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QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत की सबसे बड़ी छलांग

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Last updated: August 16, 2026 11:14 am
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QS रैंकिंग 2027: IIT दिल्ली भारत में टॉप, 52 संस्थानों को जगह
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QS रैंकिंग 2027: वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत की स्थिति लगातार मजबूत होती जा रही है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के कुल 52 उच्च शिक्षण संस्थानों ने जगह बनाई है। खास बात यह है कि करीब एक दशक पहले, 2015 की QS रैंकिंग में भारत के सिर्फ 11 संस्थान शामिल थे। यानी इस अवधि में वैश्विक रैंकिंग में शामिल भारतीय संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

Contents
  • QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत की सबसे बड़ी  सफलता से संबंधित मुख्य बिंदु:
  • 10 साल में 11 से बढ़कर 52 हुए भारतीय संस्थान
  • IIT दिल्ली ने हासिल किया भारत में पहला स्थान
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों का भी मजबूत प्रदर्शन
  • VIT और BITS पिलानी ने लगाई बड़ी छलांग
  • 52 संस्थानों की QS 2027 रैंकिंग
  • NIRF ने भी बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
  • NEP 2020 और उच्च शिक्षा सुधारों का असर
  • 2014 के बाद नए उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तार
  • वैश्विक रैंकिंग में भारत की बढ़ती मौजूदगी का क्या मतलब है?
  • QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत की बड़ी छलांग से संबंधित मुख्य FAQs

इस बार भारतीय संस्थानों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IITs का दबदबा स्पष्ट दिखाई देता है। IIT दिल्ली ने पांच पायदान की छलांग लगाते हुए 118वीं वैश्विक रैंक हासिल की और भारत का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला संस्थान बना। इसके बाद IIT बॉम्बे 134वें, IIT मद्रास 170वें और IIT खड़गपुर 205वें स्थान पर रहे। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु और IIT कानपुर दोनों ने 221वीं रैंक हासिल की।

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत की सबसे बड़ी  सफलता से संबंधित मुख्य बिंदु:

  • QS 2027 में भारत के 52 संस्थान शामिल हुए, जबकि 2015 में यह संख्या सिर्फ 11 थी।
  • IIT दिल्ली 118वीं रैंक के साथ भारत का नंबर-1 संस्थान बना।
  • IIT बॉम्बे 134वें और IIT मद्रास 170वें स्थान पर रहे।
  • VIT वेल्लोर ने 94 और BITS पिलानी ने 93 पायदान की बड़ी छलांग लगाई।
  • NIRF में भागीदारी 2021 के 4,030 संस्थानों से बढ़कर 2025 में 7,692 हो गई।
  • NEP 2020, शोध, नवाचार और सरकारी योजनाओं को भारतीय उच्च शिक्षा के सुधार में अहम माना जा रहा है।

10 साल में 11 से बढ़कर 52 हुए भारतीय संस्थान

भारत के लिए इस रैंकिंग का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल शीर्ष संस्थानों की स्थिति नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शामिल होने वाले भारतीय संस्थानों की बढ़ती संख्या है। सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार 2015 की QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के 11 संस्थान शामिल थे। QS 2027 में यह संख्या बढ़कर 52 हो गई है।

यह भी पढ़ें : Top 10 Major Competitive Exams in India: Complete Guide to Eligibility, Careers and Exam Pattern bh

यह बदलाव भारतीय उच्च शिक्षा के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्थानों की बढ़ती पहचान को दर्शाता है। अब केवल पुराने IIT और IISc ही नहीं, बल्कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और डीम्ड संस्थानों की भी वैश्विक रैंकिंग में मौजूदगी बढ़ी है।

IIT दिल्ली ने हासिल किया भारत में पहला स्थान

QS 2027 में IIT दिल्ली भारतीय संस्थानों में सबसे आगे रहा। संस्थान ने पिछली रैंकिंग के मुकाबले पांच स्थान का सुधार करते हुए दुनिया में 118वीं रैंक हासिल की।

इसके बाद IIT बॉम्बे 134वें स्थान पर रहा। IIT मद्रास ने 170वीं रैंक, IIT खड़गपुर ने 205वीं रैंक और IISc बेंगलुरु तथा IIT कानपुर ने संयुक्त रूप से 221वीं रैंक हासिल की।

