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US Visa News: विदेशी छात्रों और पत्रकारों के वीज़ा पर ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, कोर्ट ने नए नियम पर लगाई रोक, भारतीय छात्रों को मिली बड़ी राहत

SA News
Last updated: September 20, 2026 11:45 am
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US Visa Update 2026: कोर्ट ने विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए ट्रंप के नए वीज़ा नियमों
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US Visa Update 2026: अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विशेषकर भारत से जाने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश (Federal Judge) ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस विवादास्पद नए वीज़ा नियम के लागू होने पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है, जिसका उद्देश्य विदेशी छात्रों, पत्रकारों और एक्सचेंज विजिटर्स के अमेरिका में रुकने की अवधि को सख्ती से सीमित करना था। 

Contents
  • US Visa News से जुड़े मुख्य बिंदु:
  • कोर्ट ने क्यों लगाई नियम पर रोक? अर्थव्यवस्था को नुकसान का हवाला
  • शिक्षाविदों की चिंताएं और प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा
  • भारतीय छात्रों के लिए इस फैसले का क्या है महत्व?
  • FAQs about US Visa 2026

जुलाई 2026 में अंतिम रूप दिए गए इस नियम को मंगलवार से पूरे अमेरिका में लागू किया जाना था, लेकिन लागू होने से ठीक एक दिन पहले, मैसाचुसेट्स के एक डिस्ट्रिक्ट जज ने इसे ब्लॉक कर दिया। अदालत ने सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के प्रतिबंधों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है। 

US Visa News से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • अमेरिकी कोर्ट ने विदेशी छात्रों और पत्रकारों के लिए वीज़ा अवधि सीमित करने वाले ट्रंप प्रशासन के नए नियम को अस्थायी रूप से रोक दिया है।
  • इस नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों और एक्सचेंज विज़िटर्स के लिए अमेरिका में रुकने की अधिकतम सीमा 4 वर्ष तय की गई थी।
  • विदेशी पत्रकारों के लिए 240 दिन और चीनी मीडियाकर्मियों के लिए यह सीमा मात्र 90 दिन निर्धारित की गई थी।
  • जज ने राष्ट्रीय सुरक्षा के सरकारी दावों को खारिज करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
  • कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि सरकार की आलोचना करने वाले विदेशी पत्रकारों के वीजा का रिन्यूअल रोका जा सकता था।
  • इस फैसले से लगभग 600 संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले वादी (Plaintiffs) और हजारों भारतीय छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

क्या था ट्रंप प्रशासन का नया विवादित वीजा नियम?

अमेरिका में दशकों से चली आ रही Duration of Status प्रणाली को पूरी तरह से समाप्त करने वाला था। पुरानी व्यवस्था के तहत, विदेशी छात्रों को तब तक अमेरिका में रहने की अनुमति होती थी जब तक वे अपने अकादमिक कार्यक्रम जैसे पीएचडी या मास्टर्स को पूरा नहीं कर लेते, बशर्ते वे अपना वैध छात्र स्टेटस बनाए रखें। लेकिन नए नियम के अनुसार, छात्र और एक्सचेंज विजिटर्स के लिए अमेरिका में रुकने की अधिकतम सीमा फिक्स करके चार साल कर दी गई थी। 

इसी तरह, विदेशी पत्रकारों के लिए यह सीमा घटाकर 240 दिन कर दी गई थी, जबकि चीन से आने वाले मीडियाकर्मियों के लिए यह सीमा सबसे कम, मात्र 90 दिन तय की गई थी। हालांकि, इस नियम में वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करने का प्रावधान था, लेकिन इसका अंतिम निर्णय ‘होमलैंड सिक्योरिटी विभाग’ (DHS) के अधिकारियों के विवेक पर छोड़ दिया गया था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि यदि किसी का एक्सटेंशन रद्द हो जाता, तो उसके पास अपील करने का कोई भी कानूनी अधिकार या विकल्प नहीं छोड़ा गया था।

कोर्ट ने क्यों लगाई नियम पर रोक? अर्थव्यवस्था को नुकसान का हवाला

इस नियम के खिलाफ मुख्य रूप से उच्च शिक्षा क्षेत्र और श्रमिक संघों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए, मैसाचुसेट्स के जिला न्यायाधीश एफ. डेनिस सायलर चतुर्थ (Judge F Dennis Saylor IV) ने एक प्रारंभिक निषेधाज्ञा (Preliminary Injunction) जारी की, जिसने इस नियम के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन पर तुरंत रोक लगा दी। न्यायाधीश ने अपने फैसले में सरकार के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि यह नियम देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। 

