वेनेजुएला और अमेरिका के बीच हाल के घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा उथल-पुथल पैदा कर दिया है। अमेरिका द्वारा सैन्य ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी तथा उन्हें अमेरिका ले जाने का दावा, विश्व राजनीति, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डाल रहा है।
अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन और मादुरो की गिरफ्तारी
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अमेरिका ने वेनेजुएला में एक व्यापक सैन्य अभियान चलाया, जिसमें उच्च स्तरीय एयरस्ट्राइक और विशेष फोर्स ऑपरेशन शामिल थे। इसमें निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर नार्को-आतंकवाद और मादक पदार्थों से जुड़ी “गंभीर” आपराधिक अभियोग दर्ज करने की योजना है। अमेरिका ने इस कार्रवाई को “सफल अभियान” बताया और उसे स्थिरता लाने का एक कदम बताया है।
अमेरिका के इस ऑपरेशन के बारे में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह वेनेजुएला में “स्थिरता, स्वतंत्रता और बेहतर भविष्य” लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में निवेश करेंगी और देश के जीर्ण तेल ढांचे को सुधारेंगी।
वेनेजुएला की सरकार और प्रतिक्रिया
वेनेजुएला के सर्वोच्च न्यायालय ने डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे मादुरो को ही वैध राष्ट्रपति मानते हैं और अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। देश में राजनीतिक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं, और नागरिकों तथा स्थानीय नेताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में वेनेजुएला-अमेरिका तनाव को लेकर तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है:
- रूस, चीन और क्यूबा ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और मादुरो की रिहाई की मांग की है।
- यूरोप और लैटिन अमेरिका के कुछ नेताओं ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने सरकार परिवर्तन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वकालत की है।
- कई देश अमेरिका की इस कार्रवाई को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक मान रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की पुकार लगाई जा रही है।
भारत और वैश्विक आर्थिक प्रभाव
भारत ने वेनेजुएला-अमेरिका मामले पर शांति, बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की है, यह कहते हुए कि वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत ने इस स्थिति पर निगरानी बनाए रखने का ऐलान किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला पर अमेरिका के नियंत्रण से वैश्विक तेल बाजार में बदलाव की संभावनाएं हैं, और इससे भारत समेत कई देशों को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। यह संभावना है कि प्रतिबंधों में ढील मिलने से वेनेजुएला से तेल निर्यात बहाल हो सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल बाजार
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक का मालिक है। इसके पास अरबों बैरल कच्चे तेल और भारी मात्रा में सोना मौजूद है। इन संसाधनों पर नियंत्रण के लिए वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष को सिर्फ राजनीतिक या सैन्य मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मामला भी माना जा रहा है।
अमेरिका का दावा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल मादुरो को सत्ता से हटाना है, बल्कि वेनेजुएला को “स्थिर और समृद्ध” बनाना भी है। हालांकि, आलोचक इसे संसाधनों पर नियंत्रण का एक कदम मानते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और राजनैतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
मानवाधिकार और वैश्विक चिंता
वेनेजुएला में ताजा संघर्ष के बीच नागरिक सुरक्षा, मानवाधिकार और क्षेत्रीय शरणार्थी संकट को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। सीमा पार सैकड़ों लोग भागने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे पड़ोसी देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस मुद्दे को लेकर अमेरिका और वेनेजुएला दोनों पर निगरानी रखने का आह्वान कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र और कुछ यूरोपीय देशों ने कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों के अनुरूप होना चाहिए और असमर्थित हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
आगे का रास्ता
वेनेजुएला-अमेरिका के संबंधों में यह सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह वेनेजुएला पर नियंत्रण बनाए रखने के इरादे से तैयार है, जबकि वैश्विक समुदाय में संतुलन और शांतिपूर्ण समाधान की मांग जोर पकड़ रही है। भविष्य में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस संघर्ष का राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर क्या दिग्गज परिणाम निकलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय कानून, नागरिक स्वतंत्रता और संसाधन नियंत्रण के इस विवाद में अगले हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठकों, अमेरिका की आगे की रणनीतिक घोषणाओं और लैटिन अमेरिकी देशों की प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान रहेगा।

