Census 2026: नई दिल्ली: भारत की 16वीं और सबसे आधुनिक जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज़ हो गई हैं। बता दें कि यह देश के इतिहास की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होने जा रही है। हाल ही में जारी दिशा-निर्देशों से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस बार जनगणना का काम एक साथ नहीं, बल्कि दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, पहले चरण में प्रगणक आपसे केवल मकान की जानकारी नहीं मांगेंगे, बल्कि आपको अपने घर में मौजूद स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्शन, कंप्यूटर और लैपटॉप से जुड़ी जानकारी भी अनिवार्य रूप से देनी होगी।
Census 2026 Update से जुड़े मुख्य बिंदु:
- भारत की आगामी जनगणना 100 प्रतिशत डिजिटल होगी, मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल का होगा इस्तेमाल।
- जनगणना का काम दो प्रमुख चरणों में होगा: पहला मकान सूचीकरण और दूसरा जनसंख्या गणना।
- पहले चरण के दौरान मोबाइल, इंटरनेट और लैपटॉप की उपलब्धता पर पूछे जाएंगे नए सवाल।
- नागरिक खुद भी ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए भर सकेंगे अपनी जानकारी।
- सरकार ने आश्वस्त किया है कि जनगणना अधिनियम के तहत व्यक्तिगत डेटा 100 प्रतिशत रहेगा गोपनीय।
किन दो चरणों में होगी जनगणना? Phases of Census 2026
भारत के महापंजीयक (RGI) के अनुसार, इतनी बड़ी आबादी का सटीक डेटा जुटाने के लिए जनगणना को वैज्ञानिक तरीके से दो चरणों में बांटा गया है:
पहला चरण: यह जनगणना का शुरुआती और बहुत महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें 33 सवाल शामिल हैं। इस चरण में देश में मौजूद सभी इमारतों, घरों और उनमें रहने वाले परिवारों की बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ स्मार्टफोन से संबंधित जानकारी भी पूछी जाएगी।
दूसरा चरण: मकान सूचीकरण का काम पूरा होने के कुछ महीनों बाद यह दूसरा और अंतिम चरण शुरू होगा। इस चरण में प्रगणक घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति, मातृभाषा, शिक्षा का स्तर और उनके व्यवसाय की विस्तृत जानकारी दर्ज करेंगे।
क्यों मांगी जा रही है डिजिटल उपकरणों की जानकारी?
भारत की पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी। तब से लेकर 2026 तक देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। सरकार इस नए डेटा का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए करेगी:
1. डिजिटल डिवाइड का आकलन: यह पता लगाना कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच में कितना अंतर है और किन इलाकों में अभी भी कनेक्टिविटी सुधारने की जरूरत है।
2. ई-गवर्नेंस: सरकारी योजनाओं को सीधे मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार करना।
3. भविष्य की नीतियां: टेलीकॉम और आईटी सेक्टर के लिए नई नीतियां और मोबाइल टावर लगाने की योजनाएं इसी सटीक डेटा के आधार पर बनेंगी।
डिजिटल जनगणना कैसे काम करेगी?

इस बार सरकारी कर्मचारी भारी-भरकम रजिस्टर और पेन लेकर नहीं आएंगे। उनके पास एक विशेष मोबाइल ऐप होगा जिसमें दोनों चरणों का डेटा रीयल-टाइम में फीड किया जाएगा। इसके अलावा, जो लोग तकनीकी रूप से सक्षम हैं, वे जनगणना पोर्टल पर जाकर Self Enumeration के ज़रिए अपने और अपने मकान की जानकारी स्वयं भी भर सकेंगे। डिजिटल प्रक्रिया होने के कारण जनगणना के आंकड़े प्रोसेस होने में सालों नहीं लगेंगे। काम पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद फाइनल डेटा जारी कर दिया जाएगा।
डेटा प्राइवेसी पर सरकार का स्पष्टीकरण
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्र किया गया सारा डेटा 100 प्रतिशत गोपनीय रहता है। आपकी व्यक्तिगत जानकारी किसी भी अन्य विभाग के साथ साझा नहीं की जाती है। इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और देश के विकास की नीतियां बनाने के लिए ही किया जाता है।
FAQs about Census 2026 Update
भारत की जनगणना 2026 कितने चरणों में होगी?
यह जनगणना दो चरणों में होगी, पहला मकान सूचीकरण और दूसरा जनसंख्या गणना।
मकान सूचीकरण में कौन से नए सवाल जोड़े गए हैं?
इस बार मकान सूचीकरण में स्मार्टफोन, सामान्य मोबाइल, इंटरनेट कनेक्शन और लैपटॉप या कंप्यूटर की उपलब्धता से जुड़े सवाल अनिवार्य रूप से पूछे जाएंगे।
क्या यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना है?
जी हां, यह भारत की पहली 100 प्रतिशत डिजिटल जनगणना है, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा।
क्या मैं अपने परिवार की जनगणना खुद कर सकता हूं?
हां, सरकार सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प दे रही है, जिससे नागरिक घर बैठे ऑनलाइन अपनी जानकारी खुद भर सकेंगे।
क्या जनगणना में दिया गया मेरा डेटा सुरक्षित रहेगा?
बिल्कुल, जनगणना अधिनियम के सख्त नियमों के तहत आपकी सभी व्यक्तिगत जानकारियां पूरी तरह से गोपनीय और सुरक्षित रखी जाती हैं।

