भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एलपीजी (LPG) आयात की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 67 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वर्ष की शुरुआत में यह केवल 10 प्रतिशत के आसपास थी। सरकार का मानना है कि यह बदलाव केवल आयात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के प्रभाव को कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
10 प्रतिशत से 67 प्रतिशत तक का सफर
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि वर्ष की शुरुआत में सरकार ने अमेरिका से सीमित मात्रा में LPG खरीदने का फैसला किया था। उस समय यह निर्णय किसी भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान या मध्य-पूर्व की परिस्थितियों के कारण नहीं लिया गया था। सरकार पहले से ही ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की योजना पर काम कर रही थी। हालांकि उस समय कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए कि जब खाड़ी देशों से आसानी से LPG उपलब्ध हो रही है तो अमेरिका से खरीद की आवश्यकता क्यों है। लेकिन कुछ ही महीनों में परिस्थितियां बदलीं और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बनकर सामने आया।
क्यों बदली भारत की LPG आयात नीति?
भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित LPG के माध्यम से पूरा करता है। देश में रसोई गैस की बढ़ती मांग के कारण आयात पर निर्भरता लगातार बनी हुई है। पहले अधिकांश LPG खाड़ी देशों से आती थी, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध, लाल सागर में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता जैसी घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया। इन परिस्थितियों ने भारत को यह महसूस कराया कि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए सरकार ने अलग-अलग देशों से गैस खरीदने की नीति अपनाई, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो।
2027 तक अमेरिका से और बढ़ सकती है खरीद
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार वर्ष 2027 तक देश के कुल LPG आयात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से खरीदने की योजना पर काम कर रही है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जल्द ही अमेरिका से LPG खरीद के लिए नए टेंडर जारी कर सकती हैं। इसके अलावा भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका जाकर ऊर्जा कंपनियों के साथ आपूर्ति और दीर्घकालिक व्यापारिक समझौतों पर भी चर्चा करेगा। इससे भविष्य में गैस की उपलब्धता अधिक स्थिर रहने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मिलेगा फायदा
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। भारत पहले ही अमेरिका से ऊर्जा आयात को 10 अरब डॉलर से बढ़ाकर 25 अरब डॉलर तक ले जाने की प्रतिबद्धता जता चुका है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य भी तय किया है। अमेरिका से LPG आयात बढ़ने से भारत को न केवल वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंध भी मजबूत होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में ऊर्जा कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और आपूर्ति बाधित होने की संभावना भी कम होगी।
सरकार का लक्ष्य सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार केवल तेल और गैस आयात पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा स्रोतों में विविधता, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और भरोसेमंद वैश्विक साझेदारियों पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने हाल ही में घोषित 84,000 करोड़ रुपये के ‘समुद्र मंथन मिशन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन खोज को नई गति मिलेगी। सरकार एलपीजी, एलएनजी, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन और घरेलू तेल-गैस उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत को सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ा रही है। आने वाले वर्षों में यही रणनीति देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और वैश्विक संकटों के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

