जेफ्री एपस्टीन का सेक्स ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) मामला दर्शाता है कि किस प्रकार धन, राजनीतिक प्रभाव और कानूनी कमियाँ मिलकर मासूम बच्चों के शोषण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यह संपूर्ण संचालन एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के रूप में कार्य करता था। एपस्टीन ने दो दशकों से भी अधिक समय तक दर्जनों, और संभवतः सैकड़ों नाबालिग लड़कियों का जीवन नष्ट करने के लिए अपने निजी द्वीपों और धनी संपर्कों का उपयोग किया।
इस पूरे अपराध का मुख्य केंद्र ‘लिटिल सेंट जेम्स’ (Little Saint James) नाम का एक निजी द्वीप था। यह द्वीप अमेरिकी वर्जिन आइलैंड्स में स्थित है। यहाँ एपस्टीन और उसके साथी बिना किसी डर के अपने काले कारनामों को अंजाम देते थे, क्योंकि उन्हें बड़े बैंकों और भ्रष्ट सिस्टम का समर्थन प्राप्त था।
द्वीप की बनावट: अपराध के लिए सुरक्षित पनाहगाह
इस आपराधिक नेटवर्क की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी ‘भौगोलिक स्थिति’ थी। लिटिल सेंट जेम्स को स्थानीय लोग “पिडोफाइल आइलैंड” (Pedophile Island) कहते थे। यह द्वीप कोई छुट्टी मनाने की जगह नहीं थी, बल्कि इसे पीड़ितों को कैद रखने और नियंत्रित करने के लिए विशेष रूप से बनाया गया था।
बुनियादी ढांचा और निगरानी
2020 से 2026 के बीच मिले सबूतों और वीडियो से पता चलता है कि द्वीप पर विलासिता (लग्जरी) के साथ-साथ जासूसी की भी पूरी व्यवस्था थी।
- मुख्य विला: यहाँ एपस्टीन अपने अमीर दोस्तों के साथ पार्टियां करता था।
- गेस्ट हाउस: नीले रंग की छत वाली छोटी झोपड़ियाँ, जहाँ पीड़ितों को रखा जाता था।
फोरेंसिक जाँच में सामने आई प्रमुख इमारतें:
| इमारत/स्थान | इसका उपयोग और महत्व |
| रहस्यमयी मंदिर (The Temple) | एक पहाड़ी पर बनी नीले और सफेद रंग की इमारत। इसका गुंबद सोने का था। यहाँ क्या होता था, यह एक गहरा राज़ था। |
| मेडिकल रूम | यहाँ दातों के डॉक्टर की कुर्सी और मेडिकल उपकरण मिले। इससे शक होता है कि यहाँ पीड़ितों के साथ जबरदस्ती कोई मेडिकल प्रक्रिया की जाती थी। |
| हेलिपैड और डॉक (बंदरगाह) | यहाँ केवल एपस्टीन के निजी विमान और नावें ही आ सकती थीं। पुलिस या बाहरी लोगों को यहाँ आने की अनुमति नहीं थी। |
| गुप्त ऑफिस | यहाँ लोहे की तिजोरियाँ थीं। गवाहों के अनुसार, इन तिजोरियों में बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरें और बहुत सारा नकद पैसा रखा जाता था। |
| भूमिगत निर्माण | द्वीप पर कई सुरंगें और रास्ते बनाए गए थे ताकि बाहर से कोई भी अंदर की गतिविधियों को देख न सके। |
एपस्टीन ने पास के ही एक और द्वीप ‘ग्रेट सेंट जेम्स’ को भी 2016 में खरीद लिया था। उसने ऐसा इसलिए किया ताकि कोई पड़ोसी या पर्यटक दूरबीन से उसके द्वीप पर होने वाले अपराधों को देख न सके।
तस्करी का रास्ता: पीड़ितों को कैसे लाया जाता था?