इसके विपरीत, जज ने कड़े शब्दों में कहा कि यह नई नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उच्च शिक्षा प्रणाली को संभावित रूप से नुकसान पहुंचाएगी। सरकार (DHS) का तर्क था कि यह समय सीमा धोखाधड़ी को रोकने और लोगों को अपने वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने से रोकने में मदद करेगी। लेकिन अदालत ने इस तर्क को कमजोर मानते हुए कहा कि नियम और इसके कथित उद्देश्यों के बीच का संबंध बहुत ही कमजोर है।

शिक्षाविदों की चिंताएं और प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा

इस नियम का शिक्षाविदों, विशेषकर शीर्ष विश्वविद्यालयों ने कड़ा विरोध किया था। उदाहरण के लिए, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एलन एम. गार्बर (Alan M Garber) ने इस नियम को पूरी तरह से “अजीब” करार दिया था। उन्होंने तर्क दिया था कि, “एक सामान्य पीएचडी (PhD) कार्यक्रम को पूरा होने में कम से कम छह साल लगते हैं, ऐसे में वीजा के कटऑफ के रूप में केवल चार साल की सीमा तय करना बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है।”

न्यायाधीश सायलर ने अपने फैसले में एक और बहुत गंभीर चिंता जाहिर की। उन्होंने इस बात की स्पष्ट संभावना जताई कि इस नए, अब-अवरुद्ध नियम का सरकार द्वारा भारी दुरुपयोग किया जा सकता था। जज ने विशेष रूप से विदेशी पत्रकारों के मामले में लिखा, “इस बात की स्पष्ट संभावना है कि जो विदेशी पत्रकार सरकार या विशेष रूप से DHS अधिकारियों के आलोचक हैं, उनके वीजा का नवीनीकरण जानबूझकर नहीं किया जाएगा।” न्यायाधीश ने यह भी संदेह व्यक्त किया कि इस नियम का असली उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों और प्रेस पर सरकार का अधिक नियंत्रण स्थापित करना हो सकता है।

भारतीय छात्रों के लिए इस फैसले का क्या है महत्व?

अमेरिका दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन है, और भारत यहां छात्र भेजने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। यदि यह चार साल का प्रतिबंध लागू हो जाता, तो उन हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता जो अमेरिका में लंबी अवधि के कोर्स, विशेषकर पीएचडी या रिसर्च फेलोशिप कर रहे हैं या करने की योजना बना रहे हैं। चूंकि वीजा एक्सटेंशन की शक्ति पूरी तरह से आव्रजन अधिकारियों के हाथों में चली जाती और अपील का कोई विकल्प नहीं होता, इसलिए छात्रों में हर समय डिपोर्टेशन का डर बना रहता। 

यह अनिश्चितता कई मेधावी भारतीय छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों में आवेदन करने से रोक सकती थी। लेकिन अदालत द्वारा इस नियम पर देशव्यापी रोक लगाने से अब पुरानी ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ प्रणाली ही लागू रहेगी। जब तक यह मामला अदालत में चलता रहेगा, तब तक भारतीय और अन्य विदेशी छात्र बिना किसी चार साल की कटऑफ के डर के, अपना कोर्स पूरा होने तक अमेरिका में अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। यह फैसला वैश्विक प्रतिभाओं के लिए अमेरिकी शिक्षा प्रणाली के दरवाजे खुले रखने की दिशा में एक बहुत बड़ी जीत है।

FAQs about US Visa 2026

Q1. अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के किस नए visa नियम पर रोक लगाई है?

कोर्ट ने उस नए नियम पर रोक लगाई है जो विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर्स और पत्रकारों के अमेरिका में रुकने की समय सीमा तय करने वाला था।

Q2. इस नए नियम के तहत विदेशी छात्रों के लिए क्या समय सीमा तय की गई थी?

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अमेरिका में रुकने की अधिकतम सीमा 4 वर्ष निर्धारित की गई थी।

Q3. पत्रकारों के लिए इस वीजा नियम में क्या प्रावधान था?

विदेशी पत्रकारों के लिए 240 दिन और चीन के पत्रकारों के लिए मात्र 90 दिन की वीज़ा सीमा तय की गई थी।

Q4. जज ने इस नियम पर रोक लगाते हुए क्या मुख्य कारण बताया?

जज ने कहा कि यह नियम राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उच्च शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाएगा।

Q5. इस वीज़ा नियम का भारतीय छात्रों पर क्या असर पड़ने वाला था?

यदि यह लागू होता, तो 4 साल से अधिक समय लेने वाले कोर्स जैसे PhD कर रहे हजारों भारतीय छात्रों को अपना वीज़ा रिन्यू कराने में भारी परेशानियों और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता।

Q6. क्या सरकार के पास इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है?

हाँ, यह एक प्रारंभिक निषेधाज्ञा है; मामला अभी अदालत में है और अमेरिकी सरकार इस रोक के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकती है।

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