महाराष्ट्र में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) सहित 29 नगर महापालिकाओं के चुनाव संपन्न हो गए हैं। इन चुनावों के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति की दिशा और दशा को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
- Maharashtra Municipal Election 2026: मुख्य बिंदु
- 29 नगर महापालिका चुनाव: एक नजर में
- मतदान प्रतिशत: शहरी मतदाता की परीक्षा
- बीएमसी चुनाव 2026: इतिहास में पहली बार नया सत्ता समीकरण
- बीएमसी चुनाव के प्रमुख बिंदु
- कैसा रहा अन्य प्रमुख नगर निगमों का हाल?
- महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव रिजल्ट 2026: 29 में 25 निगमों में बीजेपी की बढ़त
- विपक्ष को क्यों लगा झटका?
- राजनीतिक दृष्टिकोण से क्यों इतना महत्वपूर्ण हैं ये चुनाव?
- जनता ने किन मुद्दों पर दिया वोट?
- विपक्ष की प्रतिक्रिया और आरोप
- शहरी महाराष्ट्र का जनादेश: 29 नगर निगम चुनावों में महायुति की बढ़त ने बदली सियासी तस्वीर
राजनीतिक जानकार इन चुनावों को केवल स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों का सेमीफाइनल मान रहे हैं।
बीएमसी, पुणे, नागपुर, ठाणे, नाशिक, पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े नगर निगमों में जनता का रुझान साफ तौर पर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (भाजपा-शिवसेना शिंदे गुट-एनसीपी अजित पवार गुट) की ओर दिखाई दिया है।
Maharashtra Municipal Election 2026: मुख्य बिंदु
- 29 नगर महापालिका चुनाव 2026: आंकड़ों में देखें पूरी तस्वीर
- महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: बीएमसी में कम मतदान, छोटे शहरों में दिखा ज्यादा उत्साह
- बीएमसी चुनाव 2026: 227 वार्डों में महायुति की बढ़त, ठाकरे गुट की सत्ता पर संकट
- पुणे से लेकर नागपुर तक: प्रमुख नगर निगमों में महायुति का दबदबा, शहरी मतदाता का साफ संदेश
- महाराष्ट्र शहरी चुनाव रिजल्ट: बीजेपी 1400 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, 25 निगमों में गठबंधन मजबूत
- बीएमसी चुनाव में MVA की हार: नेतृत्व संकट से लेकर शहरी मतदाता तक, जानिए पूरी वजह
- चार साल बाद हुए नगर निकाय चुनाव: शिवसेना विभाजन की असली परीक्षा और 2029 का संकेत
- सड़क से स्वच्छता तक: नगर महापालिका चुनावों में मतदाताओं के वोट की असली वजह
- चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष के आरोप तेज, इंक विवाद और प्रशासनिक निष्पक्षता पर उठे सवाल
- 29 नगर महापालिका चुनाव: शहरी महाराष्ट्र का बड़ा संदेश, विपक्ष के लिए आत्ममंथन का समय
29 नगर महापालिका चुनाव: एक नजर में

महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए इन चुनावों में:
- कुल 29 नगर महापालिकाएं
- 2,800 से अधिक वार्ड सीटें
- लगभग 16 हजार उम्मीदवार
- करोड़ों शहरी मतदाता
मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही, हालांकि कुछ जगहों पर मतदान प्रतिशत को लेकर चिंता जरूर जताई गई।
मतदान प्रतिशत: शहरी मतदाता की परीक्षा
इन चुनावों में औसतन 55 से 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
- मुंबई (बीएमसी): लगभग 53% मतदान
- पुणे, नागपुर, नाशिक: 58–62%
- नए नगर निगमों जैसे इचलकरंजी में 65–70% तक मतदान
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम मतदान प्रतिशत अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बीएमसी चुनाव 2026: इतिहास में पहली बार नया सत्ता समीकरण
बीएमसी चुनाव हमेशा से महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रहे हैं। करीब ’90 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक बजट’ वाली बीएमसी पर नियंत्रण किसी भी पार्टी के लिए बेहद अहम माना जाता है।
बीएमसी चुनाव के प्रमुख बिंदु
- कुल वार्ड: ‘227’
- बहुमत का आंकड़ा: ‘114’
- शुरुआती रुझानों में महायुति गठबंधन बहुमत से आगे
- भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना को सबसे ज्यादा सीटें
यह पहली बार है जब ठाकरे गुट की शिवसेना को बीएमसी में सत्ता से बाहर होने का गंभीर खतरा नजर आया है।
कैसा रहा अन्य प्रमुख नगर निगमों का हाल?
