भारतीय एलपीजी टैंकर “शिवालिक”, जो भारतीय शिपिंग निगम (Shipping Corporation of India) का हिस्सा है, सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित रूप से पार करने के बाद गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा। इसमें कतर से करीब 40,000 मेट्रिक टन कुकिंग गैस लाई गई। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए यह राहत भरी खबर है। ऐसे में इस गैस की खेप को बेहद जरूरी डिलीवरीमाना जा रहा है।
एलपीजी टैंकर का भारत पहुंचना
भारत का एलपीजी टैंकर, जिसे भारतीय शिपिंग निगम (Shipping Corporation of India) संचालित करता है, कतर के रास लफान (Ras Laffan) से रवाना होकर लगभग सुबह 9:00 बजे मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) पहुंचा। पश्चिम एशिया में ईरान का अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगी हुई थी, परंतु हाल ही में नई दिल्ली में भारत और तेहरान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने टैंकर को वहां से गुजरने की अनुमति दे दी।
अन्य टैंकर को भी मिली अनुमति
एलपीजी टैंकर “शिवालिक” के बाद अन्य टैंकर “नंदा देवी” भी होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुका है और मंगलवार को मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। जब से ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने युद्ध को जन्म दिया है, तब से “शिवालिक” और “नंदा देवी” भारत पहुंचने वाले दूसरे और तीसरे टैंकर हैं।
LPG बचाने के आसान तरीके: ऊर्जा संकट के समय रसोई गैस की समझदारी से बचत
पहले टैंकर, जिसमें कच्चा तेल ले जाया जा रहा था, वह सऊदी अरब का लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर था। दोनों गैस टैंकर “शिवालिक” और “नंदा देवी” जहाज पर लगभग 92,700 मेट्रिक टन गैस लाई जा रही है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा चौथा भारतीय ध्वज वाला टैंकर “जग प्रकाश” भी जलडमरूमध्य के पूर्वी किनारे से रवाना हो चुका है।
कीमतें आसमान छू गईं
ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तेहरान द्वारा लगाए गए अनौपचारिक अवरोध के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। इस कारण इस संकरे समुद्री रास्ते से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हो गई है। सामान्य हालात में दुनिया के तेल और गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तेल और गैस टैंकरों के लिए खतरा बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और दो बार 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।
भारत में तेल और एलपीजी की चिंता
युद्ध शुरू होने के बाद गैस की आपूर्ति भी भारत में चिंता का विषय बन गई है, विशेष रूप से एलपीजी यानी द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर, जो भारत भर में 33 करोड़ से अधिक घरों में एक महत्वपूर्ण वस्तु है। भारत, खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है और इसकी अधिकतर आपूर्ति मिडिल ईस्ट के देशों से होती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर युद्ध के कारण एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर व्यापक चिंताएं पैदा हो गई हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि स्थिति अभी भी नियंत्रण में है।
सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती एलपीजी की कालाबाजारी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाना है। इस दिशा में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी, तेल कंपनियों के प्रतिनिधि और राज्य सरकारों के साथ मिलकर रोजाना दो बार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, इस समस्या को नियंत्रित करने में राज्यों की भूमिका सबसे अहम है।
रविवार और सोमवार को असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में स्थानीय पुलिस और सरकारी तेल कंपनियों की संयुक्त टीमों ने अवैध रूप से एलपीजी सिलेंडर जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की।
सरकार का बयान
प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि एलपीजी उत्पादन में 28% की वृद्धि की गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि बुकिंग में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण एलपीजी गैस की कमी का डर पैदा हुआ। लोग घबराहट में ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं।
अधिकारियों ने जनता से शांत रहने की अपील की और कहा कि किसी तरह की कमी नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि घबराहट में ज्यादा खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है। पहले टैंकर जिसमें कच्चा तेल ले जा जाया जा रहा था वह टैंकर सऊदी अरब का लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर था। दोनों गैस टैंकर शिवालिक और नंदा देवी जहाज पर लगभग 92700 मीट्रिक टन गैस लाई जा रही है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा चौथा भारतीय ध्वज वाला टैंकर जग प्रकाश भी जल्दडमरुमध्य के पूर्वी किनारे से रवाना हो चुका है।
कीमतें आसमान छू गई
ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तेहरान द्वारा लगाए गए अनौपचारिक अवरोध के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। इस कारण इस संकरे समुद्री रास्ते से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हो गई है। सामान्य हालात में दुनिया के तेल और गैस व्यापार का लगभग पाँचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में, ईरान ने होर्मुज नदी (Strait of Hormuz) पर वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की। इस महत्वपूर्ण समुंद्री मार्ग पर तेल और गैस टैंकरों के लिए खतरा बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और दो बार 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।
भारत भर में तेल और एलपीजी की चिंता
युद्ध शुरू होने के बाद गैस की आपूर्ति भी भारत में चिंता का विषय बन गई है, विशेष रूप से एलपीजी यां द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस सिलेंडर, जो भारत भर में 33 करोड़ से अधिक घरों में एक महत्वपूर्ण वस्तु है। भारत, खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और इसकी अधिकतर आपूर्ति मिडिल ईस्ट के देशों में होती है।
होर्मुज (Strait of Hormuz) पर युद्ध के कारण एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर व्यापक चिंताएं पैदा हो गई है हालांकि सरकार का कहना है की स्थिति अभी भी नियंत्रण में है।
प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि एलपीजी उत्पादन में 28% की वृद्धि की गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि बुकिंग में अचानक हुई बढ़ोतरी के करण एलपीजी गैस की कमी का डर पैदा हुआ। लोग घबराहट में ज्यादा सिलेंडर बुक कर रहे हैं। अधिकारियों ने जनता से शांत रहने की अपील की और कहा कि किसी तरह की कमी नहीं है और साथ ही उन्होंने कहा की घबराहट में ज्यादा खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. शिवालिक टैंकर कहां से आया है?
कतर के रास लफान पोर्ट से।
Q2. इसमें कितनी गैस लाई गई है?
करीब 40,000 मेट्रिक टन एलपीजी।
Q3. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया के तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% संभालता है।
Q4. क्या भारत में गैस की कमी हो सकती है?
सरकार के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और कोई कमी नहीं है।

