केंद्रीय बजट 2026 से देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स, फाइनेंशियल प्लानर्स और निवेशक लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अब समय आ गया है जब लॉन्ग-टर्म सेविंग्स के लिए टैक्स इंसेंटिव्स को नए सिरे से डिजाइन किया जाए।
- Budget 2026: मुख्य बिंदु
- सेक्शन 80C: क्यों बन गया है अब अपर्याप्त?
- Budget 2026 में 80C लिमिट बढ़ने की कितनी उम्मीद?
- नए टैक्स सिस्टम में भी मिल सकता है 80C का फायदा
- यदि बजट 2026 में:
- कैपिटल गेन्स टैक्स और ब्याज आय पर सुधार की जरूरत
- टैक्स-मुक्त डिविडेंड पर फिर से विचार?
- गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स: घरेलू बचत को प्रोडक्टिव बनाने की पहल
- लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को 80C बास्केट से अलग करने की मांग
- समाधान: रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए अलग सब-लिमिट
- हाउसिंग और वेल्थ क्रिएशन को मिल सकता है सपोर्ट
- Budget 2026: टैक्स सुधारों से मध्यम वर्ग और निवेशकों को मिल सकती है बड़ी राहत
खासतौर पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली टैक्स डिडक्शन लिमिट को बढ़ाने की मांग बजट से पहले तेज हो गई है।
वर्तमान में पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत सेक्शन 80C में अधिकतम ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। यह सीमा पिछले दस वर्षों से अधिक समय से जस की तस बनी हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई, जीवन-यापन की लागत और वित्तीय जरूरतों में बड़ा बदलाव आया है।
Budget 2026: मुख्य बिंदु
- सेक्शन 80C की सीमित डिडक्शन: बढ़ती महंगाई में मध्यम वर्ग की बचत और रिटायरमेंट सुरक्षा पर असर
- Budget 2026 में सेक्शन 80C लिमिट बढ़ोतरी की संभावनाएं
- Budget 2026: नए टैक्स सिस्टम में 80C जैसी टैक्स छूट शामिल होने से लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को मिल सकता है नया प्रोत्साहन
- कैपिटल गेन्स और ब्याज आय पर टैक्स सुधार से लॉन्ग-टर्म निवेश को मिल सकती है नई मजबूती
- बजट 2026 में टैक्स-मुक्त डिविडेंड की वापसी: छोटे निवेशकों को मिल सकता है बड़ा इक्विटी प्रोत्साहन
- गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स से घरेलू सोने को निवेश की मुख्यधारा में लाने की रणनीति
- 80C बास्केट में भीड़ से रिटायरमेंट सेविंग्स प्रभावित, लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए अलग टैक्स ढांचे की जरूरत
- रिटायरमेंट सेविंग्स को मजबूती देने के लिए अलग टैक्स सब-लिमिट की जरूरत
- Budget 2026: हाउसिंग री-इनवेस्टमेंट और कैपिटल गेंस राहत से वेल्थ क्रिएशन को नई गति
- बजट 2026: मध्यम वर्ग और निवेशकों के लिए ऐतिहासिक टैक्स राहत की संभावना
सेक्शन 80C: क्यों बन गया है अब अपर्याप्त?
जब सेक्शन 80C की मौजूदा लिमिट तय की गई थी, तब औसत भारतीय परिवार की आर्थिक स्थिति और खर्चों का ढांचा अलग था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं
- रियल एस्टेट और हाउसिंग लोन का बोझ बढ़ा है
- प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के लिए पेंशन सुरक्षा सीमित है
- रिटायरमेंट के लिए आत्मनिर्भर बचत की जरूरत पहले से ज्यादा है
इन हालात में ₹1.5 लाख की डिडक्शन लिमिट मध्यम वर्ग के लिए नाकाफी साबित हो रही है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सीमा अब न तो सेविंग्स को बढ़ावा देती है और न ही लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित कर पाती है।
Budget 2026 में 80C लिमिट बढ़ने की कितनी उम्मीद?
