जनवरी 2026 की शुरुआत में, यूरोपीय संघ (EU) की डिजिटल अर्थव्यवस्था के केंद्र आयरलैंड से एक ऐसी खबर आई जिसने इंटरनेट की दुनिया में हलचल मचा दी है। आयरलैंड सरकार ने सोशल मीडिया पर उम्र के सत्यापन (Age Verification) के लिए एक सरकारी ‘डिजिटल वॉलेट’ को अनिवार्य करने का संकेत दिया है। संचार मंत्री पैट्रिक ओ’डोनोवन द्वारा की गई यह घोषणा केवल एक सामान्य नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अब इंटरनेट के नियमन का नियंत्रण कॉर्पोरेट कंपनियों से हटकर सरकारों की ओर स्थानांतरित होता दिखाई दे रहा है।
- नियामक ढांचा: सुरक्षा बनाम निगरानी
- सार्वजनिक स्वास्थ्य का तर्क
- पहचान की वास्तुकला: MyGovID और डिजिटल वॉलेट
- तकनीकी मानक और गोपनीयता का वादा
- कानूनी बाधाएं: डेटा सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार
- यूरोपीय संघ (EU) और वैश्विक मानक
- उद्योग पर प्रभाव और राजनीतिक समीकरण
- भविष्य के परिदृश्य: सफलता या विफलता?
- अनामिकता और निगरानी
- अव्यक्त ब्रह्म और अनामी पुरुष
- FAQs:
आयरलैंड एक “संप्रभु सत्यापन” (Sovereign Verification) मॉडल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने के लिए यूजर्स को सरकार द्वारा जारी एक डिजिटल आईडी (MyGovID) का उपयोग करना होगा। सरकार ने इसे केवल एक नियम नहीं, बल्कि एक गंभीर “सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या” के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका तर्क है कि बिना रोक-टोक के सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों के लिए उतना ही खतरनाक है, जितना कि शराब या तंबाकू का सेवन।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई 2026 में आयरलैंड यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालने वाला है। चूँकि अधिकांश अमेरिकी टेक कंपनियों (जैसे फेसबुक, गूगल) के यूरोपीय मुख्यालय आयरलैंड में हैं, इसलिए आयरलैंड जो भी फैसला लेगा, उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ेगा। हालांकि, इस योजना के सामने कई कानूनी चुनौतियां भी खड़ी हैं, विशेष रूप से डेटा की गोपनीयता और बायोमेट्रिक जानकारी को लेकर।
नियामक ढांचा: सुरक्षा बनाम निगरानी
इस डिजिटल वॉलेट की आवश्यकता को समझने के लिए हमें आयरलैंड के मौजूदा कानूनों को समझना होगा। ‘ऑनलाइन सेफ्टी एंड मीडिया रेगुलेशन एक्ट 2022’ ने वहां की व्यवस्था को बदल दिया है। इसने ‘Coimisiún na Meán’ (कमीशन) नामक एक नियामक संस्था को शक्ति दी है कि वह वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा कोड बनाए।
‘आश्वासन’ (Assurance) और ‘सत्यापन’ (Verification) का अंतर
वर्तमान में, नियमों के अनुसार प्लेटफॉर्म्स को “प्रभावी आयु आश्वासन” (Age Assurance) करना होता है। इसमें दो तरीके होते हैं:
- आयु सत्यापन (Age Verification): इसमें पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे ठोस सबूतों से उम्र का पता लगाया जाता है।
- आयु अनुमान (Age Estimation): इसमें चेहरे की स्कैनिंग (सेल्फी) या व्यवहार के आधार पर अनुमान लगाया जाता है कि यूजर 18 साल से ऊपर है या नहीं।
सरकार अब ‘अनुमान’ वाले लचीलेपन को खत्म करके ‘सत्यापन’ यानी ठोस सरकारी आईडी की ओर बढ़ना चाहती है। सरकार का मानना है कि ‘अनुमान’ लगाने वाले तरीके कमजोर हैं और इससे बच्चे हानिकारक सामग्री तक पहुंच जाते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य का तर्क
मंत्री ओ’डोनोवन ने एक बहुत ही सरल लेकिन कठोर तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि “हम बच्चों को बार में बैठकर शराब पीने की अनुमति नहीं देते,” तो हम उन्हें इंटरनेट पर हानिकारक सामग्री देखने की अनुमति कैसे दे सकते हैं? सरकार इस मुद्दे को ‘मीडिया विनियमन’ से हटाकर ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ के रूप में पेश कर रही है। ऐसा करने का एक कानूनी कारण भी है। यूरोप के कड़े डेटा कानून (GDPR) के तहत, बायोमेट्रिक डेटा (चेहरे की पहचान) का उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब “व्यापक सार्वजनिक हित” का मामला हो। सरकार इसी आधार पर अपनी नीति को सही ठहराने की तैयारी कर रही है।
पहचान की वास्तुकला: MyGovID और डिजिटल वॉलेट
सरकार का प्रस्तावित समाधान कोई नया ऐप नहीं है, बल्कि यह आयरलैंड के मौजूदा सरकारी सिस्टम ‘MyGovID’ का विस्तार है।
यह कैसे काम करेगा?
