45 दिनों तक चले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद शुक्रवार को दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र बना। यहां हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी आरक्षण और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों के विरोध में जुटे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे नजर आए। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के चलते जंतर-मंतर पर माहौल काफी सक्रिय नजर आया।
मुख्य बिंदु
- जंतर-मंतर में बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज।
- जाति नहीं, आर्थिक स्थिति बने आधार, प्रदर्शनकारियों ने सरकार से की बड़ी मांग।
- आरक्षण पर फिर गरमाया मुद्दा, प्रदर्शनकारियों ने ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की उठाई मांग।
- महाराष्ट्र से राजस्थान तक विरोध की लहर, आरक्षण और UGC नियमों पर बढ़ी हलचल।
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की उठाई मांग
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग रखी। उनका तर्क था कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण का फायदा वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाने की भी मांग की। प्रदर्शन में SC/ST एक्ट को लेकर भी विरोध की गुंज सुनाई दिए।
कुछ लोगों ने कानून में बदलाव या इसे वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि किसी भी कानून का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को गलत तरीके से निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आरक्षण और संबंधित कानूनों की समीक्षा कर जरूरी बदलाव करने की मांग की।
जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाए आधार
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय सचिव (युवा) दीपराज रावल ने कहा कि सरकारी सहायता का लाभ तय करने में आर्थिक स्थिति को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जरूरतमंद व्यक्ति किसी भी जाति से हो, उसे शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए सरकारी मदद मिलनी चाहिए।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भी मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई। उनका कहना था कि कई बार आरक्षण का फायदा उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता, जो वास्तव में सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे अधिक वंचित हैं। उन्होंने सरकार से यह आकलन करने की मांग की कि मौजूदा व्यवस्था अपने उद्देश्य को कितना पूरा कर रही है और उसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है या नहीं।
आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ का प्रावधान लागू करने की मांग उठाई। साथ ही SC, ST और OBC से संबंधित मौजूदा नीतियों में बदलाव की जरूरत भी बताई गई। प्रदर्शनकारी यूएस राणा ने कहा कि उनकी मांग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी सहायता से दूर करना नहीं है।
उनका कहना था कि सरकारी मदद का फायदा वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए छात्रवृत्ति, फीस में सहायता और कोचिंग जैसी सुविधाएं आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर उपलब्ध कराने की मांग की गई।
महाराष्ट्र से राजस्थान तक उठी विरोध की आवाज
आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और UGC इक्विटी नियमों को लेकर चल रहा विरोध अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा है। पिछले कुछ समय में नागपुर, लखनऊ, जयपुर और विशाखापत्तनम समेत कई शहरों में प्रदर्शन हो चुके हैं। राजस्थान में श्री राजपूत करणी सेना ने UGC इक्विटी नियमों के विरोध में करीब 24 दिनों तक लगभग 800 किलोमीटर की पदयात्रा की थी। जयपुर पहुंचने के बाद प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड हटाने की कोशिश को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति भी बनी थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प की बात सामने आई थी।

