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Home » उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया गया

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उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया गया

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Last updated: February 2, 2025 11:46 am
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उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू से जुड़ी मुख्य जानकारी
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करीब 80 वर्षों से चल रहे इस मुद्दे ने अब निर्णायक मोड़ लिया है। उत्तराखंड अब पहला राज्य बन गया है, जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हो गया है। इसको लागू करने के लिए 27 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी, जिसने 60,000 से ज्यादा लोगों से बातचीत और 2.5 लाख से ज़्यादा फीडबैक के बाद एक रिपोर्ट तैयार की। 2 फरवरी 2024 को यह रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को सौंप दी गई, और इसके आधार पर विधेयक पास किया गया। अंततः, 20 जनवरी 2025 को उत्तराखंड कैबिनेट ने इसे पास किया और 27 जनवरी से इसे लागू कर दिया।

Contents
  • उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू से जुड़ी मुख्य जानकारी
  • यूसीसी क्या है?
  • उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने से जुड़े मुख्य बदलाव
  • उत्तराखंड भारत का पहला राज्य जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया 
  • यूसीसी के तहत क्या क्या नियमों में बदलाव किए
  • लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना भी अनिवार्य होगा: 
  • यूसीसी के तहत सशस्त्र बलों के लिए विशेष व्यवस्था
  • विवाह का पंजीकरण 6 माह के भीतर करना अनिवार्य होगा: 
  • FAQs about UCC in Uttarakhand 

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू से जुड़ी मुख्य जानकारी

  • 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है, जहाँ यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो गया है।
  • UCC लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और विरासत के नियम सभी धर्मों और समुदायों के लिए समान होंगे।
  • विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • विवाह पंजीकरण न होने पर 25,000 रुपये जुर्माना।
  • विवाह और लिव-इन पंजीकरण के लिए डिजिटल पोर्टल उपलब्ध है।
  • बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र 7 दिनों के भीतर अपलोड करना होगा।
  • एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी को मंजूरी नहीं होगी।
  • उत्तराधिकार में लड़कों और लड़कियों को समान अधिकार मिलेगा।
  • ट्रांसजेंडर, पूजा-पद्धतियों और परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यूसीसी क्या है?

यूसीसी (Uniform Civil Code) का मतलब है कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, लिंग के हों। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे, लिव-इन रिलेशनशिप और अन्य व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान कानून लागू करना है।

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने से जुड़े मुख्य बदलाव

  • लड़कियों की शादी की उम्र समान होगी।
  • सभी धर्मों में बच्चों को गोद लेने का अधिकार मिलेगा।
  • हलाला और बहुविवाह पर पाबंदी।
  • उत्तराधिकार में लड़कियों को बराबरी का अधिकार।
  • लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

उत्तराखंड भारत का पहला राज्य जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया 

भारत के गोवा राज्य के बाद अब उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है, जहां पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया गया है। (भारतीय संविधान में गोवा को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है। साथ ही संसद ने कानून बनाकर गोवा को पुर्तगाली सिविल कोड लागू करने का अधिकार दिया था। इसलिए गोवा में यूसीसी उत्तराखंड से भी पहले से लागू है।

■ Also Read: उत्तराखंड में सामने आई कोलकाता जैसी हैवानियत: नर्स का दुष्कर्म कर गला दबाकर हत्या

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के यूसीसी नियमावली और पोर्टल को लॉन्च करने के बाद अब उत्तराखंड राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रभावी हो गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद अब धर्म, जातियों पर एक कानून लागू हो गया है, ऐसे में यूसीसी नियमावली में दिए गए प्रावधान के मुताबिक विवाह रजिस्ट्रेशन, तलाक पंजीकरण, वसीयत, समेत तमाम प्रक्रियाएं यूसीसी कानून के तहत होंगी ।

यूसीसी के तहत क्या क्या नियमों में बदलाव किए

लड़कियों की शादी की उम्र चाहे वह किसी भी जाति-धर्म की हो, एक समान होगी। सभी धर्मों में बच्चों को गोद लेने का अधिकार मिलेगा। हालांकि, दूसरे धर्म के बच्चे को गोद नहीं लिया जा सकेगा। यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में हलाला जैसी प्रथा पर पाबंदी लग गई। बहुविवाह को स्वीकार नहीं किया जाएगा ।उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर की हिस्सेदारी मानी जाएगी।

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना भी अनिवार्य होगा: 

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना भी जोड़ों के लिए अनिवार्य हो गया है। इस दौरान पैदा होने वाले बच्चे को भी शादीशुदा जोड़े के बच्चे की तरह अधिकार मिलेगा। यूसीसी के नियम-कानून से अनुसूचित जनजाति को बाहर रखा गया है। 

यूसीसी के तहत सशस्त्र बलों के लिए विशेष व्यवस्था

यूसीसी में सशस्त्र बलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत यदि कोई सैनिक, वायुसैनिक या नौसैनिक विशेष अभियान में है, तो वह विशेषाधिकार वाली वसीयत कर सकता है। वह अपने हाथ से कोई वसीयत लिखता है और उसमें उसके हस्ताक्षर या फिर साक्ष्य (अटेस्टेड) नहीं है, तो भी वह मान्य होगी। शर्त यह है कि इसकी पुष्टि होनी ज़रूरी है कि वह हस्तलेख सैनिक का ही है।

विवाह का पंजीकरण 6 माह के भीतर करना अनिवार्य होगा: 

यूसीसी में विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके लिए कट ऑफ डेट 27 मार्च 2010 रखी गई है। यानी इस दिन से हुए सभी विवाह पंजीकृत कराने होंगे। इसके लिए विवाह का पंजीकरण छह माह के भीतर करना अनिवार्य होगा। विवाह का पंजीकरण करने के लिए किए गए आवेदन पर कानूनी स्वीकृति न मिलने पर विवाह का आवेदन अस्वीकृत माना जाएगा।

FAQs about UCC in Uttarakhand 

यूसीसी का नया कानून क्या है?

उत्तर: यह कानून पूरे देश में सभी नागरिकों के लिए समान होगा, जिससे धर्म, जाति या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। इसके तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेगा।

उत्तराखंड में यूसीसी कब लागू हुआ?

उत्तर: उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुआ है।

उत्तराखंड में यूसीसी बिल क्या है?

उत्तर: यह एक कानूनी ढांचा है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना है, जो विवाह, तलाक, गोद लेने, विरासत और अन्य व्यक्तिगत मामलों से संबंधित है।

यूसीसी कितने देशों में लागू है?

उत्तर: यूसीसी कई देशों में लागू है, जैसे कि अमेरिका, आयरलैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान, मिस्र आदि।

भारत का सर्वोच्च कानून कौन सा है?

उत्तर: भारत का सर्वोच्च कानून भारतीय संविधान है।

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