MyGovID सरकार की एक सिंगल साइन-ऑन (SSO) सेवा है, जिसका उपयोग नागरिक टैक्स भरने या लाइसेंस बनवाने के लिए करते हैं। इसके लिए ‘पब्लिक सर्विसेज कार्ड’ (PSC) की जरूरत होती है, जिसे बनवाने के लिए चेहरे की स्कैनिंग और बायोमेट्रिक्स देने पड़ते हैं।
जब कोई यूजर सोशल मीडिया अकाउंट बनाएगा, तो ऐप (जैसे इंस्टाग्राम) उसके डिजिटल वॉलेट से संपर्क करेगा। वॉलेट यूजर के फोन (फेस आईडी या फिंगरप्रिंट) से उसकी पहचान की पुष्टि करेगा और प्लेटफॉर्म को एक “टोकन” भेजेगा। यह टोकन सिर्फ यह बताएगा कि “यह यूजर 18 वर्ष से ऊपर है”।
तकनीकी मानक और गोपनीयता का वादा
सरकार का दावा है कि यह सिस्टम “डबल ब्लाइंड” (Double Blind) तकनीक पर आधारित होगा। इसका मतलब है:
- सरकार को यह पता नहीं चलेगा कि यूजर कौन सा ऐप (जैसे टिकटॉक) चला रहा है।
- सोशल मीडिया कंपनी को यह पता नहीं चलेगा कि यूजर की असली पहचान (नाम, पता) क्या है।
हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञ इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि जब सरकारी डेटाबेस और सोशल मीडिया के डेटाबेस एक-दूसरे से जुड़ेंगे, तो “मेटाडेटा” (Metadata) लीक हो सकता है। इससे हर वेब पेज विजिट को किसी विशिष्ट व्यक्ति से जोड़ा जा सकता है, जो गोपनीयता के लिए एक बड़ा खतरा है।
कानूनी बाधाएं: डेटा सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार
इस योजना के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट तकनीकी नहीं, बल्कि कानूनी है। जिस आधार (PSC) पर यह वॉलेट बनाया जा रहा है, वह पहले ही विवादों में है।
डेटाबेस की अवैधता
जून 2025 में, आयरलैंड के डेटा संरक्षण आयोग (DPC) ने सरकार पर भारी जुर्माना लगाया था। आयोग ने पाया कि ‘पब्लिक सर्विसेज कार्ड’ (PSC) के लिए बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा करना गैर-कानूनी था। सरकार ने इसके लिए कोई ठोस कानून नहीं बनाया था। यदि मूल डेटाबेस ही अवैध है, तो उसके आधार पर बना डिजिटल वॉलेट भी कानूनी रूप से गलत माना जाएगा।
अनामिकता (Anonymity) का अंत
डिजिटल राइट्स आयरलैंड (DRI) का तर्क है कि सोशल मीडिया के लिए सरकारी आईडी अनिवार्य करने से ऑनलाइन “अनामिकता” का अधिकार खत्म हो जाएगा। इसका सीधा असर व्हिसलब्लोअर्स (गड़बड़ी उजागर करने वाले), सामाजिक कार्यकर्ताओं और घरेलू हिंसा के शिकार लोगों पर पड़ेगा। अगर उन्हें पता होगा कि सरकार उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक कर सकती है, तो वे मदद मांगने या अपनी बात कहने से डरेंगे। इसे “चिलिंग इफेक्ट” (Chilling Effect) कहा जाता है।
यूरोपीय संघ (EU) और वैश्विक मानक
आयरलैंड का यह कदम सिर्फ उसके अपने देश तक सीमित नहीं है। यह यूरोपीय संघ की व्यापक रणनीति, विशेष रूप से eIDAS 2.0 विनियमन से जुड़ा है।
यूरोपीय डिजिटल पहचान (EUDI) वॉलेट
यूरोपीय संघ चाहता है कि हर नागरिक के पास एक डिजिटल आईडी वॉलेट हो। नए नियमों के अनुसार, फेसबुक और गूगल जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को इस EUDI वॉलेट को स्वीकार करना होगा। आयरलैंड इस मौके का फायदा उठा रहा है। वह अपने वॉलेट को यूरोप के लिए एक “प्रोटोटाइप” (नमूना) के रूप में पेश करना चाहता है।
स्वेच्छा बनाम बाध्यता
यूरोपीय कानून कहता है कि डिजिटल आईडी का उपयोग नागरिक की “स्वेच्छा” (Voluntary) पर होना चाहिए। लेकिन आलोचकों का कहना है कि अगर सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए आईडी अनिवार्य कर दी गई, तो यह “स्वेच्छा” नहीं बल्कि “जबरदस्ती” होगी। नागरिक के पास केवल दो ही विकल्प होंगे: या तो अपनी आईडी दें या डिजिटल दुनिया से बाहर हो जाएं। यह मुद्दा भविष्य में यूरोपीय न्यायालय में चुनौती का कारण बन सकता है।
