हमारी किडनियाँ शरीर के सबसे मेहनती अंगों में से एक हैं। ये हर दिन लगभग 50 गैलन खून को छानती हैं, विषैले तत्वों को बाहर निकालती हैं, शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन बनाए रखती हैं, और रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं। लेकिन अक्सर किडनी की बीमारियाँ तब तक सामने नहीं आतीं जब तक वे गंभीर न हो जाएँ।

सौभाग्य से, कुछ आसान और नियमित आदतें अपनाकर हम अपनी किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौन-सी छोटी-छोटी आदतें आपकी किडनी को बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं।
स्वस्थ किडनी से संबंधित मुख्य बिंदु:
- हर 7 में से 1 वयस्क को क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) होती है, लेकिन अधिकतर को इसका पता नहीं होता।
- डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और जीवनशैली से जुड़ी आदतें किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं।
- पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
- शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद ज़रूरी है।
किडनी खराब होने के मुख्य कारण
किडनी की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- डायबिटीज़ (मधुमेह): लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
- हाई ब्लड प्रेशर: उच्च रक्तचाप किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को प्रभावित करता है।
- लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन: जैसे आइबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन आदि।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन: ये दोनों किडनी की कार्यक्षमता को कमजोर करते हैं।
- अनुवांशिक कारण: परिवार में किडनी रोग का इतिहास होना।
- अत्यधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन
- पानी की कमी: शरीर में डिहाइड्रेशन से किडनी पर दबाव बढ़ता है।
किडनी को स्वस्थ रखने के 10 आसान उपाय
1. पर्याप्त पानी पिएं — लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा नहीं
पानी किडनी को विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। रोज़ाना 6–8 गिलास पानी पीना फायदेमंद होता है। हालांकि, बहुत ज़्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है, खासकर यदि पहले से किडनी की समस्या हो।
सुझाव: पेशाब का रंग हल्का पीला होना चाहिए। गहरा रंग डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है।
2. ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ किडनी को नुकसान पहुँचाने वाले दो सबसे बड़े कारण हैं। ब्लड प्रेशर को 120/80 mmHg से नीचे और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना ज़रूरी है।
सुझाव: घर पर ब्लड प्रेशर मॉनिटर रखें और नियमित जांच कराएं।
3. नमक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं
अधिक नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। रोज़ाना 2300 मिलीग्राम से कम सोडियम का सेवन करें।
बचें: पैकेज्ड स्नैक्स, डिब्बाबंद सूप, फास्ट फूड, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से।
अपनाएं: ताजे़ फल, सब्जियाँ, हर्ब्स और मसाले।
4. नियमित व्यायाम करें
व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाता है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और वजन घटाने में मदद करता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर का व्यायाम करें।
उदाहरण: तेज़ चलना, योग, तैराकी, साइक्लिंग।
5. धूम्रपान और शराब कदापि न पीएं
धूम्रपान किडनी तक रक्त प्रवाह को धीमा करता है और नुकसान को तेज़ करता है। शराब पीने से डिहाइड्रेशन और हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है।
सुझाव: धूम्रपान और शराब कदापि न सेवन करें।
6. दवाओं का सावधानी से उपयोग करें
लंबे समय तक पेनकिलर (जैसे आइबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन) का उपयोग किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें।
7. नियमित रूप से किडनी की जांच कराएं
यदि आपको डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास है, तो हर साल किडनी फंक्शन टेस्ट (जैसे eGFR और यूरिन एल्ब्यूमिन टेस्ट) कराएं।
8. किडनी-फ्रेंडली डाइट अपनाएं
फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, कम वसा वाले प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर आहार लें। मीठे पेय और फॉस्फोरस युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से बचें।
सुझाव: DASH डाइट को अपनाएं, जो दिल और किडनी दोनों के लिए फायदेमंद है।
9. तनाव को नियंत्रित करें
लगातार तनाव ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को बढ़ाता है, जिससे किडनी पर असर पड़ता है। ध्यान, योग, गहरी साँसें और पसंदीदा गतिविधियाँ तनाव कम करने में मदद करती हैं।
10. जोखिम को पहचानें और समय रहते कदम उठाएं