भारतीय संस्थानों की शुरुआती रैंकिंग में IIT रुड़की 335वें और IIT गुवाहाटी 349वें स्थान पर रहे। इससे तकनीकी और शोध आधारित संस्थानों की वैश्विक उपस्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों का भी मजबूत प्रदर्शन

इस बार सिर्फ IITs ही चर्चा में नहीं हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 322वीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई 470वें, IIT BHU वाराणसी 510वें, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी 526वें और IIT इंदौर 546वें स्थान पर रहे।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने 555वीं रैंक हासिल की, जबकि BITS पिलानी 575वें स्थान पर रहा। IIT हैदराबाद को 588वीं और VIT वेल्लोर को 597वीं रैंक मिली। सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी 655वें और जामिया मिलिया इस्लामिया 686वें स्थान पर रही।

VIT और BITS पिलानी ने लगाई बड़ी छलांग

रैंकिंग में सुधार के मामले में कुछ भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। VIT वेल्लोर ने 94 पायदान की बड़ी छलांग लगाकर 597वीं रैंक हासिल की। इसी तरह BITS पिलानी ने 93 स्थान का सुधार करते हुए 575वीं रैंक प्राप्त की।

यह प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक रैंकिंग में सुधार केवल पुराने प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। निजी और डीम्ड विश्वविद्यालय भी शोध, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अकादमिक प्रदर्शन के आधार पर अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।

52 संस्थानों की QS 2027 रैंकिंग

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में शामिल भारतीय संस्थानों की रैंकिंग इस प्रकार है:

1. IIT दिल्ली – 118

2. IIT बॉम्बे – 134

3. IIT मद्रास – 170

4. IIT खड़गपुर – 205

5. IISc बेंगलुरु – 221

6. IIT कानपुर – 221

7. दिल्ली यूनिवर्सिटी – 322

8. IIT रुड़की – 335

9. IIT गुवाहाटी – 349

10. शूलिनी यूनिवर्सिटी – 452

11. अन्ना यूनिवर्सिटी – 470

12. IIT BHU, वाराणसी – 510

13. चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी – 526

14. IIT इंदौर – 546

15. JNU दिल्ली – 555

16. BITS पिलानी – 575

17. IIT हैदराबाद – 588

18. VIT वेल्लोर – 597

19. सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी – 655

20. जामिया मिलिया इस्लामिया – 686

21. IIT धनबाद – 701-710

22. थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी – 701-710

23. भारथियार यूनिवर्सिटी – 711-720

24. जाधवपुर यूनिवर्सिटी – 721-730

25. NIT तिरुचिरापल्ली – 721-730

26. OP जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी – 751-760

27. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी – 791-800

28. सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी – 791-800

29. सवीथा इंस्टीट्यूट – 801-850

30. IIT गांधीनगर – 851-900

31. मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन – 851-900

32. यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद – 851-900

33. एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा – 901-950

34. यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता – 901-950

35. यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई – 901-950

36. UPES देहरादून – 901-950

37. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी – 951-1000

38. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी – 1001-1200

39. चितकारा यूनिवर्सिटी – 1001-1200

40. गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी – 1001-1200

41. IIT भुवनेश्वर – 1001-1200

42. KIIT भुवनेश्वर – 1001-1200

43. पंजाब यूनिवर्सिटी – 1001-1200

44. शिव नादर यूनिवर्सिटी – 1001-1200

45. SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी – 1001-1200

46. अमृता विश्व विद्यापीठम – 1201-1400

47. गलगोटियास यूनिवर्सिटी – 1201-1400

48. IIIT इलाहाबाद – 1201-1400

49. सत्यबामा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी – 1201-1400

50. शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान (SOA) – 1201-1400

51. जामिया हमदर्द – 1401+

52. पोंडिचेरी यूनिवर्सिटी – 1401+

NIRF ने भी बढ़ाई प्रतिस्पर्धा

भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रदर्शन में घरेलू स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों का विभिन्न मानकों के आधार पर मूल्यांकन करना और उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।

NIRF की रैंकिंग व्यवस्था में शिक्षण, सीखने और संसाधन, शोध एवं पेशेवर गतिविधियां, स्नातक परिणाम, पहुंच एवं समावेशिता और संस्थानों के प्रति धारणा जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया जाता है।

