बलूच नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में चीन की प्रत्यक्ष सैन्य मौजूदगी देखने को मिल सकती है। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने को लेकर भारत की सराहना भी की और इसे आतंकवाद के विरुद्ध मजबूत संदेश बताया।
- बलूचिस्तान में चीन की सेना तैनाती की आशंका, मीर यार बलूच ने जयशंकर को लिखा पत्र।
- बलूच नेता मीर यार का बड़ा आरोप, पाकिस्तान और चीन गठजोड़ पर चेतावनी।
- पाक-चीन साझेदारी को लेकर बलूचिस्तान में गंभीर चिंता, सुरक्षा को खतरा।
- बड़े संकट का मंडराया खतरा, बलूच नेता ने भारत को चेताया।
बलूचिस्तान में चीन की सेना तैनाती की आशंका, बलोच नेता ने जयशंकर को लिखा पत्र
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चीन की संभावित सैन्य मौजूदगी को लेकर चिंताएं तेजी से बढ़ गई हैं। बलोचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने इस गंभीर मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर आगाह किया है।
पत्र में उन्होंने चीन-पाकिस्तान के बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को गंभीर खतरा बताते हुए दावा किया कि आने वाले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत पूरी तरह तैनात कर सकता है और स्थानीय सुरक्षा तथा क्षेत्रीय संतुलन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
बलूच नेता मीर यार का बड़ा आरोप
मीर यार बलूच ने बीते गुरुवार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संबोधित एक खुला पत्र साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान लंबे समय से बलूचिस्तान का शोषण करता आ रहा है। मीर यार के अनुसार, बलूच जनता पिछले 79 वर्षों से कथित सरकारी दमन, प्रायोजित हिंसा और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रही है। उन्होंने लिखा कि अब इस स्थिति को जड़ से खत्म करने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके और संप्रभुता मजबूत बने।
उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि स्थानीय नागरिकों की आवाज़ दबाई जा रही है, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित की जा रही है, और बाहरी प्रभावों के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। मीर यार ने यह स्पष्ट किया कि अब बलूचिस्तान में वास्तविक बदलाव और सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
पाक-चीन साझेदारी पर गंभीर आशंका
अपने पत्र में मीर यार बलूच ने कहा कि चीन और पाकिस्तान तेजी से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के अंतिम चरण की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने आगाह किया कि बलूचिस्तान, इस बढ़ते पाक-चीन गठबंधन को अत्यंत चिंताजनक मानता है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने मिलकर CPEC परियोजना को निर्णायक मुकाम तक पहुंचा दिया है, जिसका क्षेत्रीय संतुलन और स्थानीय हालात पर गहरा असर पड़ सकता है।
मीर यार ने स्पष्ट किया कि यह बढ़ता गठबंधन न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय राजनीति, आर्थिक नियंत्रण और सैन्य दबाव पर इसका गंभीर प्रभाव होगा, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बड़े संकट का मंडराया खतरा
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में चीन की प्रत्यक्ष सैन्य मौजूदगी देखने को मिल सकती है। मीर यार बलूच के अनुसार, यदि बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता बलों की ताकत को और सशक्त नहीं किया गया और हालात को इसी तरह अनदेखा किया जाता रहा, तो कुछ ही महीनों में चीन यहां अपनी सैन्य टुकड़ियां तैनात कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि 60 मिलियन बलूच नागरिकों की सहमति के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी, भारत और बलूचिस्तान – दोनों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा और बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