उद्योग पर प्रभाव और राजनीतिक समीकरण
टेक कंपनियों (Video-Sharing Platform Services) के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। उन्हें अपने सिस्टम को पूरी तरह बदलना होगा ताकि वे सरकारी वॉलेट के साथ काम कर सकें।
कंपनियों के लिए दोधारी तलवार
एक तरफ, इस प्रक्रिया से यूजर की संख्या घट सकती है। कोई भी नया यूजर आईडी स्कैन करने की लंबी प्रक्रिया (“घर्षण” या Friction) से गुजरना नहीं चाहेगा। इससे इंस्टाग्राम या टिकटॉक के नए रजिस्ट्रेशन में गिरावट आ सकती है।
दूसरी तरफ, यह कंपनियों के लिए फायदेमंद भी हो सकता है। वर्तमान में, अगर कोई बच्चा हानिकारक कंटेंट देखता है, तो कंपनी जिम्मेदार होती है। लेकिन अगर सरकार उम्र का सत्यापन करती है, तो जिम्मेदारी सरकार पर आ जाएगी। इसे “सेफ हार्बर” (Safe Harbor) कहा जाता है। टेक कंपनियां कानूनी जोखिम से बचने के लिए इस सरकारी दखल का स्वागत कर सकती हैं।
विज्ञापन का नया बाजार
गोपनीयता की वकालत करने वालों का डर है कि इससे विज्ञापन और सटीक हो जाएंगे। अगर विज्ञापनदाताओं को पता होगा कि यूजर “100% सत्यापित वयस्क” है, तो शराब, जुआ और फाइनेंस के विज्ञापन अधिक प्रभावी ढंग से दिखाए जा सकेंगे। इससे यूजर्स की गोपनीयता की कीमत पर कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है।
भविष्य के परिदृश्य: सफलता या विफलता?
जैसे-जैसे 2026 आगे बढ़ रहा है, इस योजना के भविष्य को लेकर तीन संभावनाएं दिखाई देती हैं:
- परिदृश्य A: यूरोपीय मानक (सफलता): यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है और सरकार कानूनी अड़चनों को दूर कर लेती है, तो यह मॉडल पूरे यूरोप में लागू हो जाएगा। इंटरनेट एक “गेटेड कम्युनिटी” (बंद कॉलोनी) बन जाएगा जहां पहचान के बिना प्रवेश संभव नहीं होगा।
- परिदृश्य B: कानूनी दलदल (स्थिरता): नागरिक अधिकार संगठन इसे कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। यदि कोर्ट इस पर रोक लगा देता है, तो प्रोजेक्ट अनिश्चित काल के लिए लटक जाएगा और प्लेटफॉर्म्स को पुराने तरीकों (सेल्फी या अनुमान) पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
- परिदृश्य C: ‘स्प्लिंटरनेट’ (विफलता): यह सबसे खतरनाक स्थिति हो सकती है। टेक-सैवी (तकनीक में माहिर) युवा VPN का उपयोग करके उन साइटों पर चले जाएंगे जो आयरलैंड के कानून को नहीं मानतीं। इससे “डार्क इंटरनेट” का उदय होगा, जहां न तो कोई सुरक्षा होगी और न ही कोई नियम। सरकार के पास एक महंगा सिस्टम रह जाएगा जो केवल ईमानदार वयस्कों की जांच करेगा, जबकि बच्चे असुरक्षित प्लेटफार्मों पर चले जाएंगे।
अनामिकता और निगरानी
आयरलैंड का डिजिटल वॉलेट प्रयोग उदार लोकतांत्रिक इंटरनेट के लिए एक निर्णायक परीक्षा है। यह “वाइल्ड वेस्ट” (अनियंत्रित इंटरनेट) और “सर्विलांस स्टेट” (निगरानी राज्य) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, इस परियोजना की नींव कमजोर है। ‘पब्लिक सर्विसेज कार्ड’ की अवैधता और सरकारी पहचान पत्र के साथ सोशल मीडिया को जोड़ने के खतरे एक विस्फोटक मिश्रण तैयार करते हैं। जबकि बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने का उद्देश्य बिल्कुल सही है, लेकिन इसके लिए चुना गया रास्ता डिजिटल दुनिया के लिए एक राष्ट्रीय चेकपोस्ट बनाना यूरोप में इंटरनेट की प्रकृति को हमेशा के लिए बदल सकता है। 2026 में आयरलैंड एक प्रयोगशाला की तरह काम करेगा, जहां लाखों लोगों की गोपनीयता और अगली पीढ़ी की सुरक्षा दांव पर लगी होगी।
अव्यक्त ब्रह्म और अनामी पुरुष
इंटरनेट पर अपनी गोपनीयता तो सबको पसंद है, पर क्या आप उस ब्रह्म को जानते हैं जो हम सबसे छिपा हुआ है?
