नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर बात की जो 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिल कर हमले किए जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ गई। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तेल समृद्धि क्षेत्र में लगातार हो रही बमबारी और हमले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की बड़ी उपस्थिति पर भी प्रकाश डाला और आश्वासन दिया कि सरकार उन्हें पूरा समर्थन दे रही है।
पेट्रोल का भंडार और एग्जिट होने की अपील
मोदी ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध पैदा करने की निंदा करते हुए कहा कि देश को तैयार और एकजुट रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के पास 53 लाख तन पेट्रोल का भंडार है और सरकार इसे बढ़ाकर 65 लाख टन करने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इथेनॉल मिलने (ब्लेंडिंग) के कारण हर साल करीब 4.30 करोड़ बैरल तेल का आयात बचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि भारतीय संसद इस मुद्दे पर एकजुट और सर्वसम्मत आवाज भेजें।
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प्रधानमंत्री के भाषण के अंत में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार को एक उचित चर्चा आयोजित करनी चाहिए ताकि अन्य सदस्य भी अपने विचार रख सकें।
युद्ध की निंदा, भारतीयों की सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने लोकसभा में बताया कि उन्होंने अधिकांश पश्चिम एशिया देश के राष्ट्रीय अध्यक्षों से बात की है जिन्होंने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। मोदी जी ने बताया कि “भारत ने मानवता के हित में शांति के लिए हमेशा आवाज उठाई है। बातचीत और कूटनीति इस समस्या का समाधान है। हमारे प्रयास तनाव कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में है।” उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर समर्थन किया।
मोदी जी ने बताया कि मैने स्वयं पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बात की है, मैंने उनसे तनाव कम करना तथा संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है। भारत नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन संबंधी बुनियादी ढांचों पर हमलों का विरोध करता है। वाणिज्यिक जहाज पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा पैदा करना अस्वीकार्य है। भारत कूटनीति (बातचीत और समझौते) के माध्यम से इस युद्ध जैसे माहौल में भी भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की लगातार कोशिश कर रहा है।
ईंधन (तेल और गैस) की पूर्ति
अपने बयान को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ईंधन की कमी को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में है ताकि जहां से भी संभव हो तेल और गैस की कमी को पूरा किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि देश के सभी बिजली संयंत्र में कोयले का पर्याप्त भंडार है। भारत के पास 53 लाख मैट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है और सरकार इसे बढ़ाकर 65 लाख मैट्रिक टन करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हमारी तेल कंपनियों द्वारा रखे गए भंडार अलग है। पिछले 11 वर्षों में हमारी शोधन (रिफाइनिंग) क्षमता में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
कृषि का भंडार
मोदी जी ने कृषि पर युद्ध के प्रभाव के बारे में बोलते हुए कहा कि देसी किसानों ने खाद्य भंडार भर लिया है इसलिए भारत खाद्य सुरक्षा के मामले में पूर्ण रूप से तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि खरीफ की बुवाई सही समय पर और बिना किसी परेशानी के हो। इसके लिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी सरकार ने वैश्विक संकटों का असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया है।
कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड
मोदी जी ने कहा कि भारत में गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही बिजली की मांग बढ़ गई है परंतु देश के सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा भारत में लगातार दूसरे वर्ष एक अरब टन से अधिक कोयले का उत्पादन करके भारत ने एक रिकॉर्ड बनाया है। पिछले 10 सालों में देश ने नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
भारतीयों की सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री में चलने वाले वाणिज्यिक जहाज में भारतीय चालक दल के सदस्यों की संख्या भी बहुत अधिक है। मोदी जी ने कहा कि इन विभिन्न कर्म से भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक है इसीलिए यह आवश्यक है कि इस संकट पर भारत की संसद की सर्वसम्मत और एकजुट आवास दुनिया तक पहुंचे।
उन्होंने कहा की युद्ध प्रभावित क्षेत्र में प्रत्येक भारतीय को हर संभव सहायता दी जा रही है और युद्धग्रस्त ईरान के 1000 लोग लोगों सहित 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हालांकि इस संघर्ष के दौरान कई लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके परिवारों को आवश्यक सहायता दी जा रही है और घायलों के इलाज को सुनिश्चित किया जा रहा है।
कुदरत का नियम और मानव धर्म की सच्चाई
शास्त्र अनुसार इस पृथ्वी पर केवल एक ही धर्म है; वह मानव धर्म है। मनुष्य अपने स्वास्थ्य के लिए विभिन्न धर्मों में बंट गया, जिससे कुदरत का नियम टूट गया। विभिन्न धर्मो के पवित्र ग्रंथों में भी केवल मानव धर्म ही पढ़ने को मिलता है और पूरी पृथ्वी एक घर है ऐसा बताया गया है परंतु मनुष्य ने अपने स्वास्थ्य के लिए पृथ्वी को बांट दिया; जिससे कुदरत का नियम टूट गया।
कुदरत के नियम को एक बार फिर पृथ्वी पर स्थापित करने के लिए और समस्त सीमाओं को समाप्त करने के लिए भारत की पृथ्वी पर जन्मे महान संत जिन्हो ने मानव धर्म को स्थापित करने का बीड़ा उठाया है। उन महान का नाम “संत रामपाल जी महाराज” है और उनका नारा है –
“जीव हमारी जाती है, मानव धर्म हमारा।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।”
कबीर परमात्मा ही हैं सर्वशक्तिमान: शास्त्रों से प्रमाण
संत रामपाल जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में समस्त धर्म के समस्त पवित्र ग्रंथों में से यह प्रमाण दिया है कि, ”परमात्मा एक है और उस परमात्मा का नाम कबीर है।” संत रामपाल जी महाराज जी ने शास्त्रों को खोलकर बताया की, वेदों में लिखा है “कबीर्देव”, कुरान शरीफ में “कबीर अल्लाह”, बाइबिल में “ऑल माइटी कबीर” और नानक जी ने अपनी वाणी में कहा है कि “सर पीरां दे पीर, आलम बड़ा कबीर”।
संत रामपाल जी महाराज पूरे विश्व से निवेदन करते हैं कि कबीर नमक परमात्मा की शरण ग्रहण करने से पूरे विश्व में शांति प्रदान होगी, पूरा विश्व एक होगा। कूटनीति से कुछ समय के लिए राहत प्रदान हो सकती है परंतु संपूर्ण राहत प्राप्त करने के लिए सत्य भक्ति करना अनिवार्य है और सत्यभक्ति अर्थात शास्त्र अनुसार कबीर परमात्मा की भक्ति मुझे संत रामपाल दास से प्राप्त करके ही हो सकती है।

