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Home » WMO Report 2026: धरती का जलवायु संतुलन इतिहास में सबसे ज्यादा बिगड़ा, UN ने जारी किया रेड अलर्ट

Science

WMO Report 2026: धरती का जलवायु संतुलन इतिहास में सबसे ज्यादा बिगड़ा, UN ने जारी किया रेड अलर्ट

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Last updated: March 29, 2026 11:31 am
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WMO Report 2026: धरती का जलवायु संतुलन इतिहास में सबसे ज्यादा बिगड़ा
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WMO Climate Report 2026: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने जलवायु परिवर्तन को लेकर एक बेहद गंभीर और चेतावनी भरी रिपोर्ट जारी की है। 23 मार्च 2026 को विश्व मौसम विज्ञान दिवस के अवसर पर जारी स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2025 रिपोर्ट के अनुसार, धरती का जलवायु और ऊर्जा संतुलन मापे गए इतिहास में सबसे अधिक बिगड़ चुका है। ग्रीनहाउस गैसों के रिकॉर्ड स्तर के कारण धरती का तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। महासागरों में गर्मी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति को जलवायु आपातकाल करार देते हुए कहा है कि हर प्रमुख जलवायु संकेतक, खतरे का संकेत दे रहा है।

Contents
  • WMO Report 2026 से जुड़े मुख्य बिंदु:
  • क्या है धरती का ऊर्जा असंतुलन?
  • महासागरों पर पड़ रहा है सबसे ज़्यादा असर
  • लगातार 11 सबसे गर्म साल और यूएन की चेतावनी
  • FAQs about WMO Report 2026:

WMO Report 2026 से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • WMO के अनुसार, धरती का ऊर्जा असंतुलन पिछले 65 सालों के रिकॉर्ड में सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
  • साल 2015 से 2025 के बीच का समय रिकॉर्ड किए गए इतिहास के सबसे गर्म 11 साल रहे हैं।
  • वायुमंडल में CO2 का स्तर पिछले 20 लाख वर्षों में सबसे अधिक हो गया है।
  • धरती की अतिरिक्त गर्मी का 91 प्रतिशत से अधिक हिस्सा महासागरों द्वारा सोखा जा रहा है।

क्या है धरती का ऊर्जा असंतुलन?

एक स्वस्थ और स्थिर जलवायु में, सूरज से आने वाली ऊर्जा और धरती से बाहर जाने वाली ऊर्जा लगभग बराबर होनी चाहिए। लेकिन जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसें बहुत अधिक बढ़ गई हैं। ये गैसें एक कंबल की तरह काम करती हैं जो धरती की गर्मी को अंतरिक्ष में जाने से रोकती हैं। WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो के अनुसार, इसी रुकी हुई गर्मी के कारण यह ऊर्जा असंतुलन पैदा हुआ है, जो पिछले 20 सालों में बहुत तेज़ी से बढ़ा है।

महासागरों पर पड़ रहा है सबसे ज़्यादा असर

धरती पर मौजूद अतिरिक्त गर्मी का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा ही हमारे वायुमंडल को गर्म करता है। 

  • WMO के आंकड़ों के अनुसार, इस अतिरिक्त गर्मी का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा महासागरों के पानी द्वारा सोख लिया जाता है। 
  • पिछले दो दशकों (2005-2025) में महासागरों के गर्म होने की दर 1960-2005 की तुलना में दोगुनी हो गई है। महासागर हर साल इतनी ऊर्जा सोख रहे हैं, जो पूरी मानव जाति द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वार्षिक ऊर्जा के 18 गुना के बराबर है।
  • इसके परिणामस्वरूप आर्कटिक और अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है और ग्लेशियर अभूतपूर्व गति से पिघल रहे हैं।

लगातार 11 सबसे गर्म साल और यूएन की चेतावनी

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 2015 से 2025 तक के 11 साल अब तक के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, मानवता ने अभी-अभी रिकॉर्ड पर 11 सबसे गर्म साल सहे हैं। जब इतिहास 11 बार खुद को दोहराता है, तो यह कोई संयोग नहीं है, यह कार्रवाई करने का बुलावा है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण दुनियाभर में भीषण लू, बाढ़, सूखा और जंगलों में भयंकर आग जैसी घटनाएं आम हो गई हैं।

FAQs about WMO Report 2026:

WMO की 2026 की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य निष्कर्ष यह है कि ग्रीनहाउस गैसों के कारण धरती का ऊर्जा असंतुलन 65 वर्षों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और 2015-2025 सबसे गर्म 11 साल रहे हैं।

धरती का ऊर्जा असंतुलन (Energy Imbalance) क्या होता है?

उत्तर: सूरज से धरती पर आने वाली ऊर्जा और धरती से वापस अंतरिक्ष में जाने वाली ऊर्जा के बीच के अंतर को ऊर्जा असंतुलन कहते हैं।

धरती की सबसे ज़्यादा अतिरिक्त गर्मी कहां जा रही है?

उत्तर: WMO के अनुसार, धरती की अतिरिक्त गर्मी का 91 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा महासागरों के पानी द्वारा सोखा जा रहा है।

रिकॉर्ड के अनुसार अब तक का सबसे गर्म साल कौन सा रहा है?

उत्तर: ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 2024 अब तक का सबसे गर्म साल था।

इस रिपोर्ट में किन गैसों को मुख्य कारण बताया गया है?

उत्तर: इस ऊर्जा असंतुलन के लिए मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी हीट-ट्रैपिंग गैसों को ज़िम्मेदार बताया गया है।

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