पीड़ितों को द्वीप तक लाने के लिए एपस्टीन ने अपना खुद का एक पूरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम बना रखा था।
- हवाई मार्ग: वह अपनी निजी बोइंग 727 जेट का इस्तेमाल करता था, जिसे लोग “लोलिता एक्सप्रेस” कहते थे। इसमें पूर्वी यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से लड़कियों को लाया जाता था।
- समुद्री मार्ग: सेंट थॉमस पहुँचने के बाद, पीड़ितों को “लेडी गिस्लेन” नाम की नाव या हेलीकॉप्टर से द्वीप पर ले जाया जाता था।
एक बार जब कोई लड़की द्वीप पर पहुँच जाती थी, तो उसके लिए भागना नामुमकिन हो जाता था। चारों तरफ समुद्र और सुरक्षा गार्ड होने के कारण वे पूरी तरह कैद हो जाती थीं।
शोषण की प्रक्रिया: ग्रूमिंग और जबरदस्ती
एपस्टीन और उसके साथी बहुत चालाकी से काम करते थे। वे पहले लड़कियों का भरोसा जीतते थे और फिर उनका शोषण करते थे। इसे ‘ग्रूमिंग’ कहा जाता है।
‘मसाज’ का बहाना
शोषण की शुरुआत अक्सर ‘मसाज’ (मालिश) से होती थी। 12 से 14 साल की लड़कियों को कहा जाता था कि वे एपस्टीन को मसाज दें। इसके बदले उन्हें नकद पैसे दिए जाते थे। धीरे-धीरे, यह मसाज जबरदस्ती यौन शोषण में बदल जाती थी।
भागने की कोशिश और सर्च पार्टी
2020 में वर्जिन आइलैंड्स के अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में बताया कि द्वीप पर लड़कियों को गुलामों की तरह रखा जाता था। एक दिल दहला देने वाली घटना में, एक 15 साल की लड़की ने द्वीप से भागने के लिए समुद्र में छलांग लगा दी। एपस्टीन के गार्ड्स ने तुरंत एक “सर्च पार्टी” (खोज दल) भेजा और उसे शिकार की तरह ढूँढ निकाला। पकड़ने के बाद उसका पासपोर्ट छीन लिया गया और उसे डराया-धमकाया गया।
डर और हथियार
पीड़ितों को डराने के लिए एपस्टीन मानसिक दबाव बनाता था।
- अदृश्य जंजीरें: सर्वाइवर वर्जीनिया जूफ्री ने बताया कि वे शारीरिक रूप से खुली जगह में होकर भी “अदृश्य जंजीरों” में जकड़ी थीं। उन्हें लगता था कि पुलिस भी एपस्टीन की जेब में है।
- हथियार: कई गवाहों ने बताया कि एपस्टीन अपने बिस्तर के पास बंदूक रखता था ताकि लड़कियां डर कर चुप रहें।
मददगारों का नेटवर्क: अपराध में सहभागी लोग
इतने बड़े पैमाने पर अपराध अकेले करना संभव नहीं था। एपस्टीन ने एक “महिलाओं का नेटवर्क” बनाया था जो उसके लिए नई लड़कियों को फंसाती थीं।
गिस्लेन मैक्सवेल की भूमिका
गिस्लेन मैक्सवेल इस पूरे नेटवर्क की मैनेजर थी। वह एपस्टीन की मुख्य सहयोगी थी। उसका काम लड़कियों को भरोसा दिलाना था कि सब कुछ सामान्य है। वह नई लड़कियों को “ट्रेनिंग” देती थी कि एपस्टीन को कैसे खुश करना है। 2021 में कोर्ट ने उसे सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी पाया और 20 साल की सजा सुनाई।
भर्ती का पिरामिड सिस्टम
