Shalimar Bagh Wire Free News: राजधानी दिल्ली के शहरी बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली का शालीमार बाग का इलाका अब आधिकारिक तौर पर सिर के ऊपर लटकते बिजली के तारों के खतरनाक मकड़जाल से मुक्त हो गया है। यह दिल्ली का पहला ऐसा रिहायशी इलाका बन गया है, जहाँ एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर 10 किलोमीटर लंबा भूमिगत केबल नेटवर्क सफलतापूर्वक बिछाया गया है।
Shalimar Bagh Wire Free News पर मुख्य बिंदु:
- मिशन तार-मुक्त दिल्ली प्रोजेक्ट के तहत शालीमार बाग बना दिल्ली का पहला तार-मुक्त शहर।
- इलाके में बिछा कुल 10 किलोमीटर का भूमिगत पावर केबल नेटवर्क।
- केवल तार ही नहीं, बल्कि लगभग 700 पुराने मीटरों को बदलकर लगाए गए आधुनिक स्मार्ट मीटर।
- बिजली के तारों के साथ-साथ खंभों पर अवैध रूप से लटके इंटरनेट और टीवी केबलों का अतिक्रमण भी हुआ खत्म।
- TPDDL के प्रवक्ता ने कहा, “प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद से बिजली आपूर्ति संबंधी कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई।”
8 करोड़ का प्रोजेक्ट, रिकॉर्ड समय में पूरा
दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी को तारों के जंजाल से मुक्त करने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत शालीमार बाग को एक मॉडल के रूप में चुना गया था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए इस 8 करोड़ के पायलट प्रोजेक्ट को TPDDL ने अक्टूबर तक सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस मिशन का मुख्य फोकस विशेष रूप से ब्लॉक बीएच (Block BH) के जनता फ्लैट्स क्षेत्र पर था, जहाँ बिजली का नेटवर्क लगभग पांच दशक पुराना और बेहद जर्जर स्थिति में था।
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बदल गई इलाके की सूरत, अवैध तारों का हुआ सफाया
दशकों से, शालीमार बाग की सड़कें भी दिल्ली के अन्य इलाकों की तरह बिजली के खंभों पर लटकते खुले और उलझे हुए तारों से अटी पड़ीं थीं। ये तार न केवल देखने में जंजाल की तरह थे, बल्कि आंधी-बारिश के दौरान गंभीर सुरक्षा जोखिम भी पैदा करते थे।
भूमिगत केबलिंग के बाद अब सड़कें चौड़ी और साफ-सुथरी नजर आ रही हैं। इसका एक बड़ा फायदा ये भी हुआ कि बिजली के खंभों का सहारा लेकर बांधे गए अवैध ब्रॉडबैंड केबल और टीवी के तारों का अतिक्रमण भी पूरी तरह समाप्त हो गया है, जिससे सुरक्षा बढ़ी है।
पुराने मीटरों की जगह लगे ‘स्मार्ट मीटर’
इस परियोजना में तारों को ज़मीन के नीचे बिछाने के अलावा पूरे विद्युत वितरण बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया गया है। TPDDL के अनुसार, उच्च जोखिम वाले स्थानों को प्राथमिकता दी गई है।
इलाके में लगभग 700 पुराने और जर्जर मीटर बॉक्सों को बदलकर उनकी जगह आधुनिक स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 24 नए मौसम-रोधी फीडर पिलर और 41 नए आधुनिक स्ट्रीट-लाइट पोल भी स्थापित किए गए हैं।
पूरी दिल्ली के लिए 100 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान
शालीमार बाग का यह सफल पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली सरकार के विकसित दिल्ली के विजन का एक जीता-जागता उदाहरण है। इस सफलता के बाद सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पूरी दिल्ली के ओवरहेड तारों को भूमिगत करने के लिए 100 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
बिजली मंत्री आशीष सूद ने इसे भविष्य के लिए तैयार स्मार्ट दिल्ली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। स्थानीय निवासी आशा अरोरा (57) ने कहा, “शहर की और भी सड़कों को इसी तरह के सुधार की आवश्यकता है।”
FAQs about Shalimar Bagh Wire Free News
Q1: शालीमार बाग में क्या बड़ा बदलाव आया है?
शालीमार बाग दिल्ली का पहला ऐसा इलाका बन गया है, जहाँ सिर के ऊपर लटकते बिजली के तारों के मकड़जाल को पूरी तरह हटाकर अंडरग्राउंड कर दिया गया है।
Q2: कुल कितने किलोमीटर का अंडरग्राउंड नेटवर्क बिछाया गया है?
मिशन तार मुक्त दिल्ली प्रोजेक्ट के तहत इलाके में 10 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क बिछाया गया है।
Q3: यह प्रोजेक्ट किसने पूरा किया और इसमें कितना खर्च आया?
यह पायलट प्रोजेक्ट टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) द्वारा पूरा किया गया है और इसकी कुल लागत लगभग 8 करोड़ रुपए थी।
Q4: तारों को अंडरग्राउंड करने से आम लोगों को क्या फायदा हुआ?
इससे इलाके की सुंदरता बढ़ी है, सड़कें साफ हुई हैं। आंधी-तूफान में तार टूटने या करंट लगने का खतरा भी खत्म हुआ है।
Q5: क्या इस प्रोजेक्ट में मीटर भी बदले गए हैं?
जी हाँ, बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करते हुए लगभग 700 पुराने मीटरों की जगह नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं।
Q6: क्या शालीमार बाग से पहले दिल्ली के किसी अन्य इलाके में यह काम हुआ है?
नहीं, इतने बड़े पैमाने पर रिहायशी इलाके को तार-मुक्त करने का यह दिल्ली का पहला सफल पायलट प्रोजेक्ट है।

