Income Tax Rules 2026 देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ रहे हैं। केंद्र सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। बजट 2025 में घोषित ये बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026 से प्रभावी होंगे, जिनका सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, सेविंग और रिफंड पर पड़ेगा।
खासतौर पर मिडिल क्लास, सैलरीड एम्प्लॉई, सीनियर सिटीजन और छोटे निवेशकों को इन नए इनकम टैक्स नियमों से बड़ा फायदा मिलने वाला है। आइए विस्तार से जानते हैं Income Tax New Rules 2026 के 5 सबसे बड़े बदलाव।
1. ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर जीरो टैक्स
Income Tax Rules 2026 की सबसे बड़ी खासियत है टैक्स-फ्री इनकम लिमिट में बढ़ोतरी। नए टैक्स रिजीम के तहत सेक्शन 87A के अंतर्गत अब ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर पूरा टैक्स रिबेट मिलेगा।
इसके अलावा, सैलरीड टैक्सपेयर्स को ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा। यानी अगर आपकी ग्रॉस सैलरी ₹12.75 लाख तक है, तो आपको एक भी रुपया इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
यह बदलाव खास तौर पर मिडिल क्लास के लिए राहत भरा है, जिनकी आमदनी टैक्स स्लैब के आसपास रहती है।
2. मेडिकल ट्रीटमेंट और पर्क्विजिट नियमों में राहत
बजट 2025 में कर्मचारियों को मिलने वाले पर्क्विजिट्स (Perquisites) को लेकर भी अहम सुधार किया गया है। अब कंपनी द्वारा विदेश में मेडिकल ट्रीटमेंट पर किए गए खर्च की टैक्स-फ्री सीमा बढ़ा दी गई है।
पहले यह सीमा काफी कम थी और कई दशकों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। अब सरकार ने बढ़ती मेडिकल लागत और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए इसे अपडेट किया है, जिससे ज्यादा कर्मचारियों को टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।
3. ULIP टैक्स नियमों पर स्थिति स्पष्ट
ULIP यानी Unit Linked Insurance Plan को लेकर टैक्सपेयर्स के बीच लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। Income Tax Rules 2026 में इस पर पूरी तरह स्पष्टता दी गई है।
अब जिन ULIP पॉलिसीज पर सेक्शन 10(10D) के तहत छूट नहीं मिलती, उन्हें कैपिटल एसेट माना जाएगा। ऐसी पॉलिसी से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेंस टैक्स लगेगा।
यह नियम खास तौर पर उन निवेशकों के लिए जरूरी है जिन्होंने ₹2.5 लाख से अधिक प्रीमियम वाली ULIP में निवेश किया है।
4. सीनियर सिटीजन को ब्याज आय में बड़ी राहत
सीनियर सिटीजन के लिए Income Tax Rules 2026 में एक और खुशखबरी है। अब ब्याज आय पर TDS की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी वरिष्ठ नागरिक को बैंक FD, पोस्ट ऑफिस या अन्य स्रोतों से सालाना ₹1 लाख तक ब्याज मिलता है, तो उस पर कोई TDS नहीं कटेगा।
इस बदलाव से सीनियर सिटीजन को बेहतर कैश फ्लो मिलेगा और बार-बार रिफंड क्लेम करने की परेशानी भी कम होगी।
5. डिविडेंड इनकम पर TDS सीमा बढ़ी
छोटे निवेशकों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने डिविडेंड इनकम पर TDS सीमा को भी दोगुना कर दिया है।
अब सालाना ₹10,000 तक के डिविडेंड पर कोई TDS नहीं कटेगा, जबकि पहले यह सीमा ₹5,000 थी। इससे शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों को सीधा फायदा मिलेगा।
Income Tax Rules 2026 क्यों हैं खास?
नए टैक्स नियम साफ संकेत देते हैं कि सरकार का फोकस अब ईज ऑफ डूइंग टैक्स पर है। टैक्स स्लैब को सरल बनाना, अनावश्यक TDS से राहत देना और रिफंड की प्रक्रिया को आसान करना इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य है।
अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं, निवेश करते हैं या रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं, तो ये नए नियम आपकी टैक्स प्लानिंग को पूरी तरह बदल सकते हैं।
Income Tax New Rules 2026 न सिर्फ टैक्स बोझ कम करते हैं, बल्कि स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग का मौका भी देते हैं। सही जानकारी और समय पर निर्णय लेकर आप इन नियमों का पूरा फायदा उठा सकते हैं और अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं।