यह गिरोह स्कूलों के आसपास सक्रिय था। वे छात्राओं को लालच देते थे कि अगर वे अपनी किसी सहेली को लाती हैं, तो उन्हें हर “नई दोस्त” के लिए 200 डॉलर मिलेंगे। इस तरह, कई बार पीड़ित लड़कियां ही अनजाने में दूसरी लड़कियों को फंसाने का जरिया बन जाती थीं। वे इसे मॉडलिंग या स्कॉलरशिप का मौका समझती थीं।
सिस्टम की विफलता: कानून और बैंकों की भूमिका
एपस्टीन का यह काला कारोबार इतने सालों तक इसलिए चला क्योंकि कानून और बैंकों ने अपनी आँखें मूंद रखी थीं।
2008 का शर्मनाक समझौता (NPA)
2008 में फ्लोरिडा में अलेक्जेंडर एकोस्टा ने एपस्टीन के साथ एक गुप्त समझौता किया। इसे “नॉन-प्रॉजिक्यूशन एग्रीमेंट” (NPA) कहा जाता है।
- इस समझौते ने एपस्टीन को संघीय जांच (Federal Investigation) से बचा लिया।
- उसे केवल छोटी-मोटी सजा मिली, जिसमें वह दिन में 12 घंटे जेल से बाहर अपने ऑफिस में बिता सकता था।
- सबसे बुरी बात यह थी कि इस समझौते को पीड़ितों से छिपाकर रखा गया। इसने एपस्टीन को और 10 साल तक अपराध करने की छूट दे दी।
बैंकों की मिलीभगत
जेपी मॉर्गन (JPMorgan) और डॉश बैंक (Deutsche Bank) जैसे बड़े बैंकों ने एपस्टीन के लेन-देन को जारी रखा। इन बैंकों को पता था कि एपस्टीन संदिग्ध तरीके से भारी मात्रा में नकद निकाल रहा है, जिसका इस्तेमाल लड़कियों को भुगतान करने के लिए होता था। लेकिन मुनाफे के लालच में उन्होंने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया। बाद में, इन बैंकों को करोड़ों डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा।
पीड़ितों का संघर्ष और न्याय की लड़ाई
इस अपराध की असली भयावहता उन महिलाओं की कहानियों से पता चलती है जो इससे बच निकलीं।
मारिया फार्मर (1996)
मारिया फार्मर वे पहली महिला थीं जिन्होंने 1996 में ही एफबीआई (FBI) को इस बारे में बताया था। उन्होंने पुलिस को बताया कि एपस्टीन के पास एक तिजोरी है जिसमें सबूत हैं। लेकिन सिस्टम ने उनकी बात नहीं सुनी। एफबीआई ने एक दशक तक जांच शुरू नहीं की। अगर तब कार्रवाई होती, तो सैकड़ों बच्चों को बचाया जा सकता था।
वर्जीनिया जूफ्री
वर्जीनिया जूफ्री को 15 साल की उम्र में फ्लोरिडा के मार-आ-लागो से फंसाया गया था। उन्होंने बताया कि एपस्टीन ने उन्हें “फलों की थाली” की तरह अपने अमीर दोस्तों, जैसे कि प्रिंस एंड्रयू और अन्य बड़े लोगों के पास भेजा। वर्जीनिया की हिम्मत के कारण ही यह मामला पूरी दुनिया के सामने आया।
2025-2026 के खुलासे
हाल ही में 2026 की शुरुआत में हजारों पन्नों के सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। इन दस्तावेजों ने साबित कर दिया कि सरकार को एपस्टीन के कारनामों के बारे में बहुत पहले से पता था। हालाँकि, इन खुलासों ने कई पीड़ितों के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है, क्योंकि इसमें उनकी पहचान को ठीक से छिपाया नहीं गया था।
पनाहगाह