आप सभी पाठकों ने भगवद् गीता का नाम और उसमें बताए गए ज्ञान को कहीं न कहीं सुना या देखा होगा। परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि गीता में छिपे गूढ़ रहस्य क्या हैं? उनमें से एक यह श्लोक है—
गीता अध्याय संख्या 7, श्लोक संख्या 25:
नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः।
मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्॥25॥
इस श्लोक में गीता का ज्ञान देने वाले ब्रह्म स्वयं कह रहे हैं कि वे अपनी योगमाया से छिपे रहते हैं।
और जब अर्जुन ने उस ब्रह्म का सहस्त्रबाहु रूप देखा, तो उन्होंने भयभीत होकर प्रार्थना की कि आप अपना चतुर्भुज रूप दिखाइए, क्योंकि इस रूप में आप सभी लोकों और आत्माओं को खा रहे हैं।
वे कोई और नहीं, स्वयं ब्रह्म-काल थे, जिन्हें परम अक्षर ब्रह्म कविर्देव जी ने श्राप दिया था कि वे प्रतिदिन एक लाख मनुष्यों को खाएँगे और एक लाख पंद्रह हजार मनुष्य उत्पन्न करेंगे। आज सभी धर्मों के अनुयायी इन्हीं ब्रह्म की पूजा, अर्चना और साधना कर रहे हैं।
अपितु वेद, गीता और अन्य सभी धर्मग्रंथ हमें उस पूर्ण परमेश्वर की भक्ति करने का संकेत करते हैं, जो सतलोक में निवास करता है।
और जी हाँ, वही पूर्ण परमेश्वर स्वयं साहेब कबीर हैं, जो लगभग 600 वर्ष पूर्व इस धरती पर संत कबीर के नाम से प्रकट हुए थे।
वे ही सर्व रचयिता अनामी पुरुष हैं, जिन्होंने सब कुछ बनाया है।
इन तथ्यों का प्रमाण जानने के लिए पढ़िए ज्ञान गंगा या विजिट कीजिए jagatgururampalji.org
FAQs:
१) आयरलैंड का नया डिजिटल वॉलेट प्रस्ताव क्या है?
उत्तर:- आयरलैंड सरकार इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया एप्स का उपयोग करने के लिए उम्र का सत्यापन (Age Verification) अनिवार्य कर रही है, जो सरकार द्वारा जारी ‘डिजिटल आईडी’ के माध्यम से होगा।
२) यह डिजिटल वॉलेट सोशल मीडिया पर काम कैसे करेगा?
उत्तर:- जब आप अकाउंट बनाएंगे, तो वॉलेट आपके फोन के बायोमेट्रिक्स से आपकी पहचान की पुष्टि करेगा और ऐप को केवल एक ‘टोकन’ भेजेगा कि आप 18 वर्ष से ऊपर हैं, बिना आपका नाम बताए।
३) सरकार इसे ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य’ का मुद्दा क्यों मान रही है?
उत्तर:- सरकार का तर्क है कि बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाना उतना ही जरूरी है जितना उन्हें शराब या तंबाकू से दूर रखना, इसलिए कड़े सरकारी नियमों की जरूरत है।
४) क्या इस नए नियम से यूजर की गोपनीयता (Privacy) खतरे में है?
उत्तर:- हां, विशेषज्ञों को डर है कि सरकारी डेटाबेस और सोशल मीडिया के जुड़ने से यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता है, जिससे इंटरनेट पर अनामिकता (Anonymity) खत्म हो सकती है।
५) अगर यह नियम लागू हुआ तो टेक कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर :- फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों को अपना सिस्टम बदलना होगा। हालांकि, इससे उन पर कानूनी जिम्मेदारी कम हो सकती है क्योंकि उम्र की जांच की जिम्मेदारी सरकार के पास चली जाएगी।

