SA NewsSA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
SA NewsSA News
  • Home
  • Business
  • Politics
  • Educational
  • Tech
  • History
  • Events
  • Home
  • Business
  • Educational
  • Events
  • Fact Check
  • Health
  • History
  • Politics
  • Sports
  • Tech
Follow US
© 2024 SA News. All Rights Reserved.

Home » चीनी हैकर्स का ‘गायब होना’ साइबर युद्ध की तैयारी! टियनफू कप के पीछे छिपा है खतरनाक सरकारी प्लान

Hindi NewsWorld

चीनी हैकर्स का ‘गायब होना’ साइबर युद्ध की तैयारी! टियनफू कप के पीछे छिपा है खतरनाक सरकारी प्लान

SA News
Last updated: November 28, 2025 12:05 pm
SA News
Share
cyber-war-china-hindi
SHARE

2017 के बाद दुनिया भर के बड़े हैकिंग कंपटीशन, जैसे Pwn2Own, से चीनी हैकर्स की अनुपस्थिति ने वैश्विक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों को हैरान कर दिया था। कभी हर प्रतियोगिता में अव्वल रहने वाले इन हैकर्स का अचानक गायब हो जाना एक बड़े बदलाव का संकेत था। शुरू में किसी को इसकी वजह समझ नहीं आई, लेकिन 2019 में एक घटना ने चीन के इस खतरनाक गेम प्लान का पर्दाफाश कर दिया। यह खुलासा हुआ कि चीनी सरकार ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने हैकर्स को अंतर्राष्ट्रीय मंचों से हटाकर, उन्हें देश के भीतर साइबर जासूसी (Cyber Espionage) और साइबर युद्ध (Cyber Warfare) की तैयारी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था।

Contents
  • क्यों अंतर्राष्ट्रीय मंचों से हटे चीनी हैकर्स?
  • टियनफू कप: साइबर युद्ध की फैक्ट्री
    • हैकर्स को नियंत्रित करने का नया मॉडल
  • KaoS एक्सप्लॉइट और उइगर मुस्लिमों की जासूसी
  • iSoon लीक और वैश्विक ख़तरा
  • साइबर युद्ध के दौर में भारत का रुख समझिए!
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
    • 1. Pwn2Own क्या है?
    • 2. जीरो-डे वल्नरेबिलिटी (Zero-Day Vulnerability) क्या है?
    • 3. टियनफू कप शुरू करने का चीन का मुख्य मकसद क्या था?
    • 4. KaoS एक्सप्लॉइट का इस्तेमाल किसके खिलाफ किया गया था?
    • 5. साइबर युद्ध (Cyber Warfare) क्या है?

इस रणनीति के तहत एक विशेष हैकिंग प्रतियोगिता टियनफू कप की शुरुआत की गई, जिसका मकसद जीरो-डे वल्नरेबिलिटी की जानकारी सीधे एप्पल या गूगल को देने के बजाय, पहले चीनी सरकार को सौंपना था।

क्यों अंतर्राष्ट्रीय मंचों से हटे चीनी हैकर्स?

कई सालों तक चीनी हैकर्स अपनी असाधारण स्किल्स के लिए जाने जाते थे। वे Pwn2Own जैसे एथिकल हैकिंग इवेंट्स में सॉफ्टवेयर की कमजोरियां (Security Flaws या Loop Holes) ढूंढते थे और कंपनियों को इसकी जानकारी देकर लाखों डॉलर का नकद पुरस्कार जीतते थे। यह एक कानूनी प्रक्रिया थी, जिससे कंपनियों की सुरक्षा बेहतर होती थी।

  • साइबर सिक्योरिटी फर्म के CEO की आलोचना: 2017 के बाद, चीन की टॉप साइबर सिक्योरिटी फर्म Qihoo 360 के CEO जो हंगेई का एक बयान सामने आया। उन्होंने इन हैकर्स की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपनी कीमती हैकिंग स्किल्स विदेशों में जाकर क्यों दिखा रहे हैं? उनका मानना था कि इन कमजोरियों की कीमत लाखों डॉलर नहीं, बल्कि अरबों डॉलर है।
  • सरकारी प्रतिबंध: इस बयान को चीनी सरकार ने गंभीरता से लिया। कुछ ही समय बाद, चीनी सरकार ने आधिकारिक तौर पर साइबर सिक्योरिटी शोधकर्ताओं और हैकर्स पर विदेशी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया।