सरकार के अनुसार NIRF में भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में अलग-अलग संस्थानों की भागीदारी करीब 4,030 थी, जो 2025 में बढ़कर 7,692 हो गई। इसी अवधि में NIRF के तहत प्राप्त आवेदनों की संख्या 6,272 से बढ़कर 14,163 हो गई।

NEP 2020 और उच्च शिक्षा सुधारों का असर

भारतीय संस्थानों के वैश्विक प्रदर्शन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़े सुधारों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। NEP के तहत उच्च शिक्षा में शोध, नवाचार, बहुविषयक शिक्षा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’, RUSA और PM-USHA जैसी सरकारी पहलों के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य संस्थानों में शैक्षणिक सुविधाओं, शोध क्षमता और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना है।

2014 के बाद नए उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तार

देश में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए पिछले वर्षों में कई नए संस्थान भी स्थापित किए गए हैं। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार 2014 के बाद 43 नए प्रमुख संस्थानों का निर्माण हुआ, जिनमें नए IITs, केंद्रीय विश्वविद्यालय और IIMs शामिल हैं।

इस विस्तार से देश के विभिन्न हिस्सों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। साथ ही नए संस्थानों को शोध, तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

वैश्विक रैंकिंग में भारत की बढ़ती मौजूदगी का क्या मतलब है?

QS रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की संख्या 11 से बढ़कर 52 हो गई है,उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हुए है। इसका अर्थ यह है कि भारतीय संस्थानों की वैश्विक अकादमिक पहचान का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हुआ है।

हालांकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग को संस्थान की गुणवत्ता का अकेला पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। अलग-अलग रैंकिंग एजेंसियां अलग-अलग मानकों और पद्धतियों का इस्तेमाल करती हैं। छात्रों के लिए संस्थान चुनते समय पाठ्यक्रम, फीस, फैकल्टी, प्लेसमेंट, शोध अवसर, कैंपस सुविधाओं और अपने करियर लक्ष्य जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

यह भी पढ़ें: विश्व बैंक — विकासशील देशों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का वैश्विक आधार

फिर भी QS 2027 में 52 भारतीय संस्थानों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान वैश्विक मंच पर अपनी पहचान को लगातार मजबूत कर रहे हैं। IIT दिल्ली का भारत में शीर्ष स्थान और VIT तथा BITS पिलानी जैसे संस्थानों की उल्लेखनीय प्रगति इस बदलाव के प्रमुख उदाहरण हैं।

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत की बड़ी छलांग से संबंधित मुख्य FAQs

Q1. QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के कितने संस्थान शामिल हैं?

उत्तर: QS 2027 रैंकिंग में भारत के कुल 52 संस्थानों ने जगह बनाई है।

Q2. QS 2027 में भारत का नंबर-1 संस्थान कौन बना?

उत्तर: IIT दिल्ली 118वीं वैश्विक रैंक के साथ भारत का सबसे बेहतर रैंक वाला संस्थान है।

Q3. IIT दिल्ली की QS रैंकिंग में क्या बदलाव हुआ?

उत्तर: IIT दिल्ली ने पिछली रैंकिंग के मुकाबले 5 पायदान का सुधार करते हुए 118वीं रैंक हासिल की।

Q4. 2027 रैंकिंग में IIT बॉम्बे और IIT मद्रास की रैंक क्या है?

उत्तर: IIT बॉम्बे 134वें और IIT मद्रास 170वें स्थान पर हैं।

Q5. किस भारतीय संस्थान ने सबसे बड़ी छलांग लगाई?

उत्तर: VIT वेल्लोर ने 94 पायदान और BITS पिलानी ने 93 पायदान का सुधार किया।

Q6. 2015 में QS रैंकिंग में भारत के कितने संस्थान थे?

उत्तर: 2015 की QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के सिर्फ 11 संस्थान शामिल थे।

Q7. भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार के पीछे किन कारणों को माना जा रहा है?

उत्तर: NEP 2020 के तहत शोध, नवाचार, बहुविषयक शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर के साथ NIRF, Institution of Eminence, RUSA और PM-USHA जैसी पहलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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