बजट 2026 को लेकर यह उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार सेक्शन 80C की लिमिट को बढ़ाकर ₹2.5 लाख या ₹3 लाख तक कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो इससे:
- मध्यम वर्ग की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ेगी
- रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूती मिलेगी
- लॉन्ग-टर्म निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा
टैक्स एक्सपर्ट ‘एस. आर. पटनायक’ के अनुसार, यदि लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को केंद्र में रखकर 80C की लिमिट बढ़ाई जाती है, तो इसका लाभ सभी आय वर्गों को मिलेगा और भविष्य की वित्तीय अनिश्चितताओं से निपटने में मदद मिलेगी।
नए टैक्स सिस्टम में भी मिल सकता है 80C का फायदा
अब तक नया टैक्स सिस्टम कम टैक्स स्लैब्स के बदले डिडक्शंस से दूरी बनाए हुए है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैक्स सिस्टम में भी लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को टैक्स इंसेंटिव देना जरूरी हो गया है।
यदि बजट 2026 में:
- 80C या उसके कुछ हिस्सों को नए टैक्स सिस्टम में शामिल किया जाता है
- या रिटायरमेंट-सेंट्रिक निवेश के लिए अलग छूट दी जाती है
तो इससे नया टैक्स सिस्टम ज्यादा आकर्षक और संतुलित बन सकता है।
कैपिटल गेन्स टैक्स और ब्याज आय पर सुधार की जरूरत
डिडक्शंस के साथ-साथ निवेशकों का एक बड़ा वर्ग कैपिटल गेन्स और ब्याज आय पर टैक्सेशन को लेकर भी असंतुष्ट नजर आता है। मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर कई बार लॉन्ग-टर्म निवेश की भावना को कमजोर करता है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट ‘हरि रहेजा’ का कहना है कि यदि सरकार:
- लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दे
- लंबी अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट्स के लिए विशेष टैक्स ट्रीटमेंट लाए
- डिविडेंड टैक्सेशन सिस्टम को निवेश-अनुकूल बनाए
तो इससे इक्विटी और डेट मार्केट में निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है।
टैक्स-मुक्त डिविडेंड पर फिर से विचार?
एक समय ऐसा भी था जब डिविडेंड आय टैक्स-फ्री हुआ करती थी। बाद में इसे टैक्सेबल बना दिया गया, जिससे रिटेल निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
अब बजट 2026 से पहले यह चर्चा फिर से शुरू हो गई है कि:
- क्या सीमित सीमा तक डिविडेंड को टैक्स-फ्री किया जाए?
- या छोटे निवेशकों के लिए अलग राहत दी जाए?
ऐसे किसी कदम से लॉन्ग-टर्म इक्विटी निवेश को नया प्रोत्साहन मिल सकता है।
गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स: घरेलू बचत को प्रोडक्टिव बनाने की पहल
भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संपत्ति भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में गोल्ड डिपॉजिट स्कीम्स जैसे नए सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
इससे:
- घरों में पड़ा निष्क्रिय सोना अर्थव्यवस्था में आएगा
- गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी
- निवेशकों को सुरक्षित लॉन्ग-टर्म रिटर्न मिलेगा
लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को 80C बास्केट से अलग करने की मांग
एक अहम मुद्दा यह भी है कि सेक्शन 80C के तहत बहुत सारे इंस्ट्रूमेंट्स एक ही लिमिट के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
इनमें शामिल हैं:
- PPF
- NPS
- लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम
- होम लोन प्रिंसिपल
- ELSS म्यूचुअल फंड
टैक्स एक्सपर्ट ‘रितिका नैय्यर’ के अनुसार, इस वजह से टैक्सपेयर्स अक्सर ‘शॉर्ट-टर्म या समय-सीमा वाले निवेश’ को प्राथमिकता देते हैं, जबकि रिटायरमेंट-सेंट्रिक सेविंग्स पीछे रह जाती हैं।
समाधान: रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए अलग सब-लिमिट
विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
- PPF, NPS और लॉन्ग-टर्म सरकारी बॉन्ड्स के लिए अलग टैक्स सब-लिमिट बनाई जाए
- इससे अनुशासित और लक्ष्य-आधारित बचत को बढ़ावा मिलेगा
- साल के अंत में होने वाली जल्दबाजी वाली टैक्स प्लानिंग में कमी आएगी
हाउसिंग और वेल्थ क्रिएशन को मिल सकता है सपोर्ट
इसके अलावा, बजट 2026 में यह भी उम्मीद की जा रही है कि:
- हाउसिंग में री-इनवेस्टमेंट लिमिट्स को उदार बनाया जाए
- कैपिटल गेन्स से घर में निवेश पर अतिरिक्त राहत दी जाए
इससे घरेलू वेल्थ को प्रोडक्टिव एसेट्स में लगाने में मदद मिलेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी।
Budget 2026: टैक्स सुधारों से मध्यम वर्ग और निवेशकों को मिल सकती है बड़ी राहत
कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार लॉन्ग-टर्म सेविंग्स, निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर ठोस और दूरदर्शी कदम उठाएगी।
यदि सेक्शन 80C की डिडक्शन लिमिट बढ़ती है, कैपिटल गेन्स टैक्स में सुधार होता है और नए सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स पेश किए जाते हैं, तो यह बजट मध्यम वर्ग के लिए ऐतिहासिक राहत साबित हो सकता है।
अब देशभर के टैक्सपेयर्स की नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि बजट उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