यह प्रतिबंध स्पष्ट संकेत था कि चीन अब इन वल्नरेबिलिटीज को राष्ट्रीय संपत्ति मानकर, उनका उपयोग अपने भू-राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों के लिए करना चाहता था।

टियनफू कप: साइबर युद्ध की फैक्ट्री

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर प्रतिबंध लगने के तुरंत बाद, चीन ने अपने हैकर्स के कौशल को नियंत्रित करने के लिए टियनफू कप (Tianfu Cup) नामक एक घरेलू हैकिंग कंपटीशन शुरू किया।

हैकर्स को नियंत्रित करने का नया मॉडल

टियनफू कप का आयोजन इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट के विकल्प के रूप में किया गया, जिसमें पुरस्कार राशि $1 मिलियन से भी अधिक रखी गई थी। लेकिन इसमें एक बड़ा और खतरनाक फर्क था:

  • डेटा पहले सरकार को: टियनफू कप में हैकर्स को यह बाध्य किया गया कि वे जो भी हैक या वल्नरेबिलिटी ढूंढेंगे, वह सीधे गूगल या एप्पल जैसी कंपनियों को नहीं दी जाएगी, बल्कि पहले चीनी सरकार को सौंपी जाएगी। सरकार फिर इस जानकारी को अपने पास रखकर आगे कंपनी तक पहुंचाती थी, जिससे इस बीच इन अत्यंत मूल्यवान “जीरो-डे” हैक्स का दुरुपयोग संभव हो सके।
  • सैन्य और सरकारी लिंक्स: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस कंपटीशन के आयोजक और इसमें शामिल होने वाली कंपनियां (जैसे TopSec, Alibaba, Qihoo 360) चीनी सेना (PLA) के साथ गहरे लिंक रखती हैं। TopSec जैसी कंपनियाँ टियनफू कप के माध्यम से नेशनलिस्ट हैकर्स की भर्ती कर रही हैं, जो सीधे तौर पर चीन की साइबर युद्ध की तैयारी का हिस्सा है।

KaoS एक्सप्लॉइट और उइगर मुस्लिमों की जासूसी

टियनफू कप के पहले इवेंट में, Qihoo 360 के एक शोधकर्ता ने एप्पल के iPhone में एक अत्यंत शक्तिशाली और खतरनाक हैक, जिसे KaoS एक्सप्लॉइट नाम दिया गया, खोजा। इस एक्सप्लॉइट की मदद से वह केवल एक वेब पेज ओपन करवाकर दूर से ही किसी भी iPhone को नियंत्रित करने में कामयाब हो गया था।

  • बड़ा खुलासा: जनवरी 2019 में एप्पल ने चुपचाप इस फ्लॉ को ठीक किया। लेकिन अगस्त 2019 में गूगल (Google) ने एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया, जिसमें बताया गया कि iPhones पर एक बड़े पैमाने पर हैकिंग अभियान चल रहा था।
  • टियनफू कप से कनेक्शन: गूगल की रिसर्च में जिन पाँच एक्सप्लॉइट्स की पहचान की गई, उनमें से एक बिल्कुल वही KaoS एक्सप्लॉइट था, जिसे टियनफू कप में दिखाया गया था।
  • पीड़ित: बाद में पता चला कि इस हैकिंग अभियान के पीड़ित कोई और नहीं, बल्कि चीन के शिनजियांग प्रांत के उइगर मुसलमान और अल्पसंख्यक थे। चीनी सरकार इस हैक का इस्तेमाल उनकी बड़े पैमाने पर जासूसी (Mass Surveillance) और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए कर रही थी।

यह घटना चीनी हैकर्स को अंतर्राष्ट्रीय इवेंट्स से हटाने और उन्हें सरकार के नियंत्रण में लाने की वास्तविक मंशा को साबित करती है।

iSoon लीक और वैश्विक ख़तरा

फरवरी 2024 में, चीन की एक आईटी सिक्योरिटी फर्म iSoon का डेटा कोड शेयरिंग वेबसाइट GitHub पर लीक हो गया।

