भारत में एक नया प्रयोगात्मक प्रस्ताव सामने आया है, जिसके तहत वे लोग जो ट्रैफिक में अकेले (single-occupancy) गाड़ी चलाते हैं, उन्हें एक कंजेशन टैक्स (congestion tax) देना होगा। इस योजना की शुरुआत बेंगलुरु से की जाएगी और तीन महीने की परीक्षण अवधि के बाद यदि सफल रही, तो इसे पूरे देश में लागू करने की संभावना है।
कंजेशन टैक्स का उद्देश्य और प्रमुख बिंदु
- प्रस्तावित नियम के अनुसार, शहर के उच्च-घनत्व यातायात क्षेत्रों (जैसे Outer Ring Road) में अकेली गाड़ी चलाने वालों पर टैक्स लगाया जाएगा।
- टैक्स की राशि FASTag प्रणाली के माध्यम से स्वतः कटौती की जाएगी।
- यदि गाड़ी में दो या अधिक लोग हों, तो कर छूट दी जाएगी — इसका मकसद कार-पूलिंग और साझा यात्रा को प्रोत्साहित करना है।
- इस नीति को पहले 90 दिनों (तीन महीने) के तौर पर लागू किया जाएगा ताकि असर और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों का आंकलन हो सके।
- प्रस्तावित राशि, कराधान बाद की प्रणाली, और क्षेत्र की सीमाएँ अभी चर्चा एवं परीक्षणाधीन हैं।
कंजेशन टैक्स: लाभ एवं चुनौतियाँ
संभावित लाभ
- यातायात भीड़ को कम करना — अकेले गाड़ी चलाने की प्रवृत्ति में कमी आ सकती है।
- वायु प्रदूषण में कमी — कम वाहन चलने से उत्सर्जन घट सकता है।
- राजस्व सृजन — उस राशि को सार्वजनिक परिवहन, सड़क सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया जा सकता है।
- साझा यात्रा को प्रोत्साहन — दो या अधिक यात्रियों वाली गाड़ियाँ टैक्स मुक्त होंगी, जिससे लोग मिलकर यात्रा करना चाहेंगे।
संभावित चुनौतियाँ
- परिवहन विकल्पों की कमी: यदि सार्वजनिक परिवहन मजबूत नहीं है, तो लोगों के पास विकल्प कम होंगे।
- न्यायसंगतता की चिंता: मध्यम व निम्न आय वर्ग पर दबाव बढ़ सकता है।
- तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएँ: क्षेत्र निर्धारण, निगरानी व्यवस्था, निष्पादन आदि।
- सामुदायिक विरोध: वाहन चालकों की नाराजगी संभव है, खासकर यदि उन्हें लगता है कि बदलाव का लाभ नहीं मिल रहा।
बेंगलुरु मॉडल: अन्य प्रयास और संदर्भ
- पहले ही बेंगलुरु के कुछ इलाकों में कार और बाइक पूलिंग (sharing) की पहल हो चुकी है। उदाहरण के लिए, सार्जापुर के निवासी स्थानीय व्हाट्सएप समूहों से साझा यात्रा की व्यवस्था करते हैं, जिससे ट्रैफिक बोझ थोड़ा कम हुआ है।
- आलोचकों का तर्क है कि बिना पूरी रूप से विकसित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के, यह टैक्स असमर्थित और असमान हो सकता है।
समाज सुधार के चश्में से ये नीति कैसी है ?
जब हम traffic congestion, पर्यावरण, साझा यात्रा और कराधान जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं, तो एक संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। संत रामपाल जी महाराज कहते हैं कि सत्संग से मन निर्मल होता है, और जब मन निर्मल हो, तभी निर्णयों में न्याय और संतुलन आता है।
उस दृष्टिकोण से देखें, तो कंजेशन टैक्स की नीति तभी सार्थक हो सकती है, जब वह केवल राजस्व बढ़ाने की मंशा न हो, बल्कि समाज की ज़रूरतों, पर्यावरण की रक्षा और नागरिकों की सुविधा का ध्यान रखे। संत रामपाल जी महाराज भी समय समय पर पर्यावरण बचाओ अभियान चलाते रहते हैं जिसके तहत उनके श्रद्धालु पेड़ लगाते भी दिखाई देते हैँ, कचरा उठाकर सफाई करते हुए भी दिखाई देते हैं ।
यदि इस नीति से केवल वो लोग प्रभावित हों जो अनिवार्य रूप से गाड़ी चलाते हैं, और सरकार ने सार्वजनिक परिवहन, ट्रैफिक प्रबंधन एवं सतत शहरी योजना पर पर्याप्त संसाधन नहीं दिए हों, तो यह नीति दुविधा और विवाद का विषय बन सकती है। इसलिए, यदि बेंगलुरु में यह कंजेशन टैक्स लागू होता है, तो उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार साझा यात्रा, परिवहन सुविधाएँ, शहरी योजनाएँ और नागरिक संवाद को कितनी गंभीरता से लेती है। तभी यह नीति एक न्यायपूर्ण, सतत और समावेशी परिवर्तन बन सकती है।
बेंगलुरु में ‘कंजेशन टैक्स’ पर FAQs:
Q1. कंजेशन टैक्स क्या है?
कंजेशन टैक्स एक ऐसी शुल्क प्रणाली है जिसमें ट्रैफिक जाम वाले इलाकों में अकेले गाड़ी चलाने वालों से अतिरिक्त टैक्स लिया जाता है, ताकि वाहन संख्या कम हो और साझा यात्रा बढ़े।
Q2. ये टैक्स बेंगलुरु में कब लागू होगा?
शुरुआत में इसे तीन महीने के परीक्षण के रूप में लागू किया जाएगा, और अगर सफल हुआ तो अन्य शहरों में विस्तारित किया जा सकता है।
Q3. क्या टैक्स सभी को देना होगा?
नहीं — यदि गाड़ी में दो या अधिक लोग हों तो टैक्स छूट मिलेगी। यह नीति अकेले यात्रा करने वालों पर लागू होगी।
Q4. पर्यावरण पर इसका क्या असर होगा?
वाहनों की संख्या कम होने से वायु प्रदूषण घटने की संभावना है, साथ ही शहर में ट्रैफिक बेहतर हो सकता है।
Q5. क्या यह नीति अन्य शहरों में भी लागू होगी?
यदि बेंगलुरु में परीक्षण सफल हुआ तो इसे अन्य शहरों और पूरे देश में लागू करने पर विचार किया जाएगा।

