबित नहीं होता कि जांच पूरी तरह सटीक है। इसके चिकित्सकीय इस्तेमाल से पहले स्वतंत्र परीक्षण और विशेषज्ञों की राय महत्वपूर्ण है।
ड्रोन और रक्षा तकनीक
कार्यक्रम में ड्रोन से जुड़ी तकनीकों पर भी ध्यान दिया गया। Dronastra एंटी-ड्रोन सिस्टम का उद्देश्य संदिग्ध या अनधिकृत ड्रोन का पता लगाने और उनसे निपटने जैसी जरूरतों में मदद करना है। ऐसी तकनीक का उपयोग संवेदनशील प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा में हो सकता है।
आपदा के समय संचार सहायता देने वाले ड्रोन की अवधारणा भी उपयोगी है। बाढ़, भूकंप या नेटवर्क ठप होने पर ऐसे समाधान राहत दलों तक सूचना पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक क्षमता का आकलन परीक्षण और परिचालन परिणामों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
सैटेलाइट कनेक्टिविटी, 6G और D2M
IMC 2026 में अगली पीढ़ी के नेटवर्क पर भी जोर रहा। सैटेलाइट कम्युनिकेशन से दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावना है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क कमजोर होता है।
6G तकनीक पर चर्चा में AI आधारित नेटवर्क, तेज कनेक्टिविटी, स्मार्ट शहरों और औद्योगिक स्वचालन जैसे विषय शामिल रहे। वहीं, D2M यानी Direct-to-Mobile तकनीक के जरिए मोबाइल पर सीधे प्रसारण की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया गया। इन तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने में नेटवर्क, उपकरणों, लागत और नियमों की भूमिका अहम होगी।
IMC 2026 के प्रमुख आंकड़े
सरकारी जानकारी के अनुसार, आयोजन में 1.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों, 600 से ज्यादा स्टार्टअप और 2,000 से अधिक तकनीकी उपयोग के उदाहरणों की उम्मीद जताई गई थी। ये आयोजन से पहले जारी किए गए अनुमान थे।
निष्कर्ष
IMC 2026 में दिखाए गए इनोवेशन बताते हैं कि AI, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य तकनीक और संचार सेवाओं में नए प्रयोग हो रहे हैं। Jio के स्मार्ट चश्मे से UPI भुगतान का प्रदर्शन और हेल्थ ATM जैसी तकनीकें लोगों के रोजमर्रा के काम आसान कर सकती हैं। लेकिन किसी तकनीक का प्रदर्शन होना और उसका सुरक्षित, सटीक तथा बड़े स्तर पर उपलब्ध होना अलग बातें हैं। असली प्रभाव उसकी विश्वसनीयता, कीमत और आम लोगों तक पहुंच पर निर्भर करेगा।

