देश में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन क्या वे सही मायनों में कुछ सीख भी पा रहे हैं? इसी सवाल का व्यावहारिक और ठोस उत्तर है FLN, यानी Foundational Literacy and Numeracy। सरल शब्दों में कहें तो FLN का मतलब है—बच्चों में पढ़ने, लिखने और गिनती की बुनियादी क्षमता का विकास।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि यह नींव बाल्यावस्था में मजबूत नहीं होगी, तो आगे की पूरी शिक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है। आइए जानते है क्या है FLN और नई शिक्षा नीति में इसका क्या महत्व है?
FLN (Foundational Literacy and Numeracy) क्या है?
FLN (Foundational Literacy and Numeracy) तीन मूल क्षमताओं पर केंद्रित है—
- साक्षरता (Literacy): अक्षरों की पहचान, शब्द को पढ़ना, वाक्य समझना और सरल लिखना।
- संख्यात्मक ज्ञान (Numeracy): गिनती, संख्याओं की पहचान, जोड़-घटाव जैसी बुनियादी गणित की समझ।
- समझने की क्षमता: पढ़े गए या सुने गए विषय को समझकर उस पर प्रतिक्रिया दे पाना।
FLN (Foundational Literacy and Numeracy) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा 3 तक हर बच्चा अपनी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में सरल पाठ पढ़ सके और बुनियादी गणित के सवाल हल कर सके।
शिक्षा की नींव क्यों है FLN?
शिक्षा को अगर एक इमारत माना जाए, तो FLN (Foundational Literacy and Numeracy) उसकी नींव है। हम सभी जानते है कि अगर नींव कमजोर होगी, तो ऊपर की मंज़िलें टिक नहीं पाएंगी।
कई अध्ययनों में सामने आता है कि जो बच्चे शुरुआती कक्षा में पढ़ना और गिनना नहीं सीख पाते, वे आगे चलकर विज्ञान, गणित और अन्य विषयों में भी पिछड़ जाते हैं। FLN बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करता है और सीखने की रुचि को बढ़ाता है।
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FLN और नई शिक्षा नीति
नई शिक्षा नीति (NEP) में FLN को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नीति के अनुसार, प्रारंभिक कक्षाओं में रटने की बजाय समझ आधारित सीख पर जोर दिया गया है। खेल, गतिविधियों, कहानियों और स्थानीय उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को सिखाने की बात कही गई है, ताकि सीखना बोझ नहीं बल्कि आनंद बने।

शिक्षक की भूमिका
FLN (Foundational Literacy and Numeracy) को सफल बनाने में शिक्षक की भूमिका सबसे अहम होती है। शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि बच्चे की सीखने की प्रक्रिया का मार्गदर्शक होता है। बच्चों की मानसिक गति को समझना, सरल भाषा और उदाहरण का प्रयोग, नियमित मूल्यांकन के जरिए कमजोर बच्चों की पहचान ही FLN (Foundational Literacy and Numeracy) की सफलता के प्रमुख आधार हैं।
अभिभावकों की भागीदारी
FLN (Foundational Literacy and Numeracy) सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं है। अभिभावक घर पर बच्चों से बातचीत, कहानी सुनाना, रोजमर्रा के कामों में गिनती सिखाना जैसे छोटे प्रयासों से बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। जब घर और स्कूल मिलकर काम करते हैं, तब बच्चों में सीखने का असर दोगुना हो जाता है।
डिजिटल और नवाचार की भूमिका
आज के दौर में डिजिटल साधन भी FLN (Foundational Literacy and Numeracy) को मजबूत करने में सहायक बन रहे हैं। ऑडियो-वीडियो सामग्री, इंटरैक्टिव ऐप्स और स्थानीय भाषा में डिजिटल कंटेंट बच्चों को सीखने के प्रति आकर्षित कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आज डिजिटल साधनों का उपयोग संतुलित और उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए।
FLN (Foundational Literacy and Numeracy) केवल एक शैक्षणिक शब्द नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा एक आधारभूत लक्ष्य है। FLN (Foundational Literacy and Numeracy) केवल पढ़ना, लिखना और गिनती सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के बौद्धिक और नैतिक विकास की नींव है। जब बुनियादी शिक्षा मजबूत होती है, तभी बच्चों में सही सोच और विवेक विकसित होता है।
बच्चों को प्रारंभ से ही करवाए भले बुरे का ज्ञान
इसी क्रम में संत रामपाल जी महाराज की शिक्षा यह संदेश देती है कि ज्ञान के साथ संस्कार और अध्यात्म भी आवश्यक हैं। बाल्यावस्था से ही बच्चों को सत्य, करुणा और अनुशासन जैसे मूल्यों की समझ दी जाए, तो वे केवल अच्छे विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनते हैं। FLN और आध्यात्मिक शिक्षा का यह समन्वय ही सशक्त भविष्य की सच्ची आधारशिला है। अधिक जानकारी के लिए डाउनलोड करें जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज एप।

