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Home » क्या आप जानते हैं डिमेंशिया दिमाग से नहीं, पैरों से शुरू हो सकता है। जानिए चौंका देने वाली जानकारी

Health

क्या आप जानते हैं डिमेंशिया दिमाग से नहीं, पैरों से शुरू हो सकता है। जानिए चौंका देने वाली जानकारी

Khushi Sharma
Last updated: October 26, 2025 9:35 am
Khushi Sharma
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क्या आप जानते हैं डिमेंशिया दिमाग से नहीं
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डिमेंशिया आमतौर पर दिमाग की बीमारी के रूप में जानी जाती है, लेकिन बेंगलुरु के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अरुण एल. नाइक ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि यह बीमारी अक्सर पैरों की कमज़ोरी और धीमी चाल से शुरू हो सकती है, जो भविष्य में मानसिक गिरावट और याददाश्त की कमी का संकेत देती है। शोधों के अनुसार, पैरों की मांसपेशियों की कमज़ोरी, धीमी गति और निष्क्रिय जीवनशैली दिमाग के लिए हानिकारक साबित होती है। अगर सही समय पर पैरों की देखभाल की जाए तो डिमेंशिया के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Contents
  • डिमेंशिया और पैरों का अटूट संबंध जानें ये मुख्य बातें:
  • डिंमेंशिया क्या है?
  • शोध और तथ्य
  • पैरों की सेहत और मस्तिष्क का स्वास्थ्य
  • सक्रिय रहने के फायदे :
  • डिमेंशिया के शुरुआती संकेत
  • पैरों को मज़बूत रखने के उपाय
  • उम्र बढ़ना और मस्तिष्क स्वास्थ्य
  • सूजन और डिमेंशिया:
  • कभी भी देर नहीं होती
  • पैरों के संकेत: मस्तिष्क की चेतावनी
  • सभी समस्याओं से मुक्ति: तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण से जीवन में सुख और अच्छा स्वास्थ्य
  • FAQs on Dementia Starting from Legs

डिमेंशिया और पैरों का अटूट संबंध जानें ये मुख्य बातें:

  • पैरों की कमज़ोरी, धीमी गति और निष्क्रियता दिमाग की कोशिकाओं ( brain cells ) पर असर डालती हैं।
  • पैरों की मांसपेशियों (muscles) का नियमित उपयोग दिमाग तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाता है और मस्तिष्क के लिए आवश्यक Brain-Derived Neurotrophic Factor (BDNF) रिलीज़ करता है।

डिंमेंशिया क्या है?

डिमेंशिया एक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें दिमाग की क्षमता धीरे-धीरे कमज़ोर होने लगती है। इसका असर याददाश्त, सोचने-समझने, निर्णय लेने और रोज़मर्रा के काम करने की क्षमता पर पड़ता है। साधारण शब्दों में, यह दिमाग की उम्र बढ़ने जैसी कमज़ोरी है, जिससे व्यक्ति अपने सामान्य जीवन में मुश्किल महसूस करता है।

शोध और तथ्य

2020 में जरनो ऑफ एजिंग रिसर्च 

(Journal of Aging Research) के अध्ययन में 1.6 लाख लोगों पर शोध किया गया। इसके अनुसार, नियमित चलने और व्यायाम करने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा 28% और अल्ज़ाइमर का खतरा 45% कम पाया गया।

उम्र के साथ पैरों की मांसपेशियां कमज़ोर होती हैं (सार्कोपीनिया), जिससे रक्त परिसंचरण कम होता है और मस्तिष्क में कोशिकाओं की गिरावट तेज़ होती है।

डॉ. अरुण नाइक के अनुसार:  

“अगर आपके पैर धीमे हो रहे हैं, तो मस्तिष्क भी पीछे रह सकता है। पैरों की देखभाल करना, मस्तिष्क की सुरक्षा करना है।” —

पैरों की सेहत और मस्तिष्क का स्वास्थ्य

पैरों की मांसपेशियों और मस्तिष्क के बीच एक सीधा संबंध होता है। पैरों का हर कदम फ्रंटल लोब (Frontal lobe), सेरेबेलम (cerebellum) और स्पाइनल कॉर्ड (spinal cord) के साथ जुड़ा होता है। पैरों की कमज़ोरी:

  • रक्त प्रवाह में कमी लाती है
  • मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता
  • न्यूरॉन्स की वृद्धि और मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी प्रभावित होती है

सक्रिय रहने के फायदे :

  • रोज़ाना चलना और पैरों की एक्सरसाइज (extensions) करना मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।
  • कुछ गतिविधियां मस्तिष्क में ऐसे रसायन (BDNF, IGF-1, VEGF) पैदा करती हैं, जो नई मस्तिष्क कोशिकाओं के निर्माण और उनकी सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं।

डिमेंशिया के शुरुआती संकेत

डॉ. नाइक और उनकी टीम के अनुसार, पैरों में कुछ बदलाव डिमेंशिया का संकेत हो सकते हैं:

1. चलने की गति में कमी: तेज़ चलने की आदत धीरे-धीरे कम होना

2. मांसपेशियों की कमज़ोरी: सीढ़ियाँ चढ़ने या कुर्सी से उठने में कठिनाई

3. चलने की असमानता: कदमों में हिचकिचाहट, थिरकना या झटके

4. डुअल-टास्क कठिनाई: चलते हुए बात करना या गिनती करना मुश्किल होना

नोट: इन संकेतों को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सक्रियता और व्यायाम डिमेंशिया के खतरे को कम कर सकता है।

