नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ती Gig Economy से जुड़े करोड़ों वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। स्विगी, ज़ोमेटो, ब्लिंकिट, ऊबर, ओला जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर्स को अब बीमा, स्वास्थ्य और अन्य सोशल सिक्योरिटी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड के अंतर्गत गिग वर्कर्स के लिए ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य इन वर्कर्स को संगठित क्षेत्र जैसी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।
- यह पहल वर्ष 2026 में गिग वर्कर्स की स्थिति को पूरी तरह बदलने वाली मानी जा रही है
- अब गिग वर्कर्स भी होंगे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
- 16 साल से अधिक उम्र के हर गिग वर्कर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
- सामाजिक सुरक्षा के लिए न्यूनतम काम की शर्त
- कंपनियों पर भी तय हुई जिम्मेदारी
- गिग वर्कर्स को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
- कौन होंगे पात्र और कौन नहीं?
- निगरानी के लिए बनेगा राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
- 2026 में गिग वर्कर्स की जिंदगी बदलने वाला कदम
यह पहल वर्ष 2026 में गिग वर्कर्स की स्थिति को पूरी तरह बदलने वाली मानी जा रही है
- गिग वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी: डिलीवरी बॉय और ड्राइवर्स अब होंगे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
- Social Security Code 2026: गिग वर्कर्स को मिलेगा UAN जैसा यूनिक नंबर, ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी
- Swiggy-Zomato गिग वर्कर्स के लिए बड़ा नियम: Social Security पाने की न्यूनतम कार्य-दिवस शर्त
- Social Security Code के तहत कंपनियों पर सख्ती, Gig Workers का पूरा रिकॉर्ड देना होगा
- गिग वर्कर्स के लिए बड़ी सौगात: हेल्थ-लाइफ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और पेंशन का लाभ
- Gig Workers Eligibility Rules: 60 साल की उम्र के बाद नहीं मिलेगा लाभ, जानें कौन पात्र और कौन नहीं
- Gig Workers की निगरानी के लिए बनेगा राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड, सरकार की बड़ी तैयारी
- Social Security Code 2026: Gig Workers को मिलेगी सुरक्षा, सम्मान और स्थिर भविष्य
अब गिग वर्कर्स भी होंगे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
अब तक गिग वर्कर्स को असंगठित क्षेत्र का हिस्सा माना जाता था, जहां न तो नौकरी की स्थिरता थी और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा। लेकिन नए ड्राफ्ट नियमों के लागू होने के बाद डिलीवरी पार्टनर्स, राइडर्स और ड्राइवर्स को भी सरकारी व निजी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले वर्कर्स भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें सम्मानजनक सुरक्षा मिलना जरूरी है।
16 साल से अधिक उम्र के हर गिग वर्कर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार:
- 16 वर्ष से अधिक आयु के हर गिग वर्कर को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा
- यह रजिस्ट्रेशन आधार कार्ड से लिंक रहेगा
- वर्कर्स का पूरा डेटा ई-श्रम पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा
जिस तरह PF कर्मचारियों को UAN (Universal Account Number) मिलता है, उसी तरह गिग वर्कर्स को भी एक यूनिक और स्थायी पहचान संख्या दी जाएगी। इसके साथ ही हर रजिस्टर्ड वर्कर को एक डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जो पूरे देश में उसकी पात्रता का प्रमाण होगा।
सामाजिक सुरक्षा के लिए न्यूनतम काम की शर्त
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने के लिए वर्कर्स को न्यूनतम कार्य दिवस पूरे करने होंगे।
- यदि कोई गिग वर्कर एक ही प्लेटफॉर्म से जुड़ा है, तो उसे साल में “कम से कम 90 दिन” काम करना होगा
- यदि कोई वर्कर ‘एक से अधिक प्लेटफॉर्म्स’ (जैसे Swiggy + Zomato) पर काम करता है, तो यह सीमा 120 दिन होगी
खास बात:
अगर कोई वर्कर एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करता है, तो उसे तीन कार्य दिवस गिने जाएंगे। इससे मल्टी-प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए पात्रता पूरी करना आसान हो जाएगा।
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कंपनियों पर भी तय हुई जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत सिर्फ वर्कर्स ही नहीं, बल्कि एग्रीगेटर कंपनियों पर भी जिम्मेदारी डाली गई है।
- Swiggy, Zomato, Uber, Ola जैसी कंपनियों को अपने साथ जुड़े हर वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना होगा
- इसमें थर्ड-पार्टी एजेंसी के जरिए काम करने वाले वर्कर्स भी शामिल होंगे
- इससे गिग इकोनॉमी को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।
गिग वर्कर्स को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
ड्राफ्ट नियमों के तहत गिग वर्कर्स को निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलने का प्रस्ताव है:
- स्वास्थ्य और जीवन बीमा
गिग वर्कर्स को मुफ्त या रियायती दरों पर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा।
- दुर्घटना बीमा
काम के दौरान होने वाली किसी भी दुर्घटना के लिए ‘पर्सनल एक्सीडेंट कवर’ मिलेगा।
- आयुष्मान भारत योजना से जुड़ाव
श्रम मंत्रालय गिग वर्कर्स को “आयुष्मान भारत योजना” से जोड़ने की तैयारी कर रहा है, जिससे उन्हें ‘5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज’ मिल सकेगा।
- पेंशन की सुविधा
भविष्य में सरकार ऐसी योजना ला सकती है, जिसमें वर्कर और कंपनी दोनों योगदान देंगे और रिटायरमेंट के बाद वर्कर को नियमित पेंशन मिलेगी।
कौन होंगे पात्र और कौन नहीं?
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक:
- जैसे ही कोई गिग वर्कर 60 वर्ष की आयु पूरी करेगा, वह इन योजनाओं के लिए अयोग्य हो जाएगा
- हर वित्तीय वर्ष में न्यूनतम कार्य दिवस पूरे करना अनिवार्य होगा
- यदि किसी साल यह शर्त पूरी नहीं होती, तो अगले साल लाभ नहीं मिलेगा
निगरानी के लिए बनेगा राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड
इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने की तैयारी कर रही है।
इस बोर्ड में शामिल होंगे:
- केंद्र सरकार के प्रतिनिधि
- श्रमिक संगठनों के सदस्य
- एग्रीगेटर कंपनियों के प्रतिनिधि
बोर्ड का काम न केवल नीतियों की निगरानी करना होगा, बल्कि गिग वर्कर्स की वास्तविक संख्या का आकलन कर नई कल्याणकारी योजनाएं सुझाना भी होगा।
2026 में गिग वर्कर्स की जिंदगी बदलने वाला कदम
कुल मिलाकर, सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत लाए गए ये ड्राफ्ट नियम भारत की गिग इकोनॉमी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। यदि ये नियम जल्द लागू होते हैं, तो डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर्स की जिंदगी में स्थिरता, सुरक्षा और सम्मान का नया अध्याय शुरू होगा।
यह पहल न सिर्फ गिग वर्कर्स के भविष्य को सुरक्षित करेगी, बल्कि डिजिटल भारत की अर्थव्यवस्था को भी और मजबूत बनाएगी।

