दिल्ली में लिए गए पानी के सैंपल में बड़ी संख्या में सैंपल गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे, कई स्थानों पर लगभग 40 प्रतिशत से अधिक सैंपल परीक्षण में विफल पाए गए। इसका अर्थ है कि जो पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है, वह पूरी तरह से पीने योग्य सुरक्षित नहीं है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है।
- बिना शुद्धिकरण के घरों तक पहुंचाया जा रहा है जल
- पाइप में दरार आने से या लीकेज होने से गंदा पानी भी अच्छे पानी में मिल जाता है
- दिल्ली जल संकट से उत्पन्न हो रही है कई बीमारियां?
- राजौरी गार्डन में जल प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक
- कहां-कहां से लिए गए सैंपल और कहां-कहां का जल पाया गया प्रदूषण
- क्यों खराब नहीं होता गंगाजल?
- दिल्ली जल संकट से जुड़े FAQs
बिना शुद्धिकरण के घरों तक पहुंचाया जा रहा है जल
यह भी देखा गया कि बोरवेल और अन्य स्रोतों से आने वाले जल को बिना शुद्धिकरण किए लोगों के घरों तक पहुंचा दिया जा रहा है, सोच कर देखो की जिस जल का शुद्धिकरण ही नहीं किया गया, जिसमें खतरनाक बैक्टीरिया, गंदगी और केमिकल मौजूद हैं वह शरीर के लिए कितनी समस्याएं पैदा कर सकता है, जिसकी वजह से विभिन्न शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पाइप में दरार आने से या लीकेज होने से गंदा पानी भी अच्छे पानी में मिल जाता है
कई बार देखने में आया है की पाइप के लीकेज होने की वजह से जो गंदा पानी है वह भी अच्छे पानी में मिल जाता है। दिल्ली में हज़ारों किलोमीटर तक जल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछी हुई है, और कई जगहों पर जल पाइपलाइन जो बिछी हुई है वह बहुत पुरानी है, जिसकी वजह से कई बार तो जल बर्बाद हो जाता है और कई बार जल गंदे पानी के संपर्क में आने की वजह से प्रदूषित हो जाता है जो एक बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। सरकार को जल्द से जल्द इस ओर मज़बूत कदम उठाने होंगे क्योंकि जल ही जीवन है।
दिल्ली जल संकट से उत्पन्न हो रही है कई बीमारियां?
डॉक्टरों के अनुसार, गंदा या दूषित पानी पीने से कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, इनमें डायरिया और उल्टी दस्त यानी गंदे पानी से पेट से जुड़ी बीमारियां तेज़ी से फैलती हैं, टाइफाइड बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जो की प्रदूषित पानी पीने से फैलती है। इसके अलावा संक्रामक पानी पीने से लिवर से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसके अलावा पेट और आंतों का संक्रमण भी गंदे पानी में मौजूद बैक्टीरिया से होता है। गंदे पानी से नहाने या उपयोग करने से खुजली, रैशेज़ और फंगल इंफेक्शन हो सकता है। रासायनिक प्रदूषण, पानी में आर्सेनिक या लेड जैसे तत्व होने पर कैंसर, किडनी और लीवर की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। जो कि बड़ी चिंता का कारण है।
राजौरी गार्डन में जल प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक
सभी आठ दूषित नमूने घरेलू नल कनेक्शनों से लिए गए थे। समस्या मुख्य रूप से कुछ विशेष इलाकों की पाइपलाइनों में केंद्रित दिखाई दी। पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक पाया गया। इसके बाद पूर्वी दिल्ली के चिल्ला गांव और मयूर विहार फेज़-3 स्थित डीडीए फ्लैट्स का स्थान रहा।
इसके विपरीत, दक्षिण और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। यह पैटर्न पूरे शहर में पानी की आपूर्ति व्यवस्था के ठप होने का संकेत नहीं देता, बल्कि वितरण नेटवर्क के कुछ विशेष हिस्सों में उत्पन्न गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि घरेलू नलों से लिए गए इन नमूनों में से तीन नमूने तो नहाने के पानी के लिए निर्धारित न्यूनतम गुणवत्ता मानकों को भी पूरा नहीं कर सके।
कहां-कहां से लिए गए सैंपल और कहां-कहां का जल पाया गया प्रदूषण
घरेलू नलों के अतिरिक्त, एचटी ने आपूर्ति बिंदुओं की तुलना करने के लिए डीजेबी टैंकरों और सार्वजनिक जल एटीएम से भी पानी का परीक्षण किया। कवर किए गए 18 स्थानों में मयूर विहार चरण 3, जनकपुरी, राजौरी गार्डन, बटला हाउस, बुधेला गांव (विकासपुरी), मदनपुर खादर, महारानी बाग, मंडावली, पूर्वी विनोद नगर, संगम विहार में देवली गांव, वसंत कुंज, द्वारका सेक्टर 16 बी, रोहिणी सेक्टर 17 और कनॉट प्लेस में एक सार्वजनिक पेयजल एटीएम शामिल हैं। कमला नगर में एक मिठाई की दुकान, हिंदू राव अस्पताल में एक वाटर कूलर और मयूर विहार चरण 1 में चिल्ला गांव में दो बिंदुओं से भी नमूने एकत्र किए गए – एक डीजेबी टैंकर से और एक स्थानीय पाइपलाइन आपूर्ति से। एटीएम, टैंकरों और संस्थागत स्रोतों से प्राप्त पानी पीने योग्य पाया गया। लेकिन आंकड़ों से पता चला कि आठ घरेलू नमूनों में कुल कोलीफॉर्म की मात्रा पूर्वी विनोद नगर में 6 कॉलोनी-फॉर्मिंग यूनिट (सीएफयू) प्रति 100 मिलीलीटर से लेकर राजौरी गार्डन में 920 सीएफयू तक थी।
क्यों खराब नहीं होता गंगाजल?