यदि आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है, डायबिटीज़ या हृदय रोग है, या परिवार में किडनी रोग का इतिहास है, तो सतर्क रहें और नियमित जांच कराएं।
किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें
किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं, लेकिन इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है:
• बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
• पेशाब में झाग या खून आना
• पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
• थकान और कमजोरी महसूस होना
• भूख में कमी और उल्टी जैसा महसूस होना
• त्वचा पर खुजली या सूखापन
• सांस फूलना या सीने में जकड़न
• ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
डॉक्टर से कब परामर्श लें और कौन-से टेस्ट ज़रूरी हैं
यदि आप निम्नलिखित जोखिम समूह में आते हैं, तो साल में कम से कम एक बार किडनी की जांच ज़रूर कराएं:
• डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़
• 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति
• परिवार में किडनी रोग का इतिहास
• मोटापा या हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति
ज़रूरी टेस्ट:
- eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate): यह टेस्ट किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को मापता है।
- Urine Albumin Test: पेशाब में प्रोटीन की मात्रा को जांचता है, जो किडनी डैमेज का संकेत हो सकता है।
- Serum Creatinine Test: खून में क्रिएटिनिन की मात्रा से किडनी की कार्यक्षमता का पता चलता है।
- Blood Urea Nitrogen (BUN): यह टेस्ट भी किडनी की कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
समस्या अनेक इलाज़ सिर्फ एक — सतभक्ति
मानव जीवन में स्वास्थ्य और रोग दोनों ही हमारे कर्मों का फल होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, “जैसा करोगे वैसा भरोगे” — यह नियम अटल है। साथ में वेदों ने यह भी बताया है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे परमात्मा की शरण में जाकर वास्तविक भक्ति करता है, तो उसके पूर्व जन्मों के पाप भी कट सकते हैं और उसे रोगों से मुक्ति मिल सकती है। परमेश्वर कबीर जी ही वे पूर्ण परमात्मा हैं जो जीवों के कर्मों का नाश कर सकते हैं और उन्हें दीर्घायु प्रदान कर सकते हैं।
आज के समय में संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे तत्वदर्शी संत हैं जो वेदों, गीता, कुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब जैसे सभी धर्मग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर वास्तविक भक्ति का मार्ग बता रहे हैं। वे बताते हैं कि हमारे शरीर में देवी देवताओं के पाँच कमल हैं —
- स्वाद कमल (ब्रह्माजी-सावित्री जी),
- मूल कमल (गणेश जी),
- नाभि कमल (विष्णु जी-लक्ष्मी जी),
- हृदय कमल (शिव जी-पार्वती जी) और
- कंठ कमल (देवी दुर्गा जी)।
जब कोई साधक तत्वज्ञान से प्राप्त सतभक्ति करता है और मूल मंत्रों का जाप करता है, तो ये कमल प्रफुल्लित हो जाते हैं और शरीर में संतुलन और स्वास्थ्य बना रहता है। देखिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई भक्ति विधि को अपनाने वाले भक्त जिनकी किडनी और अन्य असाध्य रोग ठीक हुए उनके अनुभव:-
संत रामपाल जी महाराज से प्राप्त सतभक्ति ही वह मार्ग है जो न केवल रोगों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
किडनी स्वास्थ्य से संबंधित FAQs
1. किडनी खराब होने का सबसे मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मधुमेह (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर किडनी खराब होने के दो सबसे बड़े कारण हैं।
2. किडनी की पथरी से कैसे बचें?
उत्तर: पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर और नमक का सेवन कम करके किडनी स्टोन के खतरे को कम किया जा सकता है।
3. किडनी खराब होने का सबसे पहला लक्षण क्या है?
उत्तर: किडनी खराब होने का सबसे शुरुआती संकेत पेशाब में बदलाव है। इसमें पेशाब में झाग आना, रंग गहरा होना या रात में बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसके अलावा, टखनों और आंखों के नीचे हल्की सूजन भी शुरुआती लक्षण हो सकती है।
4. क्या नींबू पानी किडनी के लिए अच्छा है?
उत्तर: हाँ, नींबू पानी किडनी के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद ‘साइट्रेट’ किडनी की पथरी (Kidney Stones) को बनने से रोकने में मदद करता है। हालांकि, इसमें चीनी के बजाय हल्का शहद या सेंधा नमक मिलाना बेहतर है।
5. किडनी को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स कैसे करें?
उत्तर: किडनी को डिटॉक्स करने का सबसे अच्छा तरीका दिन भर में पर्याप्त पानी पीना है। इसके अलावा, अदरक की चाय, धनिया का पानी और तरबूज़ जैसे पानी से भरपूर फलों का सेवन करने से किडनी की गंदगी बाहर निकल जाती है।