  • जासूसी उपकरणों का निर्माण: लीक हुए डेटा में कंपनी के ईमेल और चैट लॉग्स थे, जिससे खुलासा हुआ कि iSoon साइबर जासूसी (Cyber Spying) के टूल बनाती है और उन्हें चीनी सरकार और पीपल्स लिबरेशन आर्मी को बेचती है।
  • भुगतान मॉडल: चैट से यह भी पता चला कि iSoon हर हैक किए गए ईमेल इनबॉक्स के लिए सरकार से $500 से $75,000 तक चार्ज करती थी।

इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि चीन अब हैकिंग स्किल्स का इस्तेमाल पुरस्कार जीतने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की पूर्ति और वैश्विक शक्ति बनने के लिए कर रहा है, जिससे दुनिया भर के देशों, खासकर भारत और अमेरिका, के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।.

यह वीडियो साइबर युद्ध के जटिल विषय पर एक हिंदी दृष्टिकोण प्रदान करता है।

साइबर युद्ध के दौर में भारत का रुख समझिए!

ये समय ऐसा है कि युद्ध के हथियार बदल चुके हैं । लेकिन युद्ध तो युद्ध होता है और इससे कभी किसी का लाभ नहीं हुआ । Modern वारफेयर में पारंपरिक हथियारों के मुकाबलों ज्यादा नरसंहार होता है। संत रामपाल जी महाराज मानव जाति को इस विनाश से बचाते हुए एक सुरक्षित मार्ग पर ले जा रहे हैं।

उनका बताया मार्ग शांति का मार्ग है, भगवान प्राप्ति का सुगम रास्ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी कई बार युद्ध के संबंध में भारत को आध्यात्मिकता से जोड़ते दिखते हैं, जैसे उनका ये बयान की भारत युद्ध नहीं बुद्ध की धरती है, काफी चर्चा में रहता है। बुद्ध पर हमारे आर्टिकल्स पढ़े जा सकते हैं, लेकिन इस विषय में ये कहा जा सकता है कि भारत ही वो देश है, जहां से निकली विचारधारा (संत रामपाल जी महाराज की विचारधारा) दुनिया से युद्ध के मायनों और कारणों को समाप्त कर रही है।

संत रामपाल जी महाराज के ऊपर तमाम भविष्यवाणियां भी सटीक बैठती है, जिन्हें विस्तार से हमारे अन्य लेखों में पढ़ा जा सकता है। इन भविष्यवाणियों में संत रामपाल जी महाराज जी को दुनिया का पालनहार तारणहार बताया गया है। वर्तमान में वो हिसार की सेंट्रल जेल में बंद है लेकिन धरातल पर उनके समाज सुधार के कार्य बहुत प्रशंसा बटोर रहे हैं।

उनके सामाजिक कार्यों को देखते हुए, आगामी 7 दिसंबर को उन्हें किसान रक्षक सम्मान भी दिया जा रहा है, जिसके बारे में हमारे लेख पढ़े जा सकते हैं। फिलहाल उन भविष्यवाणियों की सटीकता जांचने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, कि संत रामपाल जी महाराज ही युद्धों से इस दुनिया की रक्षा करेंगे और मोक्ष का मार्ग देकर पृथ्वी के एक एक जीव को सुखी करेंगें। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. Pwn2Own क्या है?

Pwn2Own दुनिया की सबसे बड़ी एथिकल हैकिंग प्रतियोगिता है। इसमें हैकर्स बड़ी कंपनियों के सॉफ्टवेयर और डिवाइसेस में सुरक्षा कमज़ोरियाँ (Zero-Day Vulnerabilities) ढूंढते हैं, जिसके बदले में उन्हें नकद इनाम मिलता है। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा में सुधार करना है।

2. जीरो-डे वल्नरेबिलिटी (Zero-Day Vulnerability) क्या है?