पैरों को मज़बूत रखने के उपाय

1. नियमित चलना और व्यायाम: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें।

2. नीचे की बॉडी की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: स्क्वाट, लेग प्रेस और रेसिस्टेंस बैंड का उपयोग करें।

3. संतुलन और समन्वय अभ्यास: एक पैर पर खड़े होना, टंडेम वॉक और स्टेपिंग ड्रिल्स।

4. हाइड्रेशन और पोषण: प्रोटीन, विटामिन D (Vit. D) , B12, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर आहार।

5. डॉक्टर से सलाह: अगर पैर कमज़ोर या चलने में समस्या बिना किसी चोट के है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जाँच कराएँ।

उम्र बढ़ना और मस्तिष्क स्वास्थ्य

  • 40 वर्ष की उम्र के बाद हर साल 1–2% मांसपेशियों की कमी होती है।
  • निष्क्रिय जीवनशैली मस्तिष्क के लिए हानिकारक है, जिससे प्रिफ्रंटल कॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस सिकुड़ते हैं।
  • नियमित व्यायाम और चलना मस्तिष्क की संरचना और संज्ञानात्मक कार्यक्षमता को बनाए रखता है।

सूजन और डिमेंशिया:

  • उम्र के साथ शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ती है, जो न्यूरॉन्स और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंचाती है।
  • नियमित व्यायाम साइटोकाइन्स और CRP/IL-6 स्तर को नियंत्रित करता है, मस्तिष्क की सुरक्षा करता है।

कभी भी देर नहीं होती

  • डॉ. नाइक के अनुसार, किसी भी उम्र में व्यायाम शुरू किया जा सकता है।
  • 60 की उम्र में भी नियमित चलने और हल्का व्यायाम करने से डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम होता है।
  • योग, ताई ची जैसे मस्तिष्क और शरीर को जोड़ने वाले अभ्यास तनाव को कम करते हैं और कोर्टीसोल (Cortisol) को नियंत्रित करते हैं।

“सार्कोपीनिया का इंतजार मत कीजिए। 40 की उम्र से ही कदम बढ़ाइए। मजबूत पैर, तेज मस्तिष्क।” — डॉ. अरुण एल. नाइक

पैरों के संकेत: मस्तिष्क की चेतावनी

पैर और मस्तिष्क का संबंध केवल शारीरिक नहीं, बल्कि संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के लिए भी अहम है। पैरों की देखभाल करना मतलब अपने मस्तिष्क को मज़बूत रखना। पैरों की कमज़ोरी को नज़रअंदाज करना भविष्य में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर असर डाल सकता है।

इस प्रकार, डिमेंशिया की शुरुआत पैरों से होने की संभावना हमारे लिए जागरूकता का संदेश देती है। समय पर व्यायाम, पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करना, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाना मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सभी समस्याओं से मुक्ति: तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण से जीवन में सुख और अच्छा स्वास्थ्य

यदि हम पूर्ण परमात्मा की शरण में रहते हैं, तो असंख्य कठिनाईयाँ स्वयं ही हल हो जाती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण हैं, जहाँ लोग गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, एड्स (AIDS) या अन्य जीवन को प्रभावित करने वाली बीमारियों से जूझ रहे थे, लेकिन तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आने से उनके सभी रोग और लाइलाज बिमारियां समाप्त हो गईं।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी शास्त्रानुकूल भक्ति और ऐसे मंत्र बताते हैं जो हमारे शास्त्रों में प्रमाणित हैं और जो हमें वास्तविक लाभ पहुँचाते हैं। उनके सत्संग में शामिल होने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और जीवन में सुधार आता है। आप उनके द्वारा लिखित पवित्र पुस्तक ‘जीने की राह’ का अध्ययन करें और उनके सत्संग में जाकर जीवन में बदलाव अनुभव करें।

FAQs on Dementia Starting from Legs

1. डिमेंशिया पैरों से कैसे शुरू हो सकता है?

पैरों की कमज़ोरी और धीमी चाल मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और न्यूरॉन्स के लिए आवश्यक प्रोटीन कम करती है।

2. पैरों की कौन-सी समस्याएँ डिमेंशिया का संकेत हैं?

धीमी चाल, मांसपेशियों की कमज़ोरी, असमान कदम और डुअल-टास्क कठिनाई शुरुआती संकेत हैं।

3. डॉ. अरुण नाइक क्या कहते हैं पैरों और दिमाग के संबंध पर?

वे कहते हैं, “अगर पैर धीमे हैं, तो मस्तिष्क भी पीछे रह सकता है। मज़बूत पैर यानी तेज़ दिमाग।”

4. डिमेंशिया से बचने के लिए पैरों की सेहत कैसे बनाएँ?

रोज़ाना चलना, स्क्वाट, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलन अभ्यास और सही पोषण ज़रूरी हैं।

5. क्या उम्र बढ़ने पर भी व्यायाम डिमेंशिया को रोक सकता है?

हाँ, किसी भी उम्र में नियमित चलना और व्यायाम मस्तिष्क की सुरक्षा और याददाश्त सुधारते हैं।

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