विश्व के देशों में लगातार विवाद चल रहें हैं। जो उनमें व्याप्त स्थाई स्थिति और युद्ध को ओर अधिक बढ़ा रहे हैं। हालही में अमेरिका से युद्ध की आशंका से इजराइल तनाव में हैं। वहीं इसके कारण उनके व्यापार संबंधी डील भी कम हो रही हैं।
ईरान में 19 दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की ओर से युद्ध की आशंका बढ़ रही हैं। जिसके कारण तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। इसी तनाव के चलते इजराइल ने अमेरिका से बचकर ईरान से सिक्रेट डील की हैं। जो रूस की मध्यस्थता से पूरी हुई है।
इजराइल – ईरान की सीक्रेट डील से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु :-
- ईरान आज़ अपने सरकारी विरोध प्रदर्शन के 19 वें दिन तक पहुंच गया है जो देश में इंटरनेट बंदी जैसी स्थिति को जन्म दे रहा है।
- ईरान और अमेरिका के आपसी टकराव से देश में युद्ध की स्थिति गंभीर हो रहीं हैं जिसमें इजराइल भी चपेट में आने की आशंका है।
- इजराइल और ईरान में रूस की मध्यस्थता से हुई सिक्रेट डील।
- अमेरिका के द्वारा लगातार ईरान पर हमला करने की ख़बर सामने आईं हैं जो युद्ध की स्थिति को और अधिक बढ़ा रहा है।
- युद्ध जैसे घटनाक्रमों को देखते हुए इजराइल ने अपने सैन्य युनिट्स को हाई अलर्ट कर दिया है।
ईरान में चल रहा सरकारी विरोध
ईरान में लगातार सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं जो आज़ अपने 19 वें दिन के पड़ाव में हैं। जो हालात को और लोगों में तनाव को बढ़ा रहा है। वहीं ईरान में इन सरकार विरोधी प्रदर्शन से देश में इंटरनेट बंदी और सुरक्षाबलों की सख्त कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका से ईरान पर हमले की खुलीं धमकियां तेज़ हो रही है जो और अधिक तनाव और डर को बढ़ा रहीं हैं।
ईरान -अमेरिका आपसी टकराव
ईरान और अमेरिका के आपसी टकराव के बीच स्थिति और अधिक भयंकर हो रही हैं। वहीं एक सवाल और उभर कर आता है कि यदि अमेरिका ईरान से युद्ध करता है तो इजराइल भी इसकी चपेट आने की खबरें सामने आईं हैं। वहीं इजराइल के सरकारी प्लेन के देश के बाहर जाने की खबर ने और अधिक अटकलों को जन्म दिया है।
इसी तनावपूर्ण और गंभीर स्थिति में एक और खबर सामने आई है जिसमें रूस की मध्यस्थता में इजराइल ने ईरान से सिक्रेट डील की हैं। जो युद्ध को और हवा दें रहें हैं। इस डील का उद्देश्य किसी भी जंग में सामने हमले से बचा जा सकने वाले हैं।
इजराइल की ईरान से सिक्रेट डील
साल 2025 के अन्त में दिसंबर में इजराइल ने रूस की मध्यस्थता से ईरान को संदेश भिजवाया था। जिसमें इस बात की पुष्टि थी कि जब तक ईरान सामने से आक्रमण नहीं करेगा तब तक इजराइल भी कोई प्रतिक्रिया नहीं करेगा। इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी मंजूरी दी थी। इस सिक्रेट डील का उद्देश्य ईरान को युद्ध के टकराव से दूर करना था। साथ ही क्षेत्रिय युद्ध को टालना था।
अमेरिका में हो रहे संभावित आक्रमण से बढ़ी परेशानी
तेहरान, ईरान बढ़ते विवाद के चलते अमेरिका की ओर से युद्ध का संतुलन कम नहीं हुआ। अमेरिका अभी भी अपनी सैन्य कार्रवाई को ईरान के प्रति मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार साउथ चाइना सी से ईरान की ओर रवाना हुआ अमेरिका का न्यूक्लियर पावर्ड USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पेंटागन की ओर से कई विकल्प सौंपें गए जिसमें ईरान के परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स पर हमला करने के संकेत दिए गए। इन सब को देखते हुए यह हालात और गंभीर हो गए। जो युद्ध की स्थिति को अमेरिका की ओर से बढ़ा रहा है। इसके माध्यम से आशंका है कि अमेरिका कुछ दिनों में ईरान के प्रति अपनी कार्रवाई तेज़ कर देगा।
इजराइल ने की सेना की तैयारियां तेज़
इन सब घटनाक्रमों के बाद इज़राइली सेना ने कहा कि वह हालात पर बारीकी से नज़र रखें हुए हैं। साथ ही सभी सेना प्रमुख स्थिति की लगातार जांच कर रहे हैं और सभी युनिट्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हालांकि आम जन की सुरक्षा में कोई बदलाव या दिशानिर्देश इजराइल की और से नहीं हुए हैं। उन्होंने सतर्क रहने, अपवाहों से बचने और देश की अधिकारी सुचनाओं पर विश्वास करने की अपील की हैं।