क्या आप जानते हैं कि गंगाजल कभी खराब नहीं होता? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गंगाजल का स्रोत अमर सनातन लोक से माना जाता है। कहा जाता है कि वहां से यह जल पहले ब्रह्मा जी के कमंडल में आया, फिर शिवलोक में स्थित जटाओं से होकर हिमालय की ओर प्रवाहित हुआ और अंततः गोमुख से निकलकर पृथ्वी पर गंगा के रूप में हम सबके बीच पहुंचा।
गंगा जल की विशेषता यह है कि लंबे समय तक रखने पर भी यह खराब नहीं होता। इस कारण कई लोग मानते हैं कि परमात्मा ने गंगा के जल को पृथ्वी पर एक उदाहरण के रूप में भेजा, ताकि मनुष्य यह समझ सके कि एक ऐसा दिव्य लोक भी है जहां का जल और वहां की कोई भी वस्तु कभी नष्ट या खराब नहीं होती।
तो आइए जानते हैं कि वह दिव्य लोक कैसा है, कहां स्थित है, और वहां तक पहुंचने का सही मार्ग क्या बताया गया है।
कैसा और कहां है वह स्थान?
श्रीमद् भागवत गीता अध्याय चार श्लोक 34 में बताए गए, तत्वदर्शी संत से नाम दीक्षा लेकर जो व्यक्ति भक्ति करता है वह श्रीमद् भागवत गीता अध्याय 18 शोक 66 में दिए अमर सनातन लोक में चला जाता है जहां परम शांति और परम सुख है जहां की कोई भी वस्तु कभी खराब नहीं होती, वहीं से गंगा इस पृथ्वी लोक पर आई है वहां की प्रत्येक वस्तु अजर अमर अविनाशी है, और वहां पर रहने वाले लोग कभी दुखी नहीं होते, दोस्तों हम भक्ति तो करते हैं, मगर जब हम शास्त्र अनुकूल साधना करेंगे तो हमारे सामाजिक कार्य भी सकुशल पूरे होंगे और हमें पूर्ण मोक्ष भी प्राप्त होगा।
उस शास्त्र अनुकूल साधना को वर्तमान समय में, पृथ्वी पर अवतरित जगतगुरु तत्वदर्शी, बाखबर, अंतिम पैगंबर, किसान मसीहा” विश्व विजेता, संत रामपाल जी महाराज जी” निःशुल्क प्रदान कर रहे हैं। आप सभी से निवेदन है कि संत रामपाल जी महाराज जी का सत्संग सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सुनें और आध्यात्मिक ज्ञान को सयझें।
दिल्ली जल संकट से जुड़े FAQs
FAQ
1. दिल्ली में पानी के नमूनों के फेल होने की मुख्य वजह क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार कई बार जल प्रदूषण की समस्या पूरी आपूर्ति प्रणाली में नहीं होती, बल्कि वितरण नेटवर्क की कुछ पुरानी या क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों में होती है। लीकेज या सीवेज लाइन के संपर्क में आने से पानी दूषित हो सकता है।
2. क्या दिल्ली के सभी इलाकों में पानी की गुणवत्ता खराब है?
नहीं, जांच के अनुसार समस्या कुछ खास इलाकों तक सीमित दिखाई दी है। कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता सामान्य पाई गई, जिससे संकेत मिलता है कि पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित नहीं है, बल्कि कुछ स्थानों पर ही पाइपलाइन या वितरण से जुड़ी गड़बड़ी हो सकती है।
3. दिल्ली जल संकट की वजह बनी पाइपलाइन कितनी पुरानी है?
5,200 किलोमीटर से अधिक लंबी पाइपलाइनें 30 साल से अधिक पुरानी हैं।
4. दिल्ली जल आपूर्ति नेटवर्क कितना लंबा है?
दिल्ली का जल आपूर्ति नेटवर्क 15,400 किलोमीटर से अधिक लंबा है।
5. सबसे ज़्यादा प्रदूषित जल कहां पाया गया?
दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषित जल राजौरी गार्डन में पाया गया।

