Seemapuri Building Collapse: दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में बुधवार दोपहर एक आवासीय इमारत का हिस्सा ढह गया। हादसा करीब 3:30 बजे हुआ। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के बाद दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 8 घायलों को निकाला गया है और एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है।
- सीमापुरी में दोपहर 3:30 बजे हुआ हादसा
- 8 लोगों को मलबे से निकाला गया
- मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी
- परिवारों ने बताई मलबे में फंसे लोगों की जानकारी
- भूकंप के झटकों के बाद दरारों का दावा
- सीमापुरी की सड़कों पर यातायात प्रभावित
- एक महीने बाद फिर सामने आया इमारत गिरने का हादसा
- घटना की जांच से स्पष्ट होगा इमारत गिरने का कारण
- नश्वर संसार से शाश्वत सतलोक तक
सीमापुरी में दोपहर 3:30 बजे हुआ हादसा
न्यू सीमापुरी के ईदगाह मछली मंडी के पास बुधवार दोपहर आवासीय इमारत ढह गई। दिल्ली अग्निशमन सेवा को करीब 3:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद चार दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। दिल्ली पुलिस, नागरिक प्रशासन और नागरिक सुरक्षा कर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे और तलाश एवं बचाव अभियान शुरू किया।
उप पुलिस आयुक्त (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि यह करीब 225 वर्ग फुट क्षेत्र में बनी चार मंजिला इमारत थी। कुछ लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया था, जबकि दो से तीन लोगों के अब भी मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका जताई गई थी।
हालांकि, कुछ प्रमुख रिपोर्टों में इसे पांच मंजिला आवासीय इमारत बताया गया है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार इमारत ई-ब्लॉक, न्यू सीमापुरी में स्थित थी और लगभग 25 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। गिरने से आसपास की दो इमारतों को भी आंशिक नुकसान पहुंचा।
8 लोगों को मलबे से निकाला गया
बचाव दलों ने अभियान के दौरान 8 घायल लोगों को मलबे के भीतर से सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें करीब तीन साल का एक बच्चा भी था। सभी घायलों को इलाज के लिए जीटीबी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह आपातकालीन विभाग फिलहाल राजीव गांधी अस्पताल परिसर से संचालित किया जा रहा था।
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बाद की पीटीआई आधारित रिपोर्ट में करीब डेढ़ साल के एक बच्चे की मौत की पुष्टि की गई और कम से कम 8 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। शुरुआती रिपोर्टों में एक मौत और 8 लोगों के बचाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में जीटीबी अस्पताल के अधिकारियों के हवाले से दो शव अस्पताल लाए जाने की बात भी कही गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि शव बुरी तरह कुचले हुए थे और उस समय उनका लिंग निर्धारित नहीं किया जा सकता था। बाद के अपडेट में एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई। इसलिए अलग-अलग समय की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अंतर दिखाई दिया।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी
बचाव दलों के पहुंचने के बाद मलबा हटाने का काम लगातार जारी रहा। स्थानीय लोगों ने भी बचावकर्मियों के साथ मिलकर मलबा हटाने में मदद की। घटनास्थल के दृश्यों में लोगों को हाथों से मलबा हटाते और एक महिला को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक ले जाते देखा गया। मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी और खुदाई करने वाली मशीनों का भी इस्तेमाल किया गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सात से आठ लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया था। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, दिल्ली पुलिस और अन्य बचाव दल घटनास्थल पर लोगों की तलाश कर रहे थे।
परिवारों ने बताई मलबे में फंसे लोगों की जानकारी
हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए 33 वर्षीय मोहम्मद अकबर ने बताया कि इमारत उनके ससुर मोहम्मद अनवर की थी और परिवार इमारत की चार मंजिलों में रहता था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने इमारत को गिरते देखा। उनके अनुसार परिवार के तीन सदस्य, जिनमें उनकी ननद भी शामिल थीं, मलबे में फंस गए थे।
अनवर की बेटी अमीना ने बताया कि परिवार करीब चार महीने पहले इस नए बने मकान में रहने आया था। उन्होंने दावा किया कि पास की इमारत में पिछले पांच-छह दिनों से मशीन के जरिए तोड़फोड़ का काम चल रहा था और इससे उनके मकान पर असर पड़ा था। यह स्थानीय परिवार का दावा है; अधिकारियों ने अभी इसे इमारत गिरने का आधिकारिक कारण नहीं बताया है।
30 वर्षीय समीना ने बताया कि उनकी 21 वर्षीय बहन गुलफिशा, जो चार महीने की गर्भवती थीं, अपनी चार वर्षीय बेटी के साथ मलबे में फंसी थीं। समीना के अनुसार गुलफिशा ने मलबे के नीचे से फोन किया और सांस लेने में परेशानी होने की जानकारी दी।
भूकंप के झटकों के बाद दरारों का दावा
कुछ स्थानीय लोगों का कहना था कि मंगलवार रात उत्तराखंड में आए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें नजर आई थीं। वहीं, कुछ लोगों के मुताबिक मकान को खाली भी कराया जा रहा था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक इमारत ढहने की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही हादसे का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आसपास की इमारतों पर भी असर पड़ा और स्थानीय लोगों ने भूकंप के झटकों को संभावित कारण बताया। साथ ही पास की एक इमारत को पहले से तोड़े जाने की बात भी सामने आई। इन दोनों दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सीमापुरी की सड़कों पर यातायात प्रभावित
इमारत गिरने के बाद सीमापुरी गोल चक्कर, डीएलएफ भोपूरा और आसपास की सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ। दिल्ली यातायात पुलिस ने लोगों से घटनास्थल के आसपास जाने से बचने, सड़क पर रुकने या वाहन खड़ा करने से बचने और यातायात कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की। पुलिस ने कहा कि रास्ते खुले रहने से एंबुलेंस और बचाव वाहनों को तेजी से आने-जाने में मदद मिलेगी।
एक महीने बाद फिर सामने आया इमारत गिरने का हादसा
यह हादसा दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को हुए पांच मंजिला छात्रावास हादसे के करीब एक महीने बाद हुआ है। उस घटना में सात छात्रों और मजदूरों की मौत हुई थी तथा कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद दिल्ली नगर निगम ने खतरनाक इमारतों, अनधिकृत निर्माण और दिल्ली के मास्टर प्लान तथा भवन उपनियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। मंगलवार को पुराने सीमापुरी समेत कई इलाकों में भी ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया था।
घटना की जांच से स्पष्ट होगा इमारत गिरने का कारण
न्यू सीमापुरी की इमारत गिरने के बाद बचाव अभियान जारी रहा और मलबे में फंसे संभावित लोगों की तलाश की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एक बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है और 8 घायल लोगों को बचाया गया। भूकंप के झटकों और पास चल रहे तोड़फोड़ के काम से जुड़े स्थानीय दावे सामने आए हैं, लेकिन इमारत गिरने का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
नश्वर संसार से शाश्वत सतलोक तक
इमारतों का ढहना और जीवन की अनिश्चितताएं मनुष्य को इस संसार की नश्वरता का बोध कराती हैं। तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अनुसार यह संसार नाशवान है, जहां मनुष्य को बार-बार दुख, कष्ट और अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। वे बताते हैं कि सतलोक एक शाश्वत स्थान है, जहां किसी वस्तु का विनाश नहीं होता। हम अपने वास्तविक शाश्वत धाम सतलोक को छोड़कर इस नश्वर संसार में आए हैं।
यह आध्यात्मिक दृष्टिकोण मनुष्य को इस नाशवान संसार और शाश्वत सतलोक के बीच के अंतर को समझने तथा अपने वास्तविक आध्यात्मिक धाम को जानने की प्रेरणा देता है।
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