जेफ्री एपस्टीन का सेक्स ट्रैफिकिंग स्कैंडल धन, सत्ता और संस्थागत विफलता का एक भयावह उदाहरण है। एपस्टीन ने अपने निजी द्वीप ‘लिटिल सेंट जेम्स’ को एक सुरक्षित पनाहगाह बनाकर दशकों तक नाबालिगों का शोषण किया। इस अपराध में उसकी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल, बड़े बैंक और 2008 के लचर कानूनी समझौते ने भी अहम भूमिका निभाई।
पीड़ितों को ‘मसाज’ के बहाने फंसाकर द्वीप पर कैद रखा जाता था। 2026 के नए दस्तावेजी खुलासों ने साबित किया कि अमीर अपराधियों को सिस्टम का संरक्षण प्राप्त था। भले ही अब वह द्वीप बिक चुका है, लेकिन यह मामला भविष्य के लिए एक चेतावनी है कि दौलत की आड़ में मानवता का सौदा नहीं होना चाहिए।
लेख का सारांश (समयरेखा):
- 1998: एपस्टीन ने लिटिल सेंट जेम्स द्वीप खरीदा।
- 2008: विवादित ‘सौदा’ (NPA) हुआ, जिसने एपस्टीन को जेल से बचाया।
- 2019: एपस्टीन की गिरफ्तारी और जेल में मौत।
- 2021: गिस्लेन मैक्सवेल को 20 साल की सजा।
- 2026: हजारों गुप्त दस्तावेजों का सार्वजनिक होना और सिस्टम की पोल खुलना।
क्यों और निवारण: आध्यात्मिक दृष्टिकोण
जेफ्री एपस्टीन जैसे लोगों के घिनौने अपराध यह सवाल खड़ा करते हैं कि अपार धन और शक्ति होने के बावजूद इंसान बुराई की ओर क्यों जाता है? क्या ईश्वर इसे रोकता नहीं है?
संत रामपाल जी महाराज इसका आध्यात्मिक कारण बताते हैं। उनके अनुसार, पवित्र शास्त्रों में वर्णित ‘काल’ (या ब्रह्म) जिसे अक्सर भगवान समझा जाता है वह शक्ति है जो मनुष्य के मन को प्रभावित कर उसे अनैतिक कार्यों की ओर धकेलता है। यह ‘काल’ ऐसी व्यवस्था बनाता है जहाँ अमीरों की खुशी मासूमों की पीड़ा से खरीदी जाती है।
इसका एकमात्र निवारण और असली समाधान ‘पूर्ण परमात्मा कबीर’ की शरण लेना है। केवल वही हमें इस भ्रष्ट व्यवस्था और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त कर सकते हैं। अधिक जानकारी और प्रमाणों के लिए आप jagatgururampalji.org पर जा सकते हैं या “ज्ञान गंगा” और “जीने की राह” जैसी पुस्तकें मुफ्त में मंगवाकर पढ़ सकते हैं।
FAQs:
- प्रश्न: लिटिल सेंट जेम्स द्वीप का इस्तेमाल किसलिए होता था?
उत्तर: यह एपस्टीन का निजी द्वीप था जहाँ नाबालिग लड़कियों को कैद कर उनका यौन शोषण किया जाता था।
- प्रश्न: इस अपराध में एपस्टीन की मुख्य सहयोगी कौन थी?
उत्तर: गिस्लेन मैक्सवेल उसकी मुख्य सहयोगी थी जो लड़कियों को बहला-फुसलाकर इस जाल में फंसाती थी।
- प्रश्न: 2008 में एपस्टीन को कड़ी सजा क्यों नहीं मिली?
उत्तर: एक गुप्त सरकारी समझौते (NPA) के कारण उसे संघीय मुकदमों और लंबी जेल से बचा लिया गया था।
- प्रश्न: अब उस विवादित द्वीप का क्या हुआ?
उत्तर: इसे 2023 में बेच दिया गया और अब वहां एक लक्जरी रिसॉर्ट बनाया जा रहा है।
- प्रश्न: 2026 के नए दस्तावेजों से क्या खुलासा हुआ?
उत्तर: इनसे पता चला कि सरकारी एजेंसियों को इन अपराधों की जानकारी बहुत पहले से थी, लेकिन उन्होंने अनदेखी की।

