देश की राजधानी दिल्ली इस समय दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट ने दिल्ली के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ यमुना में प्रदूषण बढ़ने से शहर के बड़े हिस्से में पानी की सप्लाई ठप्प हो गई है।
दिल्ली जल बोर्ड ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यह जल संकट अगले 10 दिनों तक यानी 4 फरवरी 2026 तक बना रह सकता है। हालात यह हैं कि जिस पानी को जनता प्यास बुझाने के लिए पी रही है, सरकारी रिपोर्ट में वही पानी बीमारी की वजह बताया गया है।
Delhi Water Crisis पर मुख्य बिंदु:
- सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का 55 प्रतिशत ग्राउंड वॉटर पीने योग्य नहीं।
- यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने से 4 फरवरी तक पानी की भारी किल्लत।
- डॉक्टरों ने दूषित पानी पीने से किडनी और लिवर डैमेज होने की दी, चेतावनी।
- ओडिशा का पुरी शहर नल से शुद्ध जल देने में देश का रोल मॉडल बना।
CAG रिपोर्ट का डरावना सच
हाल ही में दिल्ली विधानसभा में पेश की गई CAG की रिपोर्ट ने दिल्लीवासियों की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में ज़मीन के नीचे मौजूद पानी का बड़ा हिस्सा पीने योग्य नहीं है। CAG ने अपनी जांच में कुल 16,234 पानी के नमूनों को शामिल किया था, जिनमें से 8,933 नमूने यानी लगभग 55 प्रतिशत सैंपल लैब टेस्ट में फेल हो गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि दिल्ली की लैब में पानी की जांच के लिए ज़रूरी 43 पैरामीटर्स का पालन ही नहीं किया जा रहा था, बल्कि सिर्फ 12 पैरामीटर्स पर जांच कर खानापूर्ति की जा रही थी। इसका मतलब है कि पानी में मौजूद आर्सेनिक और भारी धातुओं की सही जानकारी लोगों तक पहुँच ही नहीं रही थी।
दिल्ली में 4 फरवरी तक जल संकट
CAG की रिपोर्ट की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि दिल्ली पर अमोनिया का कहर टूट पड़ा है। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया है कि यमुना नदी में हरियाणा की तरफ से आने वाले औद्योगिक कचरे के कारण अमोनिया का स्तर सामान्य से तीन गुना ज़्यादा बढ़कर 3 पीपीएम तक पहुँच गया है।

जल बोर्ड के प्लांट इतना ज़हरीला पानी साफ करने में सक्षम नहीं हैं, जिसके चलते वज़ीराबाद और चंद्रावल ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कम कर दी गई है। साथ ही हरियाणा में मुनक नहर की मरम्मत का काम भी चल रहा है। इन दोनों कारणों से मध्य और उत्तरी दिल्ली के कई इलाकों में 4 फरवरी तक पानी की भारी किल्लत रहने की संभावना है।
क्या पूरा पानी ज़हरीला है?
सोशल मीडिया पर यह अफवाह है कि दिल्ली का हर बूंद पानी ज़हरीला हो गया है, लेकिन हकीकत को सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है। CAG की रिपोर्ट मुख्य रूप से ‘ग्राउंड वॉटर’ यानी बोरिंग के पानी पर आधारित है, जो 55% तक खराब मिला है।
हालांकि, पाइपलाइन से आने वाले पानी में भी कई जगहों पर सीवर का पानी मिक्स होने की शिकायतें मिली हैं। इसलिए यह कहना कि पूरा पानी ज़हरीला है, गलत होगा, लेकिन यह भी सच है कि बिना आरओ या उबाले सीधे नल का पानी पीना इस समय खतरे से खाली नहीं है।
पुरी ने पेश की मिसाल, दिल्ली क्यों पिछड़ी?
जहाँ दिल्ली पानी की बूंद-बूंद और उसकी शुद्धता के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं ओडिशा के पुरी शहर ने देश के सामने एक बेहतरीन मॉडल पेश किया है। पुरी भारत का एकमात्र ऐसा शहर है जहाँ ‘सुजल मिशन’ के तहत 24 घंटे नल से ऐसा पानी आता है जिसे बिना किसी फिल्टर के सीधे पिया जा सकता है।
पुरी के अलावा महाराष्ट्र के ठाणे और नागपुर ने भी पानी की क्वालिटी में दिल्ली को काफी पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली सरकार का दावा है कि वे 2027 तक ऐसी ही सुविधा देंगे, लेकिन मौजूदा रिपोर्ट्स इन दावों की पोल खोलती नज़र आ रही हैं।
स्वास्थ्य पर खतरा और डॉक्टर की सलाह
मैक्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि अमोनिया युक्त और भारी धातुओं वाला पानी शरीर के लिए धीमे ज़हर का काम करता है। ऐसा पानी पीने से तो तुरंत हैज़ा, टाइफाइड और पेट का इन्फेक्शन हो सकता है, लेकिन लंबे समय में यह किडनी और लिवर को परमानेंट डैमेज कर सकता है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब तक सप्लाई सामान्य और साफ नहीं हो जाती, तब तक पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही पिएं। जिन घरों में आरओ लगा है, वे समय पर उसकी सर्विसिंग ज़रूर करवाएं।
FAQs about Delhi Water Crisis
दिल्ली में पानी की सप्लाई कब तक सामान्य होगी?
दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, मुनक नहर की मरम्मत और अमोनिया का स्तर कम होने के बाद 4 फरवरी 2026 तक सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है।
गंदे पानी की शिकायत कहाँ करें?
अगर आपके घर गंदा या बदबूदार पानी आ रहा है, तो आप दिल्ली जल बोर्ड के हेल्पलाइन नंबर 1916 पर कॉल कर सकते हैं।
क्या आरओ अमोनिया को साफ कर देता है?
साधारण आरओ अमोनिया को पूरी तरह नहीं हटा पाता, इसके लिए यूवी और यूएफ तकनीक वाले एडवांस प्यूरीफायर की ज़रूरत होती है।
दिल्ली का पानी खराब होने का मुख्य कारण क्या है?
सीवर लाइनों का लीकेज, यमुना में औद्योगिक कचरा और ग्राउंड वॉटर का अत्यधिक दोहन इसके मुख्य कारण हैं।
क्या पुरी की तरह दिल्ली में नल का पानी पी सकते हैं?
फिलहाल नहीं। CAG की रिपोर्ट को देखते हुए दिल्ली में सीधे नल का पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत जोखिम भरा है।