यह एक सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में मौजूद वह सुरक्षा दोष या कमज़ोरी है, जिसकी जानकारी निर्माता कंपनी को भी नहीं होती है और इसलिए उसे ठीक करने के लिए कोई “पैच” (Patch) या अपडेट उपलब्ध नहीं होता है। हैकर्स इसका फायदा उठाकर हमला करते हैं।

3. टियनफू कप शुरू करने का चीन का मुख्य मकसद क्या था?

टियनफू कप शुरू करने का मुख्य मकसद चीनी हैकर्स के कौशल को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से दूर करना और उन्हें सरकार के नियंत्रण में लाना था। इसका इस्तेमाल देश के भीतर जीरो-डे हैक्स की जानकारी जमा करने और उन्हें साइबर जासूसी तथा साइबर युद्ध के लिए उपयोग करने में किया जाता है।

4. KaoS एक्सप्लॉइट का इस्तेमाल किसके खिलाफ किया गया था?

KaoS एक्सप्लॉइट का इस्तेमाल चीनी सरकार द्वारा देश के उइगर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों की बड़े पैमाने पर जासूसी करने के लिए किया गया था। इस हैक के जरिए उनके आईफोन को रिमोटली नियंत्रित किया जा सकता था।

5. साइबर युद्ध (Cyber Warfare) क्या है?

यह एक ऐसी स्थिति है, जहाँ कोड और नेटवर्क जैमिंग जैसे डिजिटल तरीकों का उपयोग करके किसी देश के कंप्यूटर सिस्टम, बुनियादी ढांचे (जैसे बिजली, पानी, संचार) या वित्तीय बाज़ारों को नुकसान पहुँचाया जाता है, जिससे वह देश घुटनों पर आ जाए।

Share This Article
Email Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
BySA News
Follow:
Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.
Previous Article Who Is Greta Thunberg How One Voice Challenged The World On Climate Crisis Who Is Greta Thunberg? How One Voice Challenged The World On Climate Crisis
Next Article भारत में Divorce Culture क्यों बढ़ रहा है Social Analysis भारत में Divorce Culture क्यों बढ़ रहा है? Social Analysis 2025
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

Popular Posts

Nanotechnology: The Science Of Atomic Manipulation 

Nanotechnology is the science of manipulation and manufacture of materials and devices at the subatomic,…

By SA News

What is UPSC? Full Form, Role, Exam Details & Career Scope

The Union Public Service Commission (UPSC) is India’s central agency responsible for recruiting candidates for…

By SA News

जेफ्री एपस्टीन का आपराधिक साम्राज्य: एक व्यवस्थित शोषण और संस्थागत विफलता का विश्लेषण

जेफ्री एपस्टीन का सेक्स ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) मामला दर्शाता है कि किस प्रकार धन, राजनीतिक…

By SA News

You Might Also Like

Kartarpur Corridor Agreement Extended Until 2029 Strengthening India-Pakistan Religious Cooperation
World

Kartarpur Corridor Agreement Extended Until 2029: Strengthening India-Pakistan Religious Cooperation

By SA News
supreme-court-anger-over-pollution-in-delhi-hindi
Hindi NewsLocal

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट असंतुष्ट, 113 एंट्री पॉइंट्स में से 13 पर निगरानी, बाकी 100 पर सवाल 

By SA News
No Label Relationships का युवाओं पर असर: कारण और समाधान
Hindi News

No Label Relationships का युवाओं पर असर: कारण और समाधान

By SA News
RBI का बड़ा फैसला अब 10 साल के बच्चे खुद चला सकेंगे अपना बैंक खाता
FinanceHindi News

RBI का बड़ा फैसला: अब 10 साल के बच्चे खुद चला सकेंगे अपना बैंक खाता

By SA News
SA NEWS LOGO SA NEWS LOGO
748KLike
340KFollow
13KPin
216KFollow
1.8MSubscribe
3KFollow

About US


Welcome to SA News, your trusted source for the latest news and updates from India and around the world. Our mission is to provide comprehensive, unbiased, and accurate reporting across various categories including Business, Education, Events, Health, History, Viral, Politics, Science, Sports, Fact Check, and Tech.

Top Categories
  • Politics
  • Health
  • Tech
  • Business
  • World
Useful Links
  • About Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Copyright Notice
  • Contact Us
  • Official Website (Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj)

© SA News 2025 | All rights reserved.