पुणे नगर महापालिका
पुणे में विकास, मेट्रो, आईटी और स्मार्ट सिटी मुद्दों पर जनता ने महायुति को समर्थन दिया।
नागपुर
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह नगर नागपुर में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया।
ठाणे और नाशिक
यहां भी महायुति गठबंधन ने विपक्ष को पीछे छोड़ते हुए बढ़त बनाई।
पिंपरी-चिंचवड़
औद्योगिक और श्रमिक क्षेत्र में सरकार की नीतियों का असर साफ दिखा।
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव रिजल्ट 2026: 29 में 25 निगमों में बीजेपी की बढ़त
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा गठबंधन (बीजेपी+) ने जबरदस्त बढ़त बनाते हुए 29 में से 25 नगर निगमों में अग्रणी स्थिति हासिल की है। राज्य की 29 नगर निगमों की कुल 2,869 सीटों में से 2,833 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जबकि 36 सीटों का फैसला देर रात तक आने की संभावना है।
अब तक घोषित परिणामों में भाजपा 1,400 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 397, कांग्रेस को 324, अजित पवार गुट की एनसीपी को 158, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 153 और एमएनएस को 13 सीटें मिली हैं।
मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों में भाजपा ने 89, शिवसेना ने 29, कांग्रेस ने 24, शिवसेना (यूबीटी) ने 65 और एमएनएस ने 6 सीटें जीतीं, जबकि एआईएमआईएम को 8, एनसीपी को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और एनसीपी (एसपी) को सिर्फ 1 सीट मिली। नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवड़ और नासिक जैसे प्रमुख नगर निगमों में भी भाजपा गठबंधन की बढ़त कायम रही।
विपक्ष को क्यों लगा झटका?
कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी (शरद पवार) की महा विकास आघाड़ी (MVA) ने इन चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया।
इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:
- नेतृत्व की कमी और आंतरिक मतभेद
- शहरी मतदाताओं से कमजोर जुड़ाव
- विकास बनाम भावनात्मक राजनीति
- मजबूत संगठनात्मक ढांचे का अभाव
बीएमसी में दशकों तक दबदबा रखने वाली ठाकरे गुट की शिवसेना के लिए यह चुनाव सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से क्यों इतना महत्वपूर्ण हैं ये चुनाव?
- चार साल बाद हुए चुनाव
कानूनी और प्रशासनिक कारणों से नगर निकाय चुनाव लंबे समय तक टलते रहे। ऐसे में जनता का फैसला बेहद अहम था।
- शिवसेना विभाजन का पहला बड़ा टेस्ट
शिंदे गुट बनाम ठाकरे गुट की असली परीक्षा इन्हीं चुनावों में हुई, जिसमें शिंदे गुट भारी पड़ता दिखा।
- 2029 की राजनीति का संकेत
शहरी मतदाता का झुकाव आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
जनता ने किन मुद्दों पर दिया वोट?
मतदाताओं के बीच ये मुद्दे सबसे प्रभावी रहे:
- सड़क, पानी और सीवरेज
- कचरा प्रबंधन और स्वच्छता
- मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
- डिजिटल सेवाएं और ई-गवर्नेंस
भावनात्मक और पहचान आधारित राजनीति की जगह ‘विकास और सुशासन’ को प्राथमिकता मिली।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आरोप
कुछ विपक्षी दलों ने:
- चुनावी प्रक्रिया
- स्याही (इंक) विवाद
- प्रशासनिक पक्षपात
जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं, हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव को निष्पक्ष बताया है।
शहरी महाराष्ट्र का जनादेश: 29 नगर निगम चुनावों में महायुति की बढ़त ने बदली सियासी तस्वीर
महाराष्ट्र के 29 नगर महापालिका चुनावों के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि शहरी मतदाता स्थिर सरकार, विकास और मजबूत नेतृत्व चाहता है।
बीएमसी सहित बड़े नगर निगमों में महायुति की बढ़त ने राज्य की राजनीति में नया अध्याय जोड़ दिया है। वहीं विपक्ष के लिए यह आत्ममंथन का समय है।
आने वाले महीनों में इन नगर निकायों की कार्यशैली और फैसले यह तय करेंगे कि यह जनादेश कितना टिकाऊ साबित